Business Desk – Crude Oil Price Today : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को फिर तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने और समझौते को आगे नहीं बढ़ाए जाने से Crude Oil Price पर दबाव बढ़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के अंतरिम समझौते की अवधि औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले ही समझौता रद्द करने का ऐलान कर चुके थे। अब दोनों देशों के बीच नए समझौते को लेकर बातचीत की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारत पर भी पड़ सकता है और इससे पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद कमजोर हो गई है।

आज कच्चे तेल की कीमत कितनी है?

मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। मंगलवार को Brent Crude की कीमत 91.133 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। वहीं WTI Crude 84.934 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। पिछले कुछ समय से तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौजूदा तेजी बनी रही तो कच्चे तेल का भाव फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर की ओर बढ़ सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने का सीधा असर उन देशों पर पड़ता है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करते हैं। भारत भी अपनी जरूरत के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश के ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

अमेरिका-ईरान समझौता आगे बढ़ने की उम्मीद क्यों कम?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि अमेरिका ईरान के साथ मौजूदा समझौते को आगे नहीं बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ ईरान भी अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत में शामिल होने से इनकार कर चुका है। ईरान की मांग है कि अमेरिका पहले उसकी सभी शर्तों को स्वीकार करे।

वहीं अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे अपनी शर्तों पर लाने की रणनीति पर आगे बढ़ना चाहता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तत्काल किसी नए समझौते की संभावना कम दिखाई दे रही है। बातचीत में गतिरोध बना रहने से बाजार में यह चिंता बढ़ रही है कि पश्चिम एशिया में तनाव और लंबा खिंच सकता है।

होर्मूज जलडमरूमध्य पर दुनिया की नजर

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच Strait of Hormuz इस पूरे मामले का सबसे अहम केंद्र बना हुआ है। दुनिया के लिए यह महत्वपूर्ण तेल मार्ग है और यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को सीधे प्रभावित करती है।

जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही को लेकर तेहरान और ओमान के बीच बातचीत चल रही है। इस बातचीत में अमेरिका शामिल नहीं है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि होर्मूज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही कितनी सामान्य रहती है।

अमेरिका ईरान पर धीरे-धीरे बढ़ा रहा दबाव

अमेरिकी अधिकारियों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। अमेरिका की रणनीति धीरे-धीरे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी स्थिति कमजोर करने की बताई जा रही है।

मिडिल ईस्ट में तनाव शुरू हुए करीब छह महीने हो चुके हैं। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कई बार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अब नए समझौते की संभावना कम होने से तेल बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ रही है।

भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद कमजोर

कच्चे तेल की कीमत जिस तरह बढ़ रही है, उसे देखते हुए भारत में आने वाले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। हालांकि घरेलू ईंधन की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। इसमें रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, कर और तेल कंपनियों की लागत जैसे कई दूसरे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती है तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंध, होर्मूज जलडमरूमध्य और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की चाल पर भारत के उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।