अनुज कुमार पांडेय, गोपालगंज। बिहार के गोपालगंज में दर्ज आर्म्स एक्ट के एक मामले में मोकामा के पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब बिहार सरकार ने केस की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच पुलिस से लेकर सीआईडी को सौंप दी। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, गोपालगंज पुलिस ने केस से जुड़ी तमाम फाइलें और दस्तावेज बिहार सीआईडी को ट्रांसफर कर दिए हैं। अब सीआईडी इस पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से तफ्तीश करेगी।
वायरल वीडियो से शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सेमरांव गांव का है। दरअसल, बीती 2 और 3 मई को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें शामिल होने के लिए विधायक अनंत सिंह पहुंचे थे। यह कार्यक्रम सेमराव पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि गुड्डू राय के यहां रखा गया था। इसी आयोजन के दौरान कुछ युवकों द्वारा खुलेआम हथियार लहराने और गानों पर डांस करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई, जिसके बाद स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और मामले की जांच शुरू की गई।
विधायक और गायक समेत 9 पर FIR
वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मीरगंज थाना पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया। पुलिस ने पूर्व विधायक अनंत सिंह और भोजपुरी गायक गुंजन सिंह सहित कुल 9 नामजद लोगों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने वीडियो में दिख रहे हथियारों की बैलिस्टिक जांच कराने का फैसला किया। इसके लिए सभी आरोपियों को आधिकारिक नोटिस जारी कर निर्देश दिया गया था कि वे 15 मई तक अपने-अपने हथियारों और उनके वैध लाइसेंस के साथ जांच प्रक्रिया में शामिल हों।
कोर्ट की कार्यवाही और सीआईडी को जांच
जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले को और मजबूत करने के लिए केस में दो नई धाराएं जोड़ने की अनुमति मांगी थी, जिसके लिए कोर्ट में आवेदन भी दिया गया था। इस आवेदन पर सुनवाई होनी अभी बाकी ही थी कि सरकार ने अचानक इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच सीआईडी को सौंपने का निर्णय ले लिया। अब सीआईडी की विशेष टीम गहनता से यह पता लगाएगी कि वायरल वीडियो में प्रदर्शित किए गए हथियार लाइसेंसी थे या अवैध, और किस परिस्थिति में कानून को ताक पर रखकर उनका प्रदर्शन किया गया।
30 मई के फैसले पर टिकी नजरें
इस बीच, गोपालगंज की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में 30 मई को अनंत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर अहम सुनवाई होने वाली है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जांच सीआईडी के हाथों में जाने के बाद कोर्ट की कार्यवाही पर भी इसका असर दिख सकता है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस कार्रवाई को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन का साफ कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर की जा रही है।
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