कांग्रेस ने NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद से परेशान होकर जान गंवाने वाले 12 छात्रों की सूची जारी की है। पार्टी ने केंद्र सरकार की परीक्षा प्रणाली को बड़ा संकट करार दिया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। NEET परीक्षा, पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने 12 छात्रों के नामों की सूची जारी करते हुए दावा किया है कि देश की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था लाखों युवाओं पर असहनीय दबाव बना रही है और कई परिवारों को अपूरणीय नुकसान झेलना पड़ा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को केवल परीक्षा प्रबंधन की खामी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के गहरे संकट से जोड़ने की कोशिश की है।
पार्टी द्वारा जारी सूची में राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, तमिलनाडु और गुजरात के छात्रों के नाम शामिल किए गए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि NEET और उससे जुड़ी कथित अनियमितताओं, पेपर लीक विवादों तथा बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने छात्रों के मानसिक दबाव को कई गुना बढ़ा दिया है। पार्टी का कहना है कि युवाओं के सपनों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लाखों छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो युवाओं का भरोसा भी टूटता है। पार्टी का दावा है कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अवसर देना होना चाहिए, न कि छात्रों को असुरक्षा और अनिश्चितता के माहौल में धकेलना। इसी संदर्भ में कांग्रेस लगातार शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों पर बढ़ते दबाव को लेकर अभियान चला रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस युवाओं, छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रही है। हाल के वर्षों में पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं और NEET विवाद जैसे मुद्दों ने युवाओं के बीच व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कांग्रेस इसी असंतोष को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।
वहीं भाजपा और केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं तथा अनियमितताओं के मामलों में जांच एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और छात्रों के हित सर्वोपरि हैं।
हालांकि कांग्रेस द्वारा जारी सूची और लगाए गए आरोपों के बाद शिक्षा व्यवस्था, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। आने वाले समय में यह मुद्दा केवल शिक्षा तक सीमित रहेगा या फिर बड़ा राजनीतिक विषय बनेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

