चंडीगढ़ में सीआईएसएफ की उच्च स्तरीय बैठक में देश के हवाई अड्डों और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा अभेद्य बनाने की रणनीति तैयार की गई। आधुनिक तकनीक और एंटी-ड्रोन सिस्टम के जरिए आसमान से आने वाले हर खतरे को नाकाम करने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश की सुरक्षा को लेकर चंडीगढ़ में ऐसी बैठक हुई, जिसके बाद सीमा और एयरपोर्ट सुरक्षा को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ड्रोन से बढ़ते खतरे, संवेदनशील इलाकों की चुनौतियां और हवाई अड्डों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों ने मंथन किया। बैठक में कुछ ऐसे फैसलों और तैयारियों पर चर्चा हुई, जो आने वाले समय में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह बदल सकते हैं।
दरअसल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक प्रवीर रंजन की अध्यक्षता में चंडीगढ़ में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसमें सीआईएसएफ के उत्तर क्षेत्र और हवाई अड्डा क्षेत्र की सुरक्षा तैयारियों, सामरिक रणनीतियों और परिचालन क्षमताओं का मूल्यांकन किया गया। बैठक में खासतौर पर ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण और एयरपोर्ट सुरक्षा को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
सीआईएसएफ ने भारतीय सेना के सहयोग से चरणबद्ध ड्रोन-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत जवानों को संदिग्ध ड्रोन को ट्रैक करने और निष्क्रिय करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात जैसे सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए एंटी-सेबोटेज उपायों और कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों की समीक्षा भी की गई।
बैठक में एयरपोर्ट सुरक्षा के लिए कई आधुनिक तकनीकों की समीक्षा की गई, जिनमें बायोमेट्रिक डिजिटल सत्यापन, फुल बॉडी स्कैनर, सीसीटीवी वीडियो एनालिटिक्स, ऑटोमेटिक ट्रे रिटर्न सिस्टम और बम डिटेक्शन सिस्टम शामिल हैं। साथ ही क्विक रिएक्शन टीम को मजबूत करने के लिए 659 कमांडो विशेष प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं और 2026 के अंत तक देश के सभी 72 हवाई अड्डों पर इसे लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

