सत्या राजपूत, रायपुर। युवाओं के नवाचारी विचारों को यदि उचित मार्गदर्शन, पूंजी और संस्थागत सहयोग मिले तो यही विचार रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने सोमवार को इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव-2026 के शुभारंभ अवसर पर यह बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि वास्तविक आत्मनिर्भरता तभी संभव है, जब नवाचार और उद्यमिता के अवसर राज्य के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचें। उन्होंने आदिवासी बहुल बस्तर, सरगुजा और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से सामने आने वाले नवाचारों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने की जरूरत बताई। उनके अनुसार छत्तीसगढ़ में नवाचार और उद्यमिता की सबसे अधिक संभावनाएं कृषि आधारित उद्योगों में हैं। कृषि आधारित उद्यमों से किसानों के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ पहुंचाया जा सकता है।

राज्यपाल ने युवाओं से केवल नौकरी पाने के बजाय अपने विचारों को उद्यम में बदलने का साहस रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शुरुआती असफलताओं से निराश होने के बजाय युवा साहस के साथ शुरुआत करें, लगातार प्रयास करें और अनुभवी लोगों से मार्गदर्शन लें। उन्होंने वित्तीय संस्थानों, उद्योग जगत और निवेशकों से युवाओं की क्षमता और पूंजी के बीच मजबूत सेतु बनाने का भी आग्रह किया।

बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण

कॉन्क्लेव के शुभारंभ के साथ राज्यपाल डेका ने छत्तीसगढ़ के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया।

दो एकड़ क्षेत्र में विकसित यह केंद्र जैव-प्रौद्योगिकी अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप विकास और उद्यमिता के लिए समर्पित मंच के रूप में काम करेगा। केंद्र में हाईटेक एवं अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के साथ BSL-3 सुविधा, आधुनिक एनालिटिकल एवं टेस्टिंग सुविधाएं, किट एवं तकनीक विकास इकाइयां, वेस्ट ट्रीटमेंट सिस्टम तथा को-वर्किंग एवं इनक्यूबेशन स्पेस उपलब्ध हैं।

केंद्र का उद्देश्य ‘लैब से टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी से उद्यम’ की यात्रा को गति देना है। एग्री-बायोटेक्नोलॉजी, बायोफर्टिलाइजर एवं बायोकंट्रोल एजेंट्स, हेल्थ एवं डायग्नोस्टिक्स, फूड बायोटेक्नोलॉजी तथा पर्यावरणीय जैव-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और उद्यमियों को यहां प्रयोगशाला सुविधाएं, प्रशिक्षण, मेंटरिंग, परीक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके माध्यम से शोधार्थियों और नवाचारकर्ताओं को प्रोटोटाइप विकास, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, मेंटरशिप तथा उद्योग एवं निवेशकों से जुड़ने के अवसर भी उपलब्ध कराने की योजना है।

24 से अधिक स्टार्टअप्स ने दिखाए नवाचार

यूथ कॉन्क्लेव के दौरान राज्यपाल ने नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में 24 से अधिक स्टार्टअप्स ने अपने नवाचार, तकनीक और समाधान प्रदर्शित किए। राज्यपाल ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन करते हुए युवा उद्यमियों से उनके स्टार्टअप, तकनीक और व्यावसायिक मॉडल की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया।

कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अन्य हिस्सों से आए विद्यार्थी, युवा उद्यमी, नवाचारी और स्टार्टअप स्थापित करने के इच्छुक युवा हिस्सा ले रहे हैं। आयोजन को लेकर जारी पूर्व सूचना में 1200 से अधिक युवाओं के पंजीयन की जानकारी दी गई थी, जबकि देशभर से 1500 से अधिक युवाओं के शामिल होने की संभावना बताई गई थी।

400 से अधिक कृषि स्टार्टअप्स को किया इनक्यूबेट

राज्यपाल डेका ने आईजीकेवी आरकेवीवाई-रफ्तार एग्री बिजनेस इनक्यूबेटर (आईजीकेवी आर-एबीआई) के कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 400 से अधिक कृषि आधारित स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट कर चुका है।

इनमें 129 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता मिली है और कुल 14.93 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की गई है। संस्थान के प्रयासों से 1,000 से अधिक उत्पाद विकसित हुए हैं, जबकि 93 महिला संस्थापकों को सहयोग मिला है। संबंधित स्टार्टअप्स ने अब तक 85 पुरस्कार भी हासिल किए हैं।

राज्यपाल के अनुसार इन प्रयासों का प्रभाव एक लाख से अधिक किसानों तक पहुंचा है। इन स्टार्टअप्स के माध्यम से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 7,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। संबंधित स्टार्टअप्स ने 200 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी राजस्व अर्जित किया है तथा 27.06 करोड़ रुपये का निवेश जुटाया है।

राज्यपाल ने स्टार्टअप पिचिंग प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़ के युवा उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं का मंच बनेगा।

तीन स्टार्टअप्स को 25-25 लाख की ग्रांट

शुभारंभ समारोह के दौरान आईजीकेवी राबी द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से चयनित तीन स्टार्टअप्स को 25-25 लाख रुपये की ग्रांट-इन-एड सहायता के चेक प्रदान किए गए।

