हकीमुद्दीन नासिर, महासमुंद। शाला प्रवेश उत्सव के साथ नए शिक्षा सत्र की शुरुआत हो गई है और बच्चे नई उम्मीदों के साथ स्कूलों की दहलीज पर कदम रख रहे हैं, लेकिन महासमुंद जिले के शासकीय स्कूलों की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। बच्चों के सिर पर कब छत गिर जाए, कब उन्हें करंट लग जाए, कब खिड़की से बारिश का पानी अंदर आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। कहीं स्कूलों में पीने के पानी का अभाव है, तो कहीं शौचालय तक नहीं हैं और कहीं अतिरिक्त कक्ष में कई कक्षाओं के छात्रों को एक साथ बैठाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

जानकारी के अनुसार, महासमुंद जिले में कक्षा पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए कुल 1956 शासकीय स्कूल संचालित हैं, जिनमें प्राथमिक स्कूल 1276, मिडिल स्कूल 492, हाई स्कूल 65 एवं हायर सेकेंडरी स्कूल 126 हैं। इन स्कूलों में वर्ष 2025-26 में 1 लाख 41 हजार 503 छात्र अध्ययनरत थे। जिले के 54 स्कूल पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुके हैं और इस्तेमाल के लायक नहीं हैं। पिछले सत्र में 2 दिसंबर 2025 को प्रशासन ने 113 स्कूलों की मरम्मत के लिए 96 लाख 39 हजार रुपये की स्वीकृति दी थी, जिसकी पहली किस्त जारी कर दी गई है। इन स्कूलों का मरम्मत कार्य तीन माह में पूरा किया जाना था, लेकिन 9 महीने बीतने के बाद भी सिर्फ 16 स्कूलों का काम पूरा हुआ है। कई जगह पर काम चालू ही नहीं हुआ है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

बागबाहरा ब्लॉक के शासकीय प्राथमिक शाला भदरसी का भवन जर्जर हो चुका है, जिसके कारण पिछले कई वर्षों से एक ही अतिरिक्त कक्ष में बच्चों की पढ़ाई हो रही है। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मुनगाशेर में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। कक्षा 6 से 8 तक की पूर्व माध्यमिक शाला मोंगरापाली-रेवा में न तो शौचालय है, न ही बिजली और न ही पीने के पानी की व्यवस्था है। छत गिर रही है, आठवीं के बच्चे जमीन पर पढ़ रहे हैं। यही हाल गांव के हाई स्कूल का भी है, जहां छत गिरने की स्थिति बनी हुई है। बच्चों को पढ़ाई में काफी असुविधा हो रही है।

छात्रों की पीड़ा

12वीं की छात्रा का कहना है कि पिछले कई सालों से हम ऐसे ही जर्जर भवन में पढ़ने के लिए मजबूर हैं। हमारे टीचर हमें इसी जर्जर भवन में अध्ययन करा रहे हैं। इसका कोई इलाज नहीं है। कई जनप्रतिनिधि आकर चले गए लेकिन आज तक स्कूल की बिल्डिंग नहीं बनी है।

कक्षा सातवीं की छात्रा का कहना है कि बरसात के दिनों में दीवारों से करंट आता है। खिड़की और दरवाजे पूरी तरह से टूट चुके हैं। जब बारिश होती है तो ऊपर से लेकर खिड़की और दरवाजों से पानी अंदर आता है, जिससे हम करंट के डर से सहमे-सहमे रहते हैं।

कई बार एस्टीमेट बनाकर दिया, लेकिन स्थिति जस की तस- सरपंच

मोंगरापाली-रेवा ग्राम के सरपंच खेमराज सिंह ने कहा कि हमने कई बार एस्टीमेट बनाकर दे दिया और कई बार जानकारी भी दे दी, लेकिन शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है। हमने 11 लाख का एस्टीमेट दिया था, पर सिर्फ 80 लाख ही स्वीकृत हुए हैं। हमारे यहां पानी, शौचालय और भवन सभी की स्थिति बेहद नाजुक है। ऐसी स्थिति में यदि कोई घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

क्या कहते हैं अधिकारी

जिला शिक्षा अधिकारी बीएल देवांगन का कहना है कि हमने सत्र के शुरू से ही सभी स्कूलों का चिन्हांकन कर लिया है और सभी को स्पष्ट आदेश दे दिया है कि जर्जर भवन में कोई भी स्कूल संचालित नहीं किया जाएगा और अपनी व्यवस्था के अनुसार पंचायत भवन या दो पाली में भी स्कूल संचालित किए जा सकते हैं। राज्य शासन का लिखित आदेश भी है कि जर्जर स्कूलों में कक्षाएं संचालित न की जाएं।

धीमी गति पर सवाल

महासमुंद शिक्षा विभाग का यह हाल है कि 2025 में स्वीकृत 113 स्कूल भवनों की राशि मिलने के बाद 9 माह में सिर्फ 16 भवनों का ही सुधार हो सका है। 97 स्कूल भवनों में आज भी राशि मिलने के 9 माह बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है, जो शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। बहरहाल शिक्षा विभाग का यह स्लोगन “स्कूल आ पढ़े बर, जिनगी ला गढ़े बर” असुविधाओं के अभाव में कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है।

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