चंडीगढ़। नए पढ़ाई के सीजन की शुरुआत के साथ ही कॉलेजों और यूनिवर्सिटी कैंपस में रैगिंग को जड़ से खत्म करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। अब पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) यानी स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई के कोर्सों में एडमिशन लेने वाले हर एक छात्र के लिए ऑनलाइन एंटी-रैगिंग शपथ पत्र देना अनिवार्य कर दिया गया है। एंटी-रैगिंग शपथ पत्र का मतलब एक ऐसा कानूनी दस्तावेज होता है जिसमें छात्र यह वादा करता है कि वह किसी भी नए छात्र को परेशान नहीं करेगा। इस बार नियमों को और सख्त बनाते हुए केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और अभिभावकों की भी जिम्मेदारी तय कर दी गई है।
बिना सरकारी एफिडेविट के नहीं मिलेगी कॉलेज में सीट
उच्चतर शिक्षा विभाग ने देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए इस बात को बिल्कुल साफ कर दिया है। विभाग के मुताबिक इस जरूरी फॉर्म को ऑनलाइन भरे बिना किसी भी छात्र की दाखिला प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। इस ऑनलाइन फॉर्म में छात्र को यह लिखित गारंटी देनी होगी कि वह कॉलेज परिसर या उसके बाहर किसी भी तरह की रैगिंग की गतिविधि में शामिल नहीं होगा और न ही ऐसी किसी चीज को बढ़ावा देगा।
कड़ा एक्शन: सीधे जेल और दाखिला रद्द करने के हैं निर्देश
अधिकारियों का कहना है कि इस नियम को लागू करने का मुख्य मकसद नए आने वाले छात्रों को सुरक्षित माहौल देना है ताकि वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई कर सकें। अगर कोई भी छात्र नियमों को तोड़ता हुआ पाया जाता है या किसी नए छात्र के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो कॉलेज प्रशासन उसका एडमिशन तुरंत रद्द कर देगा। इसके साथ ही दोषी छात्र के खिलाफ पुलिस में मामला भी दर्ज कराया जा सकता है। विभाग ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्तर पर कमेटियां बनाकर कैंपस में पैनी नजर रखें।