इनमें एनएसबी कंज्यूमर प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड, जेएच इन्क्यूबेटर्स एंड मशरूम्स प्राइवेट लिमिटेड तथा अगोरा इको टूरिज्म प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।

इसके साथ ही आईजीकेवी राबी का इनक्यूबेशन चरण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले पांच स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेशन ग्रेजुएशन सर्टिफिकेट भी प्रदान किए गए।

इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय रायपुर द्वारा प्रकाशित इंफॉर्मेशन ब्रोशर तथा ग्रामीण उद्यमिता पर केंद्रित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।

नौकरी खोजने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल ने कहा कि तीन दिवसीय कॉन्क्लेव में विद्यार्थी, युवा उद्यमी, स्टार्टअप्स, नवोन्मेषक, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि और विभिन्न संस्थाएं एक मंच पर जुड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि करीब 1200 प्रतिभागी इस आयोजन में शामिल हो रहे हैं और 24 से अधिक स्टार्टअप्स अपने नवाचार, तकनीक तथा समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला उद्यमी बनाने के लिए आवश्यक मेंटरशिप, निवेश, तकनीकी सहयोग, बौद्धिक संपदा संरक्षण तथा वित्तीय और बाजार संबंधी सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह मंच तैयार किया गया है।

डाॅ. चंदेल ने बताया कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय पिछले चार दशकों से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि प्रयोगशालाओं और क्षेत्र में विकसित ज्ञान एवं तकनीक समाज तक पहुंचे और उसे उत्पाद तथा उद्यम में परिवर्तित किया जा सके। इससे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसर पैदा किए जा सकें।

कृषि से AI और डीप-टेक तक पर फोकस

28 से 30 सितंबर तक आयोजित इस कॉन्क्लेव का आयोजन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा कृषि मंडपम में किया जा रहा है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक का सहयोग है।

कॉन्क्लेव में कृषि एवं एग्रीटेक, खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु स्मार्ट तकनीक, फिनटेक तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

आयोजन के दौरान कुल चार तकनीकी सत्र होंगे। इनमें विशेषज्ञों के व्याख्यान, स्टार्टअप प्रदर्शनी, स्टार्टअप पिचिंग, निवेशक-स्टार्टअप संवाद, नीति संवाद, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन सत्र आयोजित किए जाएंगे। उत्कृष्ट नवाचारों एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार भी दिए जाएंगे।

पिचिंग प्रतियोगिता में शीर्ष तीन युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को क्रमशः एक लाख रुपये, 75 हजार रुपये और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

अनुज शर्मा बोले- स्टार्टअप क्रांति का सूत्रधार बनेगा आयोजन

विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि यूथ कॉन्क्लेव-2026 छत्तीसगढ़ में युवा उद्यमिता विकास और नवाचार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के साथ आईआईटी भिलाई, एनआईटी रायपुर और आईआईआईटी नवा रायपुर जैसे तकनीकी संस्थानों का एक मंच पर आना प्रदेश में स्टार्टअप गतिविधियों को नई दिशा देगा।

कार्यक्रम को आईआईटी भिलाई के निदेशक डाॅ. राजीव प्रकाश और एनआईटी रायपुर के निदेशक डाॅ. समीर बाजपेयी ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर विधायक धरसींवा अनुज शर्मा, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल, आईआईटी भिलाई के निदेशक डाॅ. राजीव प्रकाश, एनआईटी रायपुर के निदेशक डाॅ. समीर बाजपेयी तथा नाबार्ड छत्तीसगढ़ के मुख्य महाप्रबंधक डी.के. गावली सहित अन्य अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्यमी और युवा उपस्थित रहे।

राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की पहल

यूथ कॉन्क्लेव-2026 को नवाचार, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य स्तरीय पहल के रूप में आयोजित किया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, इनक्यूबेटर्स, शिक्षाविदों और विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों को साझा मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।

आयोजन का उद्देश्य नए विचारों, अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों को व्यावसायिक अवसरों तथा सफल उद्यमों में बदलने के साथ प्रदेश में मजबूत और आत्मनिर्भर स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करना है।

कॉन्क्लेव के जरिए स्थानीय समस्याओं के तकनीकी और व्यावसायिक समाधान, नवाचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान तथा युवाओं को उद्यमिता के लिए आवश्यक अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है। यह आयोजन राज्य में लागू नवाचार एवं स्टार्टअप संवर्धन नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मंच के रूप में रखा गया है।

चार दशक के कृषि अनुसंधान को उद्यमिता से जोड़ने की कोशिश

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय का फोकस कृषि शिक्षा और अनुसंधान से विकसित तकनीकों को प्रयोगशाला से बाहर खेत, बाजार और समाज तक पहुंचाने पर है। कॉन्क्लेव इसी कड़ी में अनुसंधान, तकनीक, निवेश और बाजार को एक मंच पर लाने का प्रयास है।

सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर भी इसी दिशा में काम करेगा। अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और इनक्यूबेशन सुविधाओं से लैस यह केंद्र शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को प्रोटोटाइप तैयार करने, तकनीकी मार्गदर्शन लेने, परीक्षण कराने और उद्योग तथा निवेशकों से जुड़ने का अवसर उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है।

समारोह के अंत में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक अनुसंधान डाॅ. वी.के. त्रिपाठी ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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