राजधानी दिल्ली के पुलिस थानों में तैनात महिला पुलिसकर्मियों के लिए मासिक धर्म (menstrual) के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली के अधिकांश पुलिस थानों में महिला कर्मियों के लिए बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव है, जिससे उन्हें ड्यूटी के दौरान कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। याचिका में कहा गया है कि बड़ी संख्या में पुलिस थानों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड के सुरक्षित निपटान के लिए इंसिनरेटर (Incinerator) की भी व्यवस्था नहीं है। कई स्थानों पर महिलाओं के लिए पर्याप्त संख्या में साफ-सुथरे और उपयोग योग्य शौचालयों की कमी होने का भी आरोप लगाया गया है।

यह याचिका अधिवक्ता सत्याम सिंह राजपूत की संस्था जस्टिस फॉर राइट्स फाउंडेशन की ओर से उसकी महिला प्रकोष्ठ प्रतिनिधि मुस्कान सिंह बांकुरा ने दायर की है। याचिका में जुलाई-अगस्त 2025 के दौरान सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दिल्ली पुलिस के सभी 18 जिलों और विभिन्न इकाइयों से प्राप्त जानकारी का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, आरटीआई से मिली जानकारी से पता चलता है कि अधिकांश पुलिस थानों में मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं लगभग नदारद हैं। कई स्थानों पर सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें उपलब्ध नहीं हैं, जबकि इस्तेमाल किए गए पैड के सुरक्षित निपटान के लिए इंसिनरेटर की भी व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा महिला पुलिसकर्मियों के लिए पर्याप्त और स्वच्छ शौचालयों की कमी की बात भी सामने आई है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस के अधिकांश थानों और इकाइयों में मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित सुविधाओं के लिए अलग से कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया है। इससे महिला पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, विशेषकर तब जब उन्हें लंबे समय तक फील्ड या थानों में कार्य करना पड़ता है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और सुरक्षित कार्य वातावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए सभी पुलिस थानों में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप

याचिका में कहा गया है कि महिला पुलिसकर्मियों से अक्सर कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में लगातार ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन उन्हें पीरियड्स के दौरान जरूरी स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि उनकी गरिमा, निजता और सुरक्षित कार्यस्थल के अधिकार भी प्रभावित होते हैं। मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं का अभाव महिला पुलिसकर्मियों के सम्मानजनक कार्य वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन, इस्तेमाल किए गए पैड के निपटान के लिए इंसिनरेटर और पर्याप्त एवं स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं किसी भी कार्यस्थल पर न्यूनतम आवश्यकताएं होनी चाहिए।

याचिका में इस स्थिति को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है, अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है, जबकि अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के साथ गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार की गारंटी देता है।

PIL में मुंबई पुलिस और CRPF मॉडल का हवाला

याचिका में कहा गया है कि देश के कई पुलिस और सुरक्षा संगठनों ने महिला कर्मियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ऐसे में दिल्ली पुलिस में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। याचिकाकर्ता ने मुंबई पुलिस के ‘स्मार्ट मैत्रीण प्रोजेक्ट’ का उल्लेख करते हुए कहा है कि इस पहल के तहत महिला कर्मियों के लिए सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीन और स्वच्छता संबंधी अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा CRPF और लद्दाख पुलिस में भी मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्थाओं को उदाहरण के रूप में पेश किया गया है।

याचिका में गृह मंत्रालय की एक एडवाइजरी का भी जिक्र किया गया है, जिसमें महिला कर्मियों के लिए कार्यस्थलों पर आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब अन्य पुलिस और सुरक्षा संस्थानों में इस तरह की व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं, तो देश की राजधानी की पुलिस में भी इन्हें प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट में व्यापक निर्देश देने की अपील

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि दिल्ली के सभी पुलिस थानों, पुलिस चौकियों और अन्य पुलिस इकाइयों में सैनिटरी पैड वेंडिंग मशीनें स्थापित करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि महिला पुलिसकर्मियों को जरूरत पड़ने पर आसानी से सैनिटरी पैड उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा, इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड के सुरक्षित और स्वच्छ निपटान के लिए इंसिनरेटर (Incinerator) लगाने की भी मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि केवल मशीनें लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, इसलिए इनके नियमित संचालन और रखरखाव के लिए अलग से बजट निर्धारित किया जाना भी जरूरी है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि सभी पुलिस इकाइयों में महिलाओं के लिए अलग, पर्याप्त और स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता से संबंधित सुविधाओं और मानकों को लेकर पूरे दिल्ली पुलिस ढांचे में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने के निर्देश दिए जाएं।

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