Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के नए मास्टर प्लान 2047 में भविष्य के परिवहन को लेकर भी कई महत्वाकांक्षी प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत राजधानी में आने वाले वर्षों में एयर टैक्सी और एयर पॉड जैसी आधुनिक परिवहन प्रणालियों को विकसित करने की योजना बनाई गई है। यानी आने वाले समय में दिल्ली में लोगों के पास मेट्रो, एक्सप्रेसवे और रैपिड रेल के साथ-साथ हवाई परिवहन के नए विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। मास्टर प्लान में इको-फ्रेंडली और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसके तहत भविष्य की जरूरतों को देखते हुए एयर टैक्सी और एयर पॉड के संचालन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकता है।

MPD-2047 में यमुना समेत जलमार्गों पर इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट का प्रस्ताव

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में राजधानी की परिवहन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक और मल्टीमॉडल बनाने के लिए कई नए विकल्पों का प्रस्ताव किया गया है। इसके तहत यमुना, साहिबी नदी और अन्य नहरों में अंतर्देशीय जल परिवहन शुरू करने की योजना है। साहिबी नदी को दिल्ली में नजफगढ़ नाले के नाम से भी जाना जाता है। मास्टर प्लान में जलमार्गों को परिवहन नेटवर्क से जोड़ने का प्रस्ताव ऐसे समय में किया गया है, जब दिल्ली में सड़क और मेट्रो के साथ-साथ परिवहन के नए विकल्प विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। योजना के तहत इन जलमार्गों की संभावनाओं का इस्तेमाल भविष्य में यात्रियों के आवागमन के लिए किया जा सकता है।

रेलवे स्टेशनों का होगा पुनर्विकास

MPD-2047 में दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का भी प्रस्ताव रखा गया है। इसका उद्देश्य रेलवे, सड़क और सार्वजनिक परिवहन के अलग-अलग माध्यमों को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जोड़ना है। योजना के तहत रेलवे स्टेशनों को अंतरराज्यीय बस अड्डों (ISBT), बस टर्मिनल, मेट्रो और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) स्टेशनों से बेहतर कनेक्टिविटी देने पर जोर होगा।

नए रेलवे स्टेशन बनाने की तैयारी

नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते यातायात और यात्रियों की संख्या को देखते हुए मास्टर प्लान 2047 में नए रेलवे स्टेशन विकसित करने की योजना बनाई गई है। फिलहाल राजधानी देश के अलग-अलग हिस्सों से पांच प्रमुख रेलवे स्टेशनों नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, आनंद विहार टर्मिनल और सराय रोहिल्ला के जरिए जुड़ी हुई है। मास्टर प्लान में भविष्य की परिवहन जरूरतों को देखते हुए स्वच्छ ईंधन और तकनीकी रूप से उन्नत परिवहन प्रणालियों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है। इसके अलावा यातायात और पार्किंग व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल की भी परिकल्पना की गई है।

पैदल और साइकिल यात्रियों को मिलेगा बढ़ावा

MPD-2047 में पैदल चलने और साइकिल से सफर करने वाले लोगों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। नए शहरीकृत क्षेत्रों तक पैदल और साइकिल के जरिए बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा। योजना में यातायात जाम कम करने और मौजूदा लेकिन कम इस्तेमाल हो रही परिवहन परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग करने की दिशा में भी काम करने का प्रस्ताव है। मास्टर प्लान का व्यापक उद्देश्य मोटर चालित यात्राओं में सार्वजनिक परिवहन और मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाना है।

MPD-2047 में ‘राइट टू वॉक’ पर जोर, पैदल यात्रियों के लिए विकसित होंगे सुरक्षित रास्ते

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 इसके तहत ‘राइट टू वॉक’ के तहत पैदल मार्गों का नेटवर्क तैयार करने, विशेष पैदल सड़कें विकसित करने और सड़कों के किनारे बहुउपयोगी क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव है। मास्टर प्लान के मुताबिक, सड़कों को नए सिरे से विकसित करते समय पैदल यात्रियों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन क्षेत्रों में पेयजल, चाइल्ड केयर सेंटर, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए निर्धारित स्थान और साइकिल पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

सड़कों के किनारे मिलेंगी कई सुविधाएं

सड़क किनारे विकसित किए जाने वाले बहुउपयोगी क्षेत्रों में बैठने की जगह, कूड़ेदान, दिशा-सूचक बोर्ड, सार्वजनिक सुविधाएं, शौचालय, चाइल्ड केयर रूम और पेयजल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा रेहड़ी-पटरी और कियोस्क के लिए निर्धारित स्थान, पार्किंग और पब्लिक साइकिल शेयरिंग सिस्टम के लिए भी जगह उपलब्ध कराई जाएगी। पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त चौड़ाई वाले और बिना रुकावट के रास्ते सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़ेंगे पैदल मार्ग

‘राइट टू वॉक’ के तहत सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सुरक्षित, छायादार और सर्वसुलभ पैदल मार्गों का नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इससे लोगों को बस, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों तक पैदल पहुंचने में सुविधा होगी। मास्टर प्लान में अधिक पैदल आवाजाही वाले इलाकों को विशेष पैदल क्षेत्र के रूप में चिह्नित करने का भी प्रस्ताव है। ऐसे क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जा सकती है, जिससे पैदल यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

