दिल्ली-NCR में हाल के दिनों में सामने आई दुष्कर्म की घटनाओं पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) से कहा कि अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि केवल कागजों पर योजनाएं और निर्देश तैयार करने से स्थिति नहीं बदलेगी, बल्कि पुलिस को जमीन पर प्रभावी कदम उठाने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पुलिस को ऐसा प्रभावी तंत्र तैयार करना होगा, जिससे अपराध करने वालों के मन में कानून और सजा का भय रहे। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब तक अपराधियों में कानून का डर पैदा नहीं होगा, तब तक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आएगा।

सख्त कदम उठाने से हिचकिचाएं नहीं’

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा कि जरूरत पड़ने पर कानून के तहत सख्त कार्रवाई करने से हिचकिचाना नहीं चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि स्थिति से निपटने के लिए पुलिस को कुछ अधिक कठोर कदम उठाने पड़ें तो उसे पीछे नहीं हटना चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि कुछ लोग संविधान के अनुच्छेद 21 यानी जीवन के अधिकार का हवाला देकर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन पुलिस को कानून के दायरे में रहते हुए अपना कर्तव्य निभाना होगा।

हाल की घटनाओं पर कोर्ट ने लिया संज्ञान

दिल्ली-एनसीआर में हाल के दिनों में दुष्कर्म की कई घटनाएं सामने आई हैं। इनमें एक स्लीपर बस में नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला भी शामिल है, जिसने वर्ष 2012 के निर्भया कांड की यादें ताजा कर दीं। इसके अलावा कालकाजी इलाके के आस्था कुंज पार्क में भी एक युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना सामने आई थी। आरोप है कि वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी खुद को पुलिसकर्मी बताकर वहां पहुंचे थे।

हर जगह निगरानी बढ़ाने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को शहर में निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि स्कूल-कॉलेज, बस स्टॉप, मेट्रो स्टेशन और रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जहां महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्कता की जरूरत है। पुलिस को पूरे शहर में निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने माना कि दिल्ली पुलिस के सामने यह एक बड़ा काम और चुनौती है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इसी चुनौती से प्रभावी तरीके से निपटना पुलिस विभाग की बड़ी उपलब्धि होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस से कहा कि वह इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेते हुए महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।

असामाजिक तत्वों में कानून का डर पैदा कीजिए’

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा कि असामाजिक तत्वों में कानून का डर पैदा किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने पुलिस को स्थानीय लोगों से नियमित संवाद करने और समाज में रहने वाले लोगों की स्थिति को समझने के लिए कहा। बेंच ने कहा कि पुलिस समाज की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है और उसे आपराधिक गतिविधियों में शामिल तत्वों के खिलाफ कानून के दायरे में सख्ती बरतनी होगी। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को इस तरह की व्यवस्था बनानी चाहिए कि आम लोग उससे संपर्क करने में डरें नहीं, बल्कि खुद को सुरक्षित महसूस करें। बेंच ने यह भी कहा कि सख्त कार्रवाई को लेकर पुलिस पर दबाव या आरोप लगाए जा सकते हैं, लेकिन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

‘कोर्ट आदेश पारित करेगा’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में आदेश पारित करेगा और पुलिस को उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करनी होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह लंबित मामलों की प्रगति की समीक्षा करना चाहता है। आदेश के एक हिस्से में महिलाओं की सुरक्षा के लिए तत्काल उठाए जाने वाले कदमों पर भी ध्यान दिया जाएगा। बेंच ने पुलिस से कहा कि जवाब दाखिल होने तक ऐसी और घटनाएं नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने और कानून के मुताबिक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

‘महिलाओं को समाज में भी सुरक्षित महसूस कराना होगा’

सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कहा कि समाज की हर महिला को सुरक्षित महसूस कराना सभी की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने कहा कि जिस तरह परिवार में महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है, उसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। बेंच ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई महिला बस में अकेले सफर कर रही है तो उसकी सुरक्षा को लेकर पुलिस को सक्रिय रहना चाहिए। पुलिस को संवेदनशील स्थानों और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 नवंबर की तारीख तय की है। कोर्ट इस दौरान पुलिस की ओर से उठाए गए सुरक्षा उपायों और लंबित मामलों की प्रगति पर भी विचार कर सकता है।

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