रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा (Yuvraj Singh Manchanda) की मौत के मामले में गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर साकेत कोर्ट (Saket Court) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने शव को संभालने, उसकी पहचान कराने, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने कहा कि मामले में जिस तरह से निर्धारित नियमों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई है, उससे सबूत मिटाने में पुलिस अधिकारियों और सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
शव की प्रक्रिया पर उठे सवाल
अदालत ने शव को सुरक्षित रखने से लेकर उसकी पहचान और पोस्टमार्टम तक की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इसके साथ ही अंतिम संस्कार से जुड़ी कार्रवाई को लेकर भी कथित अनियमितताओं पर गंभीरता जताई गई है। साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238 के तहत मामले की जांच कराने का आदेश दिया है।
यह मामला युवराज सिंह मनचंदा की बहन हरसिमरन की ओर से दाखिल याचिकाओं के बाद अदालत के सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने शव को संभालने, पहचान कराने, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने गुरुग्राम के DCP को आदेश की एक प्रति भेजने और मामले में अब तक की गई जांच की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करने को कहा है। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में नियमों की कथित अनदेखी और सबूतों से संबंधित पहलुओं की जांच जरूरी है।
ZIPNET पर 6 दिन बाद डाली शव की जानकारी
रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा की मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने बादशाहपुर थाने की पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत के मुताबिक युवराज का शव 10 सितंबर को मिला था, लेकिन शव की फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी ZIPNET पर 16 सितंबर को अपलोड की गई। यानी शव मिलने के करीब छह दिन बाद यह जानकारी ऑनलाइन डाली गई। अदालत ने इस देरी को गंभीर लापरवाही माना है। कोर्ट के मुताबिक, जब तक ZIPNET पर शव की तस्वीर और पहचान संबंधी जानकारी अपलोड की गई, तब तक शव का अंतिम संस्कार भी हो चुका था। अदालत ने कहा कि शव मिलने के बाद के शुरुआती दिन उसकी पहचान के लिए बेहद महत्वपूर्ण थे। जानकारी अपलोड करने में हुई छह दिन की देरी के कारण पहचान की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
कोर्ट के मुताबिक, पुलिस की इस कथित देरी का असर सिर्फ जांच पर नहीं पड़ा, बल्कि परिवार भी अपने भाई के शव की पहचान करने और उसका अंतिम संस्कार करने के अधिकार से वंचित रह गया। अदालत ने शव को संभालने, पहचान कराने, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार से जुड़ी पूरी प्रक्रिया में सामने आई कथित खामियों को गंभीरता से लिया है।
72 घंटे शवगृह में रहा युवराज का शव, फिर भी पहचान की कोशिश नहीं: कोर्ट
रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा की मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि युवराज का शव करीब 72 घंटे तक शवगृह में रखा गया, लेकिन इस दौरान भी उसकी फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी ZIPNET पर अपलोड नहीं की गई। अज्ञात शवों की पहचान के लिए ZIPNET का इस्तेमाल किया जाता है। कोर्ट ने माना कि जानकारी समय पर अपलोड नहीं होने से शव की पहचान की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
परिवार अंतिम संस्कार में भी नहीं हो सका शामिल
युवराज की बहन हरसिमरन की ओर से दाखिल याचिकाओं में परिवार को हुई परेशानी का भी जिक्र किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर अपने भाई को एक निर्मम हत्या में खोया और पुलिस की चूक के कारण वह अपने भाई का शव तक नहीं देख सकी। परिवार अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो पाया। अदालत ने शव की पहचान, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रिया में कथित लापरवाही को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने पहले भी कहा था कि नियमों की कथित अनदेखी के चलते सबूत मिटाने में पुलिस अधिकारियों और सिविल अस्पताल के एक डॉक्टर की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में पहले से दर्ज थी गुमशुदगी की FIR