मेट्रो, नमो भारत और सड़कों का होगा बड़ा विस्तार

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 में राजधानी के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के विस्तार को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है। योजना में मेट्रो और नमो भारत (RRTS) नेटवर्क बढ़ाने के साथ-साथ ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD), मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब और नए सड़क नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव है।

2047 तक 695 किलोमीटर का होगा मेट्रो नेटवर्क

मास्टर प्लान के मुताबिक, दिल्ली का मौजूदा मेट्रो नेटवर्क करीब 416 किलोमीटर है। इसे वर्ष 2047 तक बढ़ाकर करीब 695 किलोमीटर करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी अगले दो दशकों में नेटवर्क में करीब 279 किलोमीटर का विस्तार किया जाएगा।

383 किलोमीटर तक पहुंचेगा RRTS नेटवर्क

दिल्ली-एनसीआर की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) नेटवर्क को करीब 383 किलोमीटर तक विस्तार देने की योजना है। इसके जरिए दिल्ली को गाजियाबाद, मेरठ, पानीपत, करनाल और अलवर जैसे शहरों से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है।

मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के आसपास होगा हाई-डेंसिटी विकास

MPD-2047 में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) को शहरी विकास की प्रमुख रणनीति बनाया गया है। इसके तहत मेट्रो और RRTS कॉरिडोर के आसपास सघन बसावट को बढ़ावा दिया जाएगा। मेट्रो, RRTS और रेलवे कॉरिडोर के आसपास करीब 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट के लिए चिन्हित किया गया है। TOD जोन में मेट्रो कॉरिडोर के 500 मीटर और RRTS व रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे वाले क्षेत्र शामिल होंगे। योजना के मुताबिक, अगले 10 वर्षों में इन क्षेत्रों में करीब 17 लाख आवासीय इकाइयों के विकसित होने की संभावना है।

तीन बड़े मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब

यात्रियों को अलग-अलग परिवहन साधनों के बीच आसानी से कनेक्टिविटी देने के लिए आनंद विहार-कड़कड़डूमा, कश्मीरी गेट और निजामुद्दीन-सराय काले खां को मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों पर मेट्रो, रेलवे, बस और RRTS जैसी सेवाओं को एक ही स्थान पर जोड़ने की योजना है। इससे यात्रियों को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने में सुविधा मिलेगी।

लैंड पूलिंग जोन में 600 किलोमीटर नई सड़कें

मास्टर प्लान में सड़क नेटवर्क को अधिक लचीला बनाने के लिए ‘फ्लेक्सी रोड’ की अवधारणा पेश की गई है। लैंड पूलिंग वाले क्षेत्रों में करीब 600 किलोमीटर नई सड़कों के निर्माण का प्रस्ताव है। MPD-2047 में सड़क योजना में वाहनों के बजाय लोगों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। इसके तहत पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं विकसित करने की योजना है, ताकि निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सके।

क्या बदलेगा और क्या होंगी चुनौतियां?

दिल्ली का मास्टर प्लान-2047 (MPD-2047) महज एक शहरी विकास दस्तावेज नहीं है, बल्कि राजधानी को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ने की एक दीर्घकालिक योजना के तौर पर देखा जा रहा है। यह दिल्ली के पिछले तीन मास्टर प्लान 1962, 2001 और 2021 से मिले अनुभवों और उनकी कमियों को दूर करने की कोशिश करता है। पुरानी योजनाओं के दौरान दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों का विस्तार, हरित क्षेत्र की कमी और परिवहन से जुड़ी चुनौतियां सामने आती रहीं। नए मास्टर प्लान में इन समस्याओं से निपटने के लिए सघन शहरी विकास, ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट और पर्यावरण संरक्षण को प्रमुखता दी गई है।

क्या बदलेगा?

MPD-2047 में दिल्ली को अधिक कॉम्पैक्ट, कनेक्टेड और पर्यावरण अनुकूल शहर बनाने की परिकल्पना की गई है। मेट्रो और RRTS के विस्तार के साथ इनके आसपास सघन विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने के साथ सार्वजनिक परिवहन को निजी वाहनों की तुलना में अधिक प्राथमिकता देने की योजना है। इसके अलावा यमुना के बाढ़ क्षेत्र और हरित इलाकों के संरक्षण, किफायती आवास, नए रोजगार केंद्र, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल जैसे प्रावधान राजधानी के शहरी ढांचे में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

लागू करना होगी सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि मास्टर प्लान में कई महत्वाकांक्षी प्रावधान किए गए हैं, लेकिन इन्हें जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा। साथ ही बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन और समयबद्ध क्रियान्वयन भी महत्वपूर्ण रहेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि DDA की मंजूरी के बाद भी MPD-2047 को लागू करने के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अंतिम मंजूरी और अधिसूचना जरूरी होगी। अगर मास्टर प्लान को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो 2047 तक दिल्ली का शहरी स्वरूप काफी बदल सकता है।

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