नूंह में 8 वर्षीय बच्ची की हत्या के दोषी को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह मामला 2024 में दर्ज हुआ था, जिस पर दो साल बाद फैसला आया है।

सोनू वर्मा, नूंह। जिले की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (पोक्सो) ने 8 साल की मासूम बच्ची की हत्या के मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद और 17 हजार रुपये जुर्माने की सख्त सजा सुनाई है। फिरोजपुर झिरका थाने में 29 फरवरी 2024 को दर्ज शिकायत के अनुसार, बच्ची अपने घर से गायब हो गई थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की, लेकिन बाद में बच्ची का शव पहाड़ से बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। पुलिस की गहन जांच और साक्ष्यों के आधार पर गांव के ही एक युवक की संदिग्ध भूमिका सामने आई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया।

हत्या के दोषी को मिली उम्रकैद

लगभग दो वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान, स्पेशल कोर्ट पोक्सो के जज डॉ. आशु संजीव तिंजन ने आरोपी को हत्या का दोषी करार दिया। हालांकि, बच्ची की मृत्यु के कारण पोक्सो एक्ट के आरोप साबित नहीं हो सके, लेकिन साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 365 (अपहरण) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत दोषी माना। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा, आरोपी द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले ने पीड़ित परिवार को दो साल बाद इंसाफ की उम्मीद दी है, हालांकि यह घाव हमेशा बने रहेंगे।

साक्ष्यों और गवाहों पर आधारित फैसला

पुलिस द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों ने इस केस को अंजाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने तमाम साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसके बाद आरोपी पर आरोप सिद्ध हुए। अदालत के इस सख्त रुख से अपराधियों में कड़ा संदेश गया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं। स्थानीय लोगों ने भी अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है और न्याय व्यवस्था पर अपना विश्वास जताया है। भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद किए जाने की मांग की जा रही है। यह मामला समाज के लिए एक सबक है कि मासूमों के साथ होने वाले अपराधों में सजा मिलना सुनिश्चित है।