सुनवाई के दौरान हरसिमरन की ओर से पेश वकील ने बताया कि युवराज के लापता होने की FIR दिल्ली के लाजपत नगर थाने में पहले ही दर्ज हो चुकी थी। इसके बावजूद गुरुग्राम में मिले शव को अज्ञात मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। वकील की ओर से अदालत के सामने यह सवाल भी उठाया गया कि आसपास के इलाकों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट से बरामद शव की जानकारी का मिलान क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना था कि अगर ऐसा किया जाता तो संभव है कि शव की पहचान समय रहते हो जाती और परिवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने का मौका मिलता।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल
रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा की मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने रिपोर्ट में दर्ज कई बिंदुओं को लेकर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में बाहरी चोटों के कॉलम में ‘NIL’ दर्ज है। वहीं गर्दन, सिर और खोपड़ी समेत कई अंदरूनी हिस्सों में भी किसी असामान्यता का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बावजूद डॉक्टर ने मौत की वजह डूबना बताई। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस की जांच में गिरफ्तार आरोपियों के कथित खुलासे के आधार पर यह बात सामने आई कि युवराज को गर्दन के पास दो गोलियां मारी गई थीं। पुलिस ने कथित वारदात में इस्तेमाल हथियार, युवराज का मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री इस संभावना की ओर इशारा करती है कि युवराज की मौत गोली लगने से हुई हो सकती है और बाद में सबूत छिपाने के लिए शव को ठिकाने लगाया गया। यह अदालत की ओर से जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर व्यक्त की गई संभावना है, अंतिम निष्कर्ष नहीं।
गोली की पुष्टि के लिए X-ray क्यों नहीं कराया?
अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि शव सड़-गल चुका था, इसके बावजूद उसका X-ray क्यों नहीं कराया गया। कोर्ट के मुताबिक, अगर शरीर के अंदर गोली या कोई धातु का टुकड़ा मौजूद होता तो X-ray से उसके बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती थी। अदालत ने कहा कि सिर्फ शव के खराब होने की वजह से गोली के रास्ते या हड्डी में मौजूद प्रोजेक्टाइल के निशान जरूरी नहीं कि पूरी तरह खत्म हो जाएं। हालांकि, गोली लगने की सही पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना जरूरी था।
पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी नहीं हुई
रियल एस्टेट कारोबारी युवराज सिंह मनचंदा की मौत के मामले में साकेत कोर्ट ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया में एक और बड़ी कमी पर सवाल उठाए हैं। अदालत के मुताबिक युवराज के पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। इसके अलावा विसरा और डायटम टेस्ट के लिए जरूरी सैंपल भी सुरक्षित नहीं रखे गए। अदालत ने इन सभी बिंदुओं को देखते हुए कहा कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने गुरुग्राम के सिविल अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. मानव चौहान को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई विसंगतियों को लेकर अदालत के सवालों का जवाब देना होगा।
DCP को दो सप्ताह में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश
साकेत कोर्ट ने गुरुग्राम के DCP को मामले में की गई जांच की स्टेटस रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने शव की पहचान, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार से जुड़ी प्रक्रिया में सामने आई कथित खामियों की जांच को भी महत्वपूर्ण माना है।
6 सितंबर को लापता हुए थे युवराज
केस रिकॉर्ड के मुताबिक युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लापता हुए थे। इसके बाद 11 सितंबर को दिल्ली के लाजपत नगर थाने में उनकी गुमशुदगी की FIR दर्ज की गई। दिल्ली पुलिस ने मामले में युवराज की पूर्व सहकर्मी अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को 16 सितंबर को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था। मामले में अब जांच सिर्फ युवराज की मौत के कारणों तक सीमित नहीं है। शव मिलने के बाद उसे संभालने, पहचान की प्रक्रिया, पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार तक अपनाई गई पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
साकेत कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की है। उस दिन गुरुग्राम DCP को अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। वहीं मेडिकल ऑफिसर डॉ. मानव चौहान को भी व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े सवालों के जवाब देने होंगे।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


