पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। गुरुवार सुबह मलबे से एक और शव बरामद होने के बाद हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में चार महीने की गर्भवती महिला और दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इमारत के अचानक ढहने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की। बचाव अभियान के दौरान मलबे से 7 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। वहीं, हादसे में घायल आठ लोगों को इलाज के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।
पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। सीमापुरी के ई-ब्लॉक स्थित मछली मंडी और ईदगाह मस्जिद के पास एक चार मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों में चार महीने की गर्भवती महिला और दो मासूम बच्चे भी शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, हादसा बुधवार दोपहर करीब 3:10 बजे हुआ। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें थीं, जबकि ऊपर की चार मंजिलों पर अलग-अलग परिवार रहते थे। इनमें इमारत मालिक का परिवार भी शामिल था। अचानक पूरी इमारत के ढह जाने से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
संकरी गलियों के कारण राहत-बचाव में दिक्कत
हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, एनडीआरएफ और अन्य बचाव दल मौके पर पहुंचे। हालांकि, इलाके की संकरी गलियों के कारण दमकल, एनडीआरएफ और एंबुलेंस की बड़ी गाड़ियों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। वाहनों को मुख्य सड़क से ईदगाह के रास्ते घटनास्थल तक ले जाया गया।
8 बुलडोजर और 20 एंबुलेंस तैनात
मलबे में दबे लोगों की तलाश और मलबा हटाने के लिए 8 बुलडोजर लगाए गए। वहीं घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए 20 एंबुलेंस मौके पर तैनात की गईं। बचाव अभियान के दौरान मलबे से अब तक सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। अधिकारियों के मुताबिक, हादसे में घायल 8 लोगों का इलाज राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चल रहा है। गुरुवार सुबह मलबे से एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर चार हो गई। बचाव दल मलबे की तलाशी में जुटा हुआ है। मायके की चौखट पर काल बनी इमारत: मां-बेटी की दर्दनाक मौत
बेटी के साथ मायके आई थी गुल्फ़्शा
सीमापुरी में चार मंजिला इमारत गिरने के हादसे में जान गंवाने वाली गुल्फ़्शा चार महीने की गर्भवती थी। वह अपनी तीन साल की बेटी जोया को लेकर सीमापुरी के ई-ब्लॉक स्थित अपने माता-पिता के घर मिलने आई थी। माता-पिता घर पर नहीं थे, इसलिए वह पड़ोसियों के साथ बैठकर उनका इंतजार करने लगी। इसी दौरान अचानक इमारत भरभराकर गिर गई और गुल्फ़्शा व उसकी बेटी जोया मलबे में दब गईं। बताया जा रहा है कि हादसे से महज 10 मिनट पहले गुल्फ़्शा की बहन वहां से उठकर चली गई थी। गुल्फ़्शा और जोया वहीं बैठी रहीं। कुछ ही देर बाद इमारत के गिरने से दोनों मलबे में दब गईं।
मलबे में दबकर रिश्तेदार को किया फोन
इमारत गिरने के बाद मलबे के नीचे दबी गुल्फ़्शा ने हिम्मत दिखाते हुए अपने एक रिश्तेदार को फोन किया। उसने बताया कि वह मलबे के नीचे दबी हुई है। फोन आने के बाद परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और बचावकर्मियों से गुल्फ़्शा को बाहर निकालने की गुहार लगाने लगे। काफी मशक्कत के बाद शाम करीब 7:30 बजे तीन साल की जोया को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके करीब डेढ़ घंटे बाद बचावकर्मियों ने गुल्फ़्शा को गंभीर हालत में बाहर निकाला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। गुल्फ़्शा की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। हादसे में मां-बेटी की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है।
वहीं, घायलों का इलाज जीटीबी और राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में चल रहा है। शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीना ने बताया कि पुलिस और आपदा राहत टीमों का रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक जारी रहा। हादसे के बाद घायलों को तत्काल आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव दलों ने काफी मशक्कत की।
निर्माण मानकों और हादसे के कारणों की जांच
स्थानीय पार्षद पंकज लूथरा और पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इमारत के निर्माण मानकों और उसके अचानक ढहने के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इमारत में किसी तरह की निर्माण संबंधी खामी थी या हादसे के पीछे कोई अन्य वजह थी।
एक महीने पहले सत्य निकेतन में भी ढही थी इमारत
दिल्ली में जर्जर और कमजोर इमारतों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इससे करीब एक महीने पहले 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढह गई थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि बेसमेंट में मरम्मत कार्य के दौरान पिलर कमजोर होने और पानी जमा होने की वजह से इमारत ढहने की स्थिति बनी थी। अब सीमापुरी में हुए ताजा हादसे ने राजधानी में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
3 साल में दिल्ली में बिल्डिंग गिरने की 1,133 घटनाएं, 98 लोगों की मौत
सीमापुरी और सत्य निकेतन में हुए इमारत हादसों ने दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच राजधानी में इमारतें ढहने की 1,133 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 98 लोगों की जान चली गई। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राजधानी में जर्जर और कमजोर इमारतों की समस्या लगातार बनी हुई है। इमारत गिरने की घटनाओं में जान-माल का नुकसान होने के बावजूद कमजोर भवनों को समय रहते चिह्नित करने और असुरक्षित या अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल के दो हादसों ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सितंबर में सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत ढहने से सात लोगों की मौत हुई थी। इसके करीब एक महीने बाद सीमापुरी के ई-ब्लॉक में चार मंजिला इमारत गिरने से चार लोगों की मौत हो गई। दोनों घटनाओं में राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा।
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