पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने करवा चौथ के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्तों को समर्पित पावन पर्व करवा चौथ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह मंगलमय अवसर सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए तथा दांपत्य जीवन प्रेम और विश्वास के साथ सदैव खुशहाल बना रहे।

प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखेंगी। शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा करेंगी।

शुभ योगों में होगी पूजा-अर्चना

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार करवा चौथ पर गुरुवार, रोहिणी के बाद मृगशिरा नक्षत्र, परिघ योग के साथ बुधादित्य और लक्ष्मीनारायण योग का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन योगों में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय, चंद्रदेव और करवा माता की पूजा करने से सुखी दांपत्य जीवन, आरोग्यता और समृद्धि की कामना की जाती है।

सनातन परंपरा में पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और विश्वास को सुखी गृहस्थ जीवन का आधार माना गया है। धार्मिक कथाओं में माता पार्वती और भगवान शिव के साथ द्रौपदी तथा पांडवों से जुड़ी मान्यताएं भी इस पर्व से जोड़ी जाती हैं। पूजा के दौरान महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनेंगी और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करेंगी।

चलनी से चंद्रमा और पति के दर्शन की परंपरा

करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को सोलह शृंगार कर पूजा करेंगी। मिट्टी के करवे में जल रखकर दीपक, रोली, अक्षत और फूलों से पूजा की जाएगी। चंद्रोदय के बाद महिलाएं चलनी में दीपक रखकर चंद्रमा के दर्शन करेंगी और फिर उसी चलनी से पति को देखेंगी। इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगी। अंत में पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलेंगी।

करवा चौथ पूजा का समय

  • प्रदोष काल: शाम 5:09 बजे से 7:51 बजे तक
  • चंद्रमा को अर्घ्य: रात 8:56 बजे के बाद

चंद्रमा निकलने का वास्तविक समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए व्रत खोलने से पहले स्थानीय चंद्रोदय का समय देखना सही रहेगा।