Dhani Bhojraj Case : फतेहाबाद। ढाणी भोजराज का वह मामला, जो एक अंतरजातीय विवाह के बाद सामाजिक बहिष्कार के आरोपों से शुरू हुआ था, अब कथित पुलिस लेनदेन की जांच तक पहुंच चुका है। इस पूरे घटनाक्रम में सामने आए एक ऑडियो और ग्रामीणों से रकम जुटाए जाने की कथित सूची ने जांच की दिशा ही बदल दी। मामले में तत्कालीन डीएसपी के रीडर रहे दर्शन सिंह की आवाज ऑडियो से मिलान होने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई हुई है।
दरअसल, गांव में एससी समुदाय के युवक और जाट समुदाय की युवती के बीच विवाह के बाद विवाद खड़ा हुआ था।
युवक के परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास किया गया। दुकानदारों पर परिवार को सामान नहीं देने का दबाव बनाने और ऐसा नहीं करने पर जुर्माना लगाने की बात भी सामने आई थी। इसी घटनाक्रम से जुड़ी रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस में शिकायत और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई हुई।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि शुरुआती जांच में कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। इसके बाद जांच बदलने के साथ ही पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। आरोप लगाया गया कि प्रभावशाली लोगों ने जांच को अपने पक्ष में कराने के लिए पैसे जुटाए। इसी कथित लेनदेन से जुड़ी बातचीत का ऑडियो सामने आया, जिसने बाद में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का आधार तैयार किया।
मामले में ग्रामीणों से चंदा जुटाने की एक सूची भी सामने आई थी। इसमें अलग-अलग परिवारों से रकम लिए जाने का उल्लेख था। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि कुल रकम करीब पांच लाख रुपये तक पहुंची थी। इसी कथित रकम और ऑडियो बातचीत को लेकर तत्कालीन डीएसपी संजय बिश्नोई और उनके रीडर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
जांच के दौरान वायरल ऑडियो को आवाज की वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया। फॉरेंसिक जांच में रीडर की आवाज का मिलान होने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रकम किस तरह जुटाई गई, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
इस प्रकरण का दूसरा अहम पहलू मूल एससी-एसटी मामले की जांच है। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि जांच को प्रभावित कर आरोपियों को राहत पहुंचाई गई और मामले को कमजोर किया गया। इसी वजह से अब मूल केस की दोबारा जांच की मांग भी अदालत में उठाई गई है।
मामले में जांच की दिशा अब रीडर की कार्रवाई से आगे बढ़ चुकी है। तत्कालीन डीएसपी की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच एजेंसी के सामने सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि क्या कथित ऑडियो और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जांच अधिकारी तक पहुंचती हैं या नहीं।
ढाणी भोजराज का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि शुरुआत में यह एक अंतरजातीय विवाह के बाद पैदा हुए सामाजिक विवाद से जुड़ा था, लेकिन अब इसी मामले में पुलिस जांच, कथित पैसों के लेनदेन और वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच जैसे पहलू जुड़ चुके हैं। रीडर के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब निगाहें उस जांच पर हैं, जिसमें यह तय होना है कि कथित लेनदेन के पीछे आखिर किसकी भूमिका थी।
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