रांची। झारखंड में सिविल जज जूनियर डिवीजन की भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने का मामला अब हाईकोर्ट की एकल पीठ में सुना जाएगा। राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं को खंडपीठ ने सिंगल बेंच में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।
सोमवार को चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में मामले की सुनवाई हुई। प्रार्थियों की ओर से कहा गया कि वे अभी न्यायिक अधिकारी नियुक्त नहीं हुए हैं और उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
एकल पीठ में पहले से चल रहा है समान मामला
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि इसी तरह के एक अन्य मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ में पहले से चल रही है। इसलिए इन मामलों को भी उसी पीठ में भेजा जाना चाहिए।
इस मांग पर राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई। इसके बाद खंडपीठ ने तीनों याचिकाओं को संबंधित एकल पीठ में भेजने का निर्देश दिया।
किस फैसले को दी गई है चुनौती?
आदित्य भास्कर, आयुष कुमार वर्मा समेत अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाओं में सिविल जज जूनियर डिवीजन परीक्षा से संबंधित विज्ञापन संख्या 22/2023 को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है।प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अनुराग कश्यप, अभय आनंद और सोनल ने अदालत में पक्ष रखा।
टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं पर सरकार ने लिया था फैसला
दरअसल, सीआईडी जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात टीडीपीएल की भूमिका वाली सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी।
सरकार ने इसके साथ ही 2014 से अब तक आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की जांच कराने का भी फैसला लिया था।इसी कार्रवाई के तहत सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई। अब इस मामले में याचिकाकर्ताओं की दलीलों और सरकार के पक्ष पर हाईकोर्ट की एकल पीठ सुनवाई करेगी।


