भावनगर। 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा विज्ञान शिखर सम्मेलन के अंतर्गत सीएसआईआर-केंद्रीय नमक व समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (सीएसएमसीआरआई), भावनगर द्वारा “समुद्री संसाधनों से सतत पदार्थ और प्रक्रियाएं” विषय पर एक वर्चुअल तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया। यह सत्र वैश्विक सतत विकास के लिए सीएसआईआर के ‘कनेक्ट, कोलैबोरेट, कन्वर्ज एंड कन्वर्ट (5सी)’ विजन को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

सत्र के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. अरुप घोष ने जल सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकताओं और संस्थान द्वारा विकसित स्वदेशी मेम्ब्रेन प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सीएसएमसीआरआई द्वारा विकसित और नई दिल्ली की यूनिफ्लक्स मेम्ब्रेन्स एलएलपी को व्यावसायिक उपयोग के लिए लाइसेंसित स्वदेशी मेम्ब्रेन प्रौद्योगिकियां रहीं।

यूनिफ्लक्स मेम्ब्रेन्स के प्रबंध निदेशक विक्रम करुणाकरम ने जानकारी दी कि उनकी कंपनी इन स्वदेशी तकनीकों के आधार पर अल्ट्राफिल्ट्रेशन, नैनोफिल्ट्रेशन और रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) मेम्ब्रेन तत्वों का निर्माण कर रही है। ये मेम्ब्रेन्स उच्च रिजेक्शन, स्थिर प्रदर्शन, टिकाऊपन, अनुकूल पारगम्यता और कम दबाव में संचालन जैसी विशेषताओं से लैस हैं, जिससे ऊर्जा की बड़ी बचत होती है। उच्च जल-पुनर्प्राप्ति सुनिश्चित करने वाली यह तकनीक औद्योगिक अपशिष्ट जल और नगरपालिका जल शोधन, विलवणीकरण (desalination) तथा जल पुनर्चक्रण में बेहद कारगर साबित हो रही है।

डॉ. पुयम सोभिंद्रो सिंह ने कहा कि एडवांस्ड मेम्ब्रेन टेक्नोलॉजी ने देश में जल सुरक्षा के परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सत्र में अन्य विशेषज्ञों जैसे डॉ. दिवेश एन. श्रीवास्तव ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए समुद्री जल विद्युत अपघटन और डीसीएम श्रीराम के अनुप सिंह ने बायोमास प्रोसेसिंग पर विचार साझा किए।

कार्यक्रम में डॉ. मंगल एस. राठौर ने स्वागत भाषण दिया, डॉ. कमलेश प्रसाद ने तकनीकी क्षमताओं पर बात की और डॉ. एस. आदिमूर्ति ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. कान्ति भूषण पाण्डेय के अनुसार, इस चर्चा ने समुद्री अनुसंधान को व्यावहारिक व सतत उपयोग में बदलने के संकल्प को मजबूत किया है।

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