रोहित कश्यप, मुंगेली। जिले के ग्राम धनगांव गोसाई में पेयजल संकट को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम में प्रकाशित खबर को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने कलेक्टर को भेजे प्रतिवेदन में “भ्रामक और जमीनी हकीकत से परे” बताया है। विभाग का दावा है कि गांव में पेयजल की कोई समस्या नहीं है और ग्रामीणों को हैंडपंपों एवं सिंगल फेज पंपों से पर्याप्त पानी मिल रहा है। लेकिन लल्लूराम डॉट कॉम की टीम ने एक बार फिर गांव पहुंचकर हालात का जायजा लिया तो तस्वीर विभागीय दावों से अलग नजर आई।

ग्रामीणों ने दोबारा स्पष्ट किया कि गांव में आज भी पेयजल संकट बना हुआ है। गांव में दो-दो पानी टंकियां खड़ी हैं, लेकिन उनके बावजूद घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि समस्या तकनीकी खराबी की हो, रखरखाव की कमी की या विभागीय लापरवाही की, उन्हें सिर्फ इतना चाहिए कि घरों तक स्वच्छ और पर्याप्त पानी पहुंचे।

सरपंच ने भी जताई चिंता
ग्राम सरपंच रामखिलावन नेताम ने बताया कि गांव में कई सार्वजनिक और निजी ट्यूबवेल मौजूद हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर का पानी पीने योग्य नहीं है। इसी कारण बड़ी संख्या में ग्रामीण मजबूरी में स्कूल परिसर स्थित बोरवेल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों की मांग है कि स्कूल परिसर के बोरवेल से उच्च क्षमता के मोटर पंप के माध्यम से पाइपलाइन बिछाकर मोहल्लों और घरों तक पानी की आपूर्ति की जाए।

जल जीवन मिशन की स्थिति पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनाई गई व्यवस्था लंबे समय से बंद पड़ी है। लाखों रुपये की लागत से तैयार पानी टंकियां और पाइपलाइनें वर्तमान में उपयोग में नहीं हैं और केवल दिखावे तक सीमित रह गई हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि टंकियों को नियमित रूप से चालू किया जाए या फिल्टर प्लांट की स्थापना की जाए तो समस्या का समाधान संभव है।
पीएचई विभाग का पक्ष
पीएचई विभाग ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि ग्राम धनगांव गोसाई को स्थायी समाधान के लिए खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना में शामिल किया गया है और इस पर कार्य प्रगति पर है। विभाग के अनुसार इस योजना के कुछ हिस्सों को ग्रामीणों या अन्य कारणों से नुकसान पहुंचा है तथा जलागार के कुछ उपकरण चोरी हो गए हैं, जिससे जल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है।
हालांकि लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा प्रकाशित खबर पूरी तरह जमीनी पड़ताल, ग्रामीणों के बयानों और मौके पर मौजूद वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित थी। खबर प्रकाशित होने के बाद पीएचई विभाग ने इसे भ्रामक बताते हुए कलेक्टर को प्रतिवेदन भेज दिया, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि गांव में वास्तव में पेयजल संकट नहीं है तो फिर ग्रामीण आज भी पीने के पानी की समस्या को लेकर आवाज क्यों उठा रहे हैं? क्यों बड़ी संख्या में लोग पानी के लिए स्कूल परिसर के पास पहुंच रहे हैं?
जमीनी हकीकत बनाम विभागीय दावे
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के मुताबिक गांव में पेयजल की समस्या आज भी बनी हुई है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं विभागीय अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति से इतर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास तो नहीं किया? क्योंकि जमीनी स्तर पर जो हालात दिखाई दे रहे हैं, वे विभाग के दावों से मेल नहीं खाते।
एक और बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राम धनगांव गोसाई को पहले से ही खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना में शामिल किया गया था, तब फिर अलग से सिंगल विलेज स्कीम के तहत लाखों रुपये खर्च कर पानी टंकी और पाइपलाइन निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि वह योजना स्थायी समाधान नहीं थी तो उस पर खर्च हुई राशि का औचित्य क्या था?
कब मिलेगा समाधान?
विभाग का कहना है कि खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना का कार्य प्रगति पर है और उसके पूर्ण होने के बाद गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू होगी। लेकिन यह योजना कब पूरी होगी और गांव तक पानी कब पहुंचेगा, इसका स्पष्ट जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि तब तक ग्रामीण जलसंकट से जूझते रहें? क्या प्रशासन और विभाग को अंतरिम या वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करनी चाहिए ताकि लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके?
इस बीच मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडे ने पीएचई विभाग के ईई कमल प्रसाद कंवर को गांव में फिल्टर मशीन प्लांट स्थापित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं, जो कि डीएमएफ मद से लगाए जाएंगे। इससे यह संकेत भी मिलता है कि गांव में पेयजल गुणवत्ता और उपलब्धता को लेकर समस्या को प्रशासनिक स्तर पर भी महसूस किया गया है।
आखिरकार सरकारी योजनाओं का उद्देश्य कागजों में उपलब्धियां दर्ज कराना नहीं, बल्कि लोगों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना है। गांव में खड़ी दो-दो पानी टंकियां और दूसरी ओर पानी के लिए परेशान ग्रामीण, दोनों तस्वीरें एक साथ कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं जिनका जवाब जिम्मेदार विभागों को देना होगा।
सवाल जो मांग रहे हैं जवाब:
जब गांव में पेयजल संकट नहीं है तो लोग बड़ी संख्या में एक ही जगह पानी के लिए क्यों एकत्रित हो रहे हैं?
जब गांव खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना में पहले से शामिल था तो सिंगल विलेज स्कीम पर लाखों रुपये क्यों खर्च किए गए?
दो पानी टंकियों के बावजूद घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंच रहा?
स्कूल परिसर के एक बोरवेल पर ग्रामीणों की निर्भरता क्यों बनी हुई है?
खुड़िया समूह जल प्रदाय योजना से गांव में पानी कब पहुंचेगा?
जब तक योजना पूरी नहीं होती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
जल जीवन मिशन पर खर्च राशि का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को कब मिलेगा?
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H
