रोहित कश्यप, मुंगेली। भीषण गर्मी के बीच जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम धनगांव गोसाई में जल संकट ने ग्रामीणों की जिंदगी बेहाल कर दी है। हालात इतने खराब हैं कि गांव में दो-दो पानी टंकियां खड़ी होने के बावजूद लोगों को बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। जल जीवन मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई नई पानी टंकी और बिछाई गई पाइप लाइन आज भी ग्रामीणों के लिए सिर्फ दिखावा साबित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि करीब दो साल पहले जल जीवन मिशन योजना के तहत गांव में नई पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। घर-घर पाइप लाइन भी डाली गई, लेकिन आज तक किसी भी घर के नल में पानी नहीं आया। पुरानी टंकी पहले से ही बेकार पड़ी थी और अब नई टंकी भी सफेद हाथी बनकर खड़ी है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जब योजना का लाभ लोगों तक पहुंचाना ही नहीं था तो आखिर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत क्या थी? गांव के हैंडपंप भी खराब पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है।


पूरे गांव के लिए स्कूल परिसर में लगा एकमात्र ट्यूबवेल ही सहारा बना हुआ है। इसी ट्यूबवेल से ग्रामीण पीने और निस्तारी का पानी जुटा रहे हैं, लेकिन बिजली कटते ही बोर बंद हो जाता है और लोगों को घंटों पानी के इंतजार में खड़ा रहना पड़ता है।स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि कई ग्रामीणों को डेढ़ से दो किलोमीटर दूर दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है। कोई साइकिल पर डिब्बा बांधकर पानी ला रहा है तो कोई स्कूटी और पैदल सफर तय कर रहा है। गर्मी में पानी के लिए रोजाना की यह जद्दोजहद ग्रामीणों की मजबूरी बन चुकी है।
PHE विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने PHE विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द जल व्यवस्था सुधारने और जल जीवन मिशन योजना को चालू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से वे जल संकट झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन देने में लगे हैं।
जानिए विभाग ने क्या कहा?
इस मामले में पीचई विभाग के ईई कमल कंवर का कहना है कि धनगांव गोसाई को सामूहिक जल प्रदाय योजना में शामिल किया गया है। संभवतः एक साल के भीतर गांव की समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब सामूहिक जल योजना से ही पानी देना था तो फिर अलग से पानी टंकी बनाकर लाखों रुपये बहाने की जरूरत क्यों पड़ी? जब गांव के नल सूखे पड़े हैं तो आखिर पानी की तरह सरकारी पैसा बहाने का जिम्मेदार कौन है? अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर योजनाएं कागजों और टंकियों तक ही सीमित रह जाएगी।
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