CM Rekha Gupta Loktantra Bachao Padyatra: सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष ने दिल्ली के रामलीला मैदान में महारैली की। इस रैली में विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता, छात्र संगठन और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। INDIA ब्लॉक के नेता रामलीला मैदान पहुंच चुके हैं। रैली में बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए है। विपक्ष की रैली के खिलाफ बीजेपी भी लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा निकाली निकाली। बीजेपी ने दिल्ली में भी लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा निकाली। लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा में खुद दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता सड़कों पर उतरकर कांग्रेस से देश के लोकतंत्र बचाने की अपील की।
दिल्ली में बीजेपी ने लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के नेतृत्व में निताली। करीब एक किमी लंबा मार्च हरि नगर से तिलक नगर तक निकाला। इसमें 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवार, सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।
वहीं, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरियाणा के रोहतक में रैली निकाली। उन्होंने कहा कि वोट चोरी कांग्रेस की विरासत है। ये वोट चोरी भी करते हैं और जनता के वोट का अपमान भी करते हैं। राहुल गांधी विदेशी ताकतों की टूलकिट बनकर काम कर रहे हैं। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने रामलीला मैदान में SIR के खिलाफ रैली के लिए 1 नवंबर का दिन जानबूझकर चुना है। 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी हिंसा हुई थी। केद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि आज सिख विरोधी हिंसा के पीड़ितों को याद करना चाहिए था लेकिन राहुल गांधी उन्हें भूलकर रामलीला मैदान में अपनी राजनीति चमका रहे हैं।
लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा पर सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर अराजकता का मंच सजाने वाले राहुल गांधी, कांग्रेस और INDI गठबंधन की असलियत देश देख रहा है। 1 नवंबर की तारीख देश भूला नहीं है। 1984 में इसी दिन दिल्ली की सड़कों पर सिखों के नरसंहार का भयावह अध्याय लिखा जा रहा था। हजारों निर्दोष सिख परिवारों के जख्म आज भी हरे हैं। और आज उसी तारीख को कांग्रेस रामलीला मैदान में लोकतंत्र बचाने का ढोंग कर रही है। यह राजनीतिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
दिल्ली सीएम ने आगे कहा कि त्योहारों के इस मौसम में जब दिल्ली के व्यापारी, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले अपने परिवारों की खुशहाली के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, तब कांग्रेस अपनी राजनीतिक नौटंकी से दिल्ली की रफ्तार रोकने और उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाने पर तुली है। पहले झूठ फैलाओ, फिर जनादेश को बदनाम करो, सड़कों पर अराजकता का माहौल बनाओ और अपनी राजनीतिक हताशा की कीमत देश और दिल्ली की जनता से वसूलो। यही राहुल गांधी की राजनीति का मॉडल बन चुका है। कांग्रेस लोकतंत्र की दुहाई देकर 1984 का कलंक नहीं मिटा सकती। न ही जनता द्वारा बार-बार नकारे जाने की हताशा में दिल्ली के व्यापारियों की रोजी-रोटी को दांव पर लगा सकती है। राहुल गांधी याद रखें, जनादेश से मिली हार का बदला देश से और अपनी राजनीतिक नाकामी की कीमत दिल्लीवालों से नहीं वसूली जा सकती।
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