डिजिटल अरेस्ट, आजकल लोगों को फसाने का नया ट्रेंड बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हरियाणा पुलिस ने बड़ा एक्शन लिया है। ठग ज्यादातर बुजुर्गों को निशाना बना रहे है।

कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। डिजिटल दुनिया में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच “डिजिटल अरेस्ट” (Digital Arrest Fraud) अब एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है। इस फ्रॉड को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भी इसे “सीधी लूट” करार दिया है, खासकर जब इसका सबसे बड़ा शिकार देश के वरिष्ठ नागरिक बन रहे हैं।

इसी गंभीर खतरे को देखते हुए हरियाणा पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। डीजीपी Ajay Singhal के नेतृत्व में पुलिस ने इस “साइलेंट हीस्ट” यानी खामोश डिजिटल लूट के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है।

क्या है “डिजिटल अरेस्ट” स्कैम?
इस फ्रॉड में ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर लोगों को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते हैं। डर के माहौल में पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं।

हरियाणा पुलिस के बड़े कदम
इस साइबर खतरे से निपटने के लिए हरियाणा पुलिस ने कई अहम पहल की हैं:

  1. देश का पहला Dual-OTP सिस्टम
    फ्रॉड ट्रांजैक्शन रोकने के लिए डबल सिक्योरिटी लेयर लागू की गई है।
  2. 24×7 Cyber Helpline – 1930
    किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर तुरंत कॉल कर फंड ब्लॉक करवाने की सुविधा।
  3. ‘Secrecy Trap’ तोड़ने की रणनीति
    ठग पीड़ित को डराकर चुप रहने को कहते हैं—पुलिस इस मनोवैज्ञानिक जाल को तोड़ने पर काम कर रही है। जनता के लिए सीधी सलाह
    हरियाणा पुलिस ने ऐसे मौके पर लोगो को बिना घबराएं हिम्मत से काम लेने, ठगो के कहने पर पैसे ट्रांसफर नहीं करने, तुरंत 1930 पर कॉल करने और परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करने की सलाह दी है.