भुवनेश्वर: ओडिशा के किसानों के लिए धान खरीदी पंजीयन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति पर अब पूरी तरह विराम लग गया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘एग्री-स्टैक’ पंजीयन का धान खरीद के लिए आवश्यक ‘पी-पास’ (P-PASS) पंजीयन से कोई सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि वे इस बात को लेकर बिल्कुल भी चिंतित न हों, क्योंकि धान बिक्री की प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आएगी।
हाल के दिनों में किसानों के बीच यह अफवाह चल रही थी कि मंडियों में धान बेचने के लिए एग्री-स्टैक आईडी अनिवार्य कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने इस चर्चा का पूरी तरह खंडन करते हुए बताया कि एग्री-स्टैक और पी-पास दो अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। एग्री-स्टैक केवल राज्य और केंद्र सरकार द्वारा किसानों के आंकड़ों को एकीकृत करने का एक डिजिटल माध्यम है, जबकि धान खरीद पंजीयन पी-पास व्यवस्था के तहत ही संचालित होता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी किसान पी-पास (P-PASS) प्रणाली के माध्यम से ही अपना पंजीयन करा सकेंगे और आसानी से मंडियों में अपना धान बेच सकेंगे। एग्री-स्टैक पंजीयन के कारण किसी भी किसान को धान बिक्री से वंचित नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने दोहराया कि किसानों की सुविधा और उनका कल्याण सरकार की पहली प्राथमिकता है। मंडियों में सुचारू रूप से धान खरीद सुनिश्चित करने और हर किसान को उसकी उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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