दिल्ली को प्रदूषण से राहत दिलाने और शहर के हरित क्षेत्र को मजबूत करने के लिए मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। योजना के तहत राजधानी के बड़े पार्कों और जैव विविधता पार्कों को हरित कॉरिडोर (green corridor) के माध्यम से आपस में जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए DDA की ओर से विभिन्न हितधारकों के साथ बैठकें शुरू की जा रही हैं। प्राधिकरण इस परियोजना में दिल्ली के अलग-अलग विभागों के साथ-साथ पर्यावरणविदों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिनिधियों को भी शामिल करेगा।

हरित क्षेत्रों का बनेगा नेटवर्क

योजना का उद्देश्य दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद बड़े पार्कों और जैव विविधता क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर हरित नेटवर्क तैयार करना है। इससे शहर में हरित क्षेत्र का विस्तार करने और मौजूदा हरित क्षेत्रों को बेहतर तरीके से संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। DDA इस योजना को तैयार करते समय पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों और संबंधित विभागों से सुझाव लेगा, ताकि हरित कॉरिडोर का विकास दिल्ली की मौजूदा भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जा सके। योजना के तहत दिल्ली के छोटे-बड़े पार्कों, जैव विविधता पार्कों और वन क्षेत्रों को आपस में जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य राजधानी में हरित क्षेत्रों का एक मजबूत और आपस में जुड़ा हुआ नेटवर्क तैयार करना है।

150 किलोमीटर लंबे हरित कॉरिडोर का नेटवर्क

मास्टर प्लान 2047 के प्रावधानों और निर्धारित शर्तों के तहत दिल्ली में करीब 150 किलोमीटर लंबे हरित कॉरिडोर नेटवर्क को विकसित करने की योजना है। इस नेटवर्क के जरिए शहर के विभिन्न पार्क, जैव विविधता पार्क और वन क्षेत्र आपस में जुड़ेंगे। DDA प्रशासन इस योजना को नियमित और व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय करेगा। इससे अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हरित क्षेत्रों को एक नेटवर्क के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।

दिल्ली में पार्कों को कॉलोनियों से जोड़ने की तैयारी

मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली के पार्कों और जैव विविधता क्षेत्रों को आपस में जोड़ने की योजना पर काम किया जा रहा है। DDA अधिकारियों के मुताबिक, राजधानी में मौजूद बड़े पार्कों को आसपास की कॉलोनियों और सोसाइटियों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली में जापानी पार्क, जिला पार्क और कई जैव विविधता पार्क जैसे बड़े हरित क्षेत्र मौजूद हैं। इनके आसपास स्थित कॉलोनियों और सोसाइटियों के कुछ रास्तों को इन पार्कों से कनेक्ट करने की योजना बनाई जा रही है।

पार्कों की अतिरिक्त जमीन का होगा इस्तेमाल

योजना के तहत पार्कों के आसपास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि का उपयोग करते हुए उन्हें आपस में जोड़ने का काम किया जाएगा। DDA प्रशासन इस दिशा में चरणबद्ध तरीके से योजना तैयार करने की तैयारी कर रहा है। इस पहल के लागू होने के बाद आसपास की सोसाइटियों और कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को पार्कों तक सीधा और सुविधाजनक रास्ता मिल सकेगा। साथ ही, अलग-अलग हरित क्षेत्रों को जोड़कर दिल्ली में प्रस्तावित हरित कॉरिडोर नेटवर्क को भी मजबूत किया जा सकेगा।

UEER-2 के दोनों तरफ हाइराइज इमारतें

मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली में कई बड़ी परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। DDA अधिकारियों के अनुसार, इसमें 52 किलोमीटर लंबे यमुना रिवरफ्रंट के विकास की योजना भी शामिल है। इसके साथ ही अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UEER-2) को जाम मुक्त बनाने के लिए भी नई योजना पर काम किया जाएगा। योजना के तहत UEER-2 के दोनों तरफ 250 मीटर तक के क्षेत्र में हाइराइज इमारतों के साथ सीमित प्रवेश और निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा अंडरग्राउंड पार्किंग और टाउनशिप के निर्माण की भी योजना है। DDA अधिकारियों के मुताबिक, इस क्षेत्र के विकास में यातायात व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि एक्सप्रेसवे पर वाहनों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

नए ट्रैफिक मॉडल से जाम पर लगेगा ब्रेक

UEER-2 को जाम मुक्त बनाने के लिए एक्सप्रेसवे को नियंत्रित प्रवेश-निकास वाले नए मॉडल के आधार पर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक्सप्रेसवे पर अलग-अलग स्थानों से दूसरी सड़कों और मार्गों की ओर जाने वाले वाहनों के कारण लगने वाले जाम को कम करना है।

मास्टर प्लान 2047 से दिल्ली में 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के स्वीकृत होने के बाद राजधानी में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। दिल्ली देहात विकास मंच (DDVM) के दिल्ली मास्टर प्लान समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र बजाड़ के मुताबिक, मास्टर प्लान लागू होने से DDA की लैंड पूलिंग नीति और ग्रीन डेवलपमेंट एरिया (GDA) नीति के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उनका दावा है कि इन नीतियों के लागू होने से दिल्ली में करीब 30 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इसके साथ ही करीब 20 लाख नए रोजगार और व्यापारिक अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगी व्यावसायिक गतिविधियां

भूपेंद्र बजाड़ के अनुसार, मास्टर प्लान के तहत कई ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धारित नियमों के अनुसार शॉपिंग सेंटर और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण इलाकों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। उन्होंने बताया कि लैंड पूलिंग नीति और GDA नीति के तहत दिल्ली में हरित क्षेत्रों के विकास पर भी जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही 174 गांवों के विकास का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m