दिल्ली सरकार की प्रस्तावित दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर राजधानी की राजनीति गरमा गई है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम और चुनावी वादा पूरा करने वाला फैसला बता रही है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने योजना की पात्रता शर्तों को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का दावा है कि योजना में रखी गई शर्तें इतनी कड़ी हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं इसके दायरे से बाहर हो जाएंगी। उनका कहना है कि चुनाव के दौरान महिलाओं को व्यापक लाभ देने का वादा किया गया था, लेकिन अब पात्रता मानदंडों के कारण वास्तविक लाभार्थियों की संख्या सीमित हो सकती है। AAP और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने योजना को लेकर जो वादे किए थे, मौजूदा स्वरूप उनसे मेल नहीं खाता। विपक्ष का कहना है कि यदि पात्रता की शर्तों में ढील नहीं दी गई तो जरूरतमंद महिलाओं तक योजना का लाभ नहीं पहुंच पाएगा।
केजरीवाल का हमला, बोले- शर्तें ऐसी कि 5 लाख महिलाओं को भी नहीं मिलेगा लाभ
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि योजना की शर्तें इतनी कड़ी हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं इसके दायरे से बाहर हो जाएंगी। केजरीवाल ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का वादा किया था, लेकिन अब पात्रता के लिए लगाए गए नियमों के कारण बहुत कम महिलाओं को इसका लाभ मिल पाएगा। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा शर्तों के आधार पर पांच लाख महिलाओं को भी योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा। AAP प्रमुख ने इस मुद्दे पर भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि एक ओर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत हिंदुओं से अधिक बच्चे पैदा करने की बात करते हैं, जबकि दूसरी ओर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार तीन से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को ₹2,500 की सहायता राशि से वंचित कर रही है।
सौरभ भारद्वाज बोले- 62 लाख महिलाओं के साथ धोखा
सौरभ भारद्वाज ने योजना की पात्रता शर्तों पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए वादों से पीछे हटने का काम किया है। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं ने दिल्ली की हर महिला को ₹2,500 प्रतिमाह देने का वादा किया था। लेकिन अब योजना में ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं कि अधिकांश महिलाएं इसके दायरे से बाहर हो जाएंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि 60 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को योजना से बाहर रखा गया है। इसके अलावा लाभ पाने के लिए 10 वर्ष का निवास प्रमाण मांगा जा रहा है। भारद्वाज ने कहा कि छोटे-मोटे मामलों में भी महिलाओं को अपात्र घोषित करने का प्रावधान रखा गया है और बिजली खपत जैसी शर्तें भी लाभार्थियों की संख्या कम करने का माध्यम बन सकती हैं। AAP नेता ने दावा किया कि सरकार 17 लाख महिलाओं को योजना का लाभ मिलने की बात कर रही है, जबकि वास्तविकता में करीब पांच लाख महिलाएं ही पात्र रह जाएंगी। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने भाजपा के वादों पर भरोसा किया था, उन्हें अब निराशा हाथ लग रही है।
दिल्ली लक्ष्मी योजना पर भाजपा का पलटवार
दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने योजना का जोरदार बचाव किया है। प्रदेश भाजपा ने योजना की घोषणा का स्वागत करते हुए इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का आभार व्यक्त किया।प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पश्चिमी दिल्ली से सांसद कमलजीत सहरावत और नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि यह योजना भाजपा सरकार की महिला कल्याण और आर्थिक सशक्तीकरण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार ने राजनीतिक कारणों से केंद्र सरकार की कई जनकल्याणकारी योजनाओं को दिल्ली में लागू नहीं होने दिया। कमलजीत सहरावत ने कहा कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद केंद्र की कई लंबित योजनाओं को लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से महिलाओं को प्रतिमाह ₹2,500 की आर्थिक सहायता देने का चुनावी वादा भी पूरा किया जा रहा है।
वहीं, बांसुरी स्वराज ने कहा कि दिल्ली लक्ष्मी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वुमेन-लेड डेवलपमेंट’ (महिला-नेतृत्व वाले विकास) के विजन को आगे बढ़ाने वाली पहल है। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बांसुरी स्वराज के अनुसार, योजना के तहत 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की करीब 17 लाख पात्र महिलाओं को लाभ मिलने का अनुमान है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पात्रता संबंधी प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज लगातार तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल के शुरुआती 16 महीनों में ही महिला सम्मान राशि योजना का पहला चरण शुरू कर दिया है और इसके तहत 17 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि विपक्ष जानबूझकर योजना को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के अपने वादे को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य पात्र महिलाओं तक प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता पहुंचाना है।
दिल्ली लक्ष्मी योजना पर कांग्रेस भी हमलावर, शर्तें हटाने की उठाई मांग
आम आदमी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी योजना की पात्रता शर्तों पर सवाल उठाते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने इस संबंध में उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को ज्ञापन भेजा है। डॉ. नरेश कुमार ने ज्ञापन में मांग की है कि दिल्ली लक्ष्मी योजना में जोड़ी गई शर्तों को हटाया जाए और विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे के अनुरूप सभी पात्र महिलाओं को योजना का लाभ दिया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से पहले भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में दिल्ली की महिलाओं को प्रतिमाह ₹2,500 देने का वादा किया था, लेकिन कैबिनेट से मंजूर योजना में कई ऐसी शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिनके कारण बड़ी संख्या में महिलाएं लाभ से वंचित हो सकती हैं।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है तो योजना की पात्रता शर्तों को सरल और समावेशी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रावधानों के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद महिलाएं योजना के दायरे से बाहर रह जाएंगी। डॉ. नरेश कुमार ने उपराज्यपाल से हस्तक्षेप कर योजना की शर्तों की समीक्षा कराने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि चुनावी वादे के अनुरूप अधिकतम महिलाओं को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाना होना चाहिए, न कि पात्रता की जटिल शर्तों के कारण उन्हें बाहर करना।
कांग्रेस नेता के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली ₹2,500 की राशि में से ₹1,500 को आरडी (रिकरिंग डिपॉजिट) या एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) में जमा कराना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा 200 यूनिट से कम बिजली खपत, ₹2.5 लाख से कम वार्षिक आय, तीन से अधिक बच्चों वाली महिलाओं को योजना से बाहर रखने जैसी शर्तें भी लागू की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयकर या जीएसटी रिटर्न भरने वाली महिलाओं, किसी भी प्रकार की पेंशन प्राप्त करने वाली महिलाओं, आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों तथा सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। कांग्रेस का कहना है कि ये शर्तें जरूरत से ज्यादा कड़ी हैं और बड़ी संख्या में महिलाओं को लाभ से वंचित कर देंगी।
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