Delhi Air Pollution Pilot Project: ठंड और त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंचने लगी है। इसी के साथ ही एक बार फिर दिल्ली में ‘वायु प्रदूषण’ (Delhi air pollution) लौट आया है। विजयादशमी के अगले दिन 22 अक्टूबर की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए अब रेखा गुप्ता सरकार (Rekha Gupta Government) अब नई तकनीकों को आजमाने जा रही है। बकायदा इसके लिए 104 करोड़ रुपये की पायलट परियोजना के तहत राजधानी के 40 स्थानों को चुना गया है।

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू कर रही है। इसके तहत बाजारों, व्यावसायिक इलाकों, बस स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और कुछ अस्पतालों के आसपास प्रदूषण कम करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन तकनीकों से हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है। पीएम10 और पीएम2.5 का स्तर 20 फीसदी तक घटाया जा सकता है।

पायलट प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली की तीन प्रमुख सड़कों के हिस्सों पर भी प्रदूषण कम करने के उपाय आजमाए जाएंगे। इनमें चांदनी चौक मेन मार्केट रोड, लोटस टेंपल रोड और बाबा खड़क सिंह मार्ग शामिल हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आकलन में इन सड़कों पर सड़क की धूल और वाहनों से निकलने वाले धुएं को प्रदूषण की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है। ऐसे में यहां इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों से यह जांचने की कोशिश होगी कि स्थानीय स्तर पर हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार लाया जा सकता है।

इन जगहों को चुना गया

इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली के ऐसे सार्वजनिक और व्यावसायिक स्थान चुने गए हैं, जहां खुले या आंशिक रूप से बंद क्षेत्र में प्रदूषण कम करने के उपाय आजमाए जा सकते हैं। इनमें खान मार्केट, कनॉट प्लेस और डिफेंस कॉलोनी जैसे इलाके शामिल है। मध्य और दक्षिण दिल्ली में ऐसे 19 स्थान चुने गए है। कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क, इंडिया गेट के पास चिल्ड्रन्स पार्क का इलाका और लोटस टेंपल का गलियारा शामिल हैं। इसके अलावा कश्मीरी गेट, आनंद विहार और सराय काले खां के अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों को भी चुना गया है। अस्पतालों में जीबी पंत अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल समेत चार अस्पताल शामिल हैं। वहीं, शिक्षण संस्थानों से जुड़ा एक स्थान दिल्ली विश्वविद्यालय की आर्ट्स फैकल्टी है।

40 स्थानों को पांच कैटेगरी में बांटा गया

हर स्थान का क्षेत्रफल करीब एक से डेढ़ एकड़ के बीच होगा। चुने गए 40 स्थानों को पांच कैटेगरी में बांटा गया है। इनमें बाजार, व्यावसायिक क्षेत्र और केंद्र, परिवहन केंद्र, पर्यटन स्थल, अस्पताल और शिक्षण संस्थान शामिल है। इनमें सबसे ज्यादा 29 स्थान व्यावसायिक इलाकों के हैं। यह कुल स्थानों का 72.5 फीसदी है।

ल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति करेगी निगरानी

यह परियोजना शुरुआती तौर पर एक साल तक चलेगी। संबंधित स्थान सौंपे जाने के बाद कंपनियों को अपने उपकरण लगाने और उन्हें चालू करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाएगा। योजना की शुरुआत पिछले महीने हुई थी और फिलहाल इसकी तकनीकी समीक्षा की जा रही है। प्रदूषण नियंत्रण उपायों का असर जानने के लिए सभी चयनित स्थानों पर सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर रोजाना हवा की गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े दर्ज करेंगे। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति इनकी निगरानी करेगी। परियोजना का मुख्य लक्ष्य पीएम10 और पीएम2.5 के स्तर में 20 फीसदी तक कमी लाना है।

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