बांग्लादेशी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन को CM शुभेंदु अधिकारी ने भरोसा दिलाया कि जब भी वह राज्य का दौरा करेंगी, उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी. रवींद्र सदन में कट्टरवाद-विरोधी एक साहित्यिक कार्यक्रम में तस्लीमा नसरीन करीब 19 साल बाद पहली बार कोलकाता में सार्वजनिक रूप से दिखाई दीं. उन्होंने कहा कि नई बीजेपी सरकार के तहत हर कोई अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल करने के लिए स्वतंत्र है.

तसलीमा नसरीन, 1994 में अपनी लेखनी को लेकर इस्लामी समूहों से मिली धमकियों के बाद बांग्लादेश छोड़कर निर्वासन में रह रही हैं.

पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बांग्लादेशी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन का पश्चिम बंगाल में स्वागत किया. करीब दो दशक बाद कोलकाता लौटीं निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी वापसी साबित करती है कि अन्याय स्थायी नहीं हो सकता. 

धार्मिक कट्टरपंथ की खुलकर आलोचना करने और महिलाओं के अधिकारों की वकालत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वालीं तसलीमा नसरीन ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विरोध में नहीं.

राज्य में बदले हुए राजनीतिक माहौल का जिक्र करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नयी सरकार अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. CM शुभेंदु अधिकारी ने  कहा कि आप एक लेखक हैं, हर कोई आपकी रचनाएं पढ़ता है. आपके पाठकों की संख्या काफी बड़ी है.

उन्होंने निर्वासित लेखिका को उनकी इच्छा अनुसार जितनी बार चाहें राज्य का दौरा करने का निमंत्रण भी दिया. उन्होंने कहा, जब भी आप चाहें, जितनी बार चाहें, यहां आ सकती हैं.

लेखिका तसलीमा नसरीन को 2007 में अपने लेखन को लेकर हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद कोलकाता छोड़ना पड़ा था. निर्वासन में बिताए अपने लंबे वक्त को याद करते हुए तस्लीमा ने कहा कि उन्हें ऐसे भविष्य की आशा है जहां किसी भी लेखक को अपनी बात कहने के लिए अपना देश छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े.

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