दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने किशोरियों को लगाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV vaccine) वैक्सीन गार्डासिल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड, वैज्ञानिक आंकड़ों और उपलब्ध सामग्री से ऐसा प्रतीत नहीं होता कि इस वैक्सीन से कोई तात्कालिक नुकसान हो रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर टीकाकरण अभियान पर रोक लगाने का कोई पर्याप्त कारण नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों की आवश्यकता होती है।

चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वैक्सीन के दीर्घकालिक लाभ और अन्य पहलुओं पर बाद में विस्तार से विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई साक्ष्य अदालत के सामने नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकले कि वैक्सीन से तुरंत कोई नुकसान हो रहा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन शुरू करने का फैसला सही था या नहीं, इस मुद्दे पर आगे विस्तृत सुनवाई की जाएगी। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए टीकाकरण अभियान पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया जा सकता।

केंद्र ने बताया- दुनिया में 55 करोड़ से अधिक लोगों को लग चुका टीका

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि दुनिया भर में 55 करोड़ से अधिक लोगों को HPV वैक्सीन लगाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार टीकाकरण अभियान के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा उपायों और सावधानियों का पालन कर रही है तथा वैक्सीन की सुरक्षा से जुड़े स्थापित मानकों का अनुपालन किया जा रहा है।केंद्र की दलीलों पर गौर करते हुए अदालत ने कहा कि जब रिकॉर्ड में तत्काल नुकसान का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं दे रहा है, तो इस चरण में वैक्सीन पर रोक लगाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैक्सीन शुरू करने के निर्णय और उससे जुड़े अन्य मुद्दों पर आगे विस्तृत सुनवाई की जाएगी, लेकिन फिलहाल टीकाकरण कार्यक्रम जारी रहेगा।

 अभिभावकों की सहमति को लेकर दायर हुई PIL

नई दिल्ली। किशोरियों को लगाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) वैक्सीन गार्डासिल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (PIL) में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि देशभर में करीब 14 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों को स्कूलों और सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के माध्यम से HPV वैक्सीन लगाने की योजना चलाई जा रही है, लेकिन कई मामलों में अभिभावकों की पूर्ण और सूचित सहमति सुनिश्चित नहीं की जा रही। यह जनहित याचिका डॉ. सुजाता मित्तल द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि किसी भी नाबालिग को चिकित्सा प्रक्रिया से गुजरने से पहले उसके माता-पिता या अभिभावकों को पूरी जानकारी देना और उनकी स्पष्ट सहमति प्राप्त करना आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर किशोरियों की शारीरिक स्वायत्तता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर स्वास्थ्यकर्मियों को टीकाकरण के लक्ष्य दिए गए हैं, जिसके चलते किशोरियों और उनके परिवारों पर वैक्सीन लगवाने का दबाव बनाया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में पारदर्शिता, स्वैच्छिक भागीदारी और सूचित सहमति के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि HPV टीकाकरण अभियान में अभिभावकों की स्पष्ट सहमति सुनिश्चित करने, वैक्सीन की सुरक्षा से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन कराने और कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

याचिका में दावा किया गया है कि मार्च 2026 में तमिलनाडु की एक 14 वर्षीय लड़की को HPV वैक्सीन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी। इसके अलावा ग्वालियर और बिहार के कुछ मामलों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इन घटनाओं से वैक्सीन की सुरक्षा और टीकाकरण के बाद निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर सवाल खड़े होते हैं।याचिका में यह भी कहा गया है कि HPV एक ऐसा वायरस है जो मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है और इसके अधिकांश संक्रमण बिना किसी विशेष उपचार के समय के साथ स्वतः ठीक हो जाते हैं। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि HPV संक्रमण और सर्वाइकल कैंसर के बीच संबंध होने के बावजूद कैंसर के लिए केवल HPV को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

याचिका के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के पीछे कई अन्य कारक भी भूमिका निभाते हैं, जिनमें कम उम्र में विवाह, बार-बार गर्भधारण, एक से अधिक यौन साथी, धूम्रपान, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, कुपोषण और खराब स्वच्छता जैसी परिस्थितियां शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ऐसे में केवल वैक्सीन को ही समाधान के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं माना जा सकता।

दिल्ली हाईकोर्ट ने टीकाकरण अभियान जारी रखने की दी अनुमति

 दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि किशोरियों को लगाए जा रहे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) वैक्सीन के टीकाकरण अभियान पर फिलहाल कोई रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड और आंकड़ों पर विचार करने के बाद कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि वैक्सीन से तत्काल नुकसान हो रहा है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि फिलहाल टीकाकरण कार्यक्रम को रोकने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जनहित याचिका में उठाए गए सहमति, सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और वैक्सीन के वैज्ञानिक आधार जैसे मुद्दों पर आगे विस्तार से सुनवाई की जाएगी।

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