हेमंत शर्मा, इंदौर/डिंडोरी। मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दावों की पोल खोलती एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। जिस जगह सरकारी राशन का अनाज रका जाना चाहिए, उस गोदाम में पिछले 10 सालों से मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है। मामला मेहदवानी विकासखंड के मटियारी गांव का है, जहां संचालित हाईस्कूल एक दशक बीत जाने के बाद भी खुद के भवन का इंतजार कर रहा है।
एक ओर सरकार भले ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हाइटेक स्कूलों के लंबे-चौड़े दावे करे लेकिन धरातल पर बच्चों को सिर छिपाने तक के लिए स्कूल भवन नसीब नहीं है।

10 साल, 60 छात्र और राशन दुकान का सीलन भरा गोदाम
1 जुलाई 2015 को मटियारी गांव में हाईस्कूल की शुरुआत हुई थी। वर्तमान में यहां 9वीं और 10वीं कक्षा के करीब 60 छात्र-छात्राएं दर्ज हैं। हैरानी और घोर लापरवाही की बात यह है कि इन बच्चों की कक्षाएं किसी स्कूल परिसर में नहीं, बल्कि सरकारी राशन दुकान की गोदाम के छोटे-छोटे कमरों में लगाई जा रही हैं। सीलन और तंग कमरों में बच्चे भेड़-बकरियों की तरह बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

न शौचालय की सुविधा, न खेल का मैदान… कहां जाएं मासूम?
10 वर्षों के लंबे अंतराल में एक पूरी पीढ़ी इस बदहाल व्यवस्था के बीच पढ़कर निकल गई या पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुई। स्कूल में बच्चों के लिए न शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के साफ पानी और खेल के मैदान का इंतजाम है।
जब हाईस्कूल स्तर के बच्चों के लिए बुनियादी जरूरतें तक उपलब्ध नहीं कराई जा सकी हैं तो फिर शिक्षा विभाग के बजट और बड़े-बड़े अभियानों का क्या औचित्य रह जाता है?

अफसर बोले- ‘जल्द बनेगा भवन’… पर 10 साल तक कहां सोता रहा विभाग?
मामले में जनजातीय कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त राजेन्द्र जाटव का कहना है कि स्कूल भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द पूरी कराई जाएगी।
ऐसे में ये सवाल उठने लाजमी है कि क्या 10 साल का लंबा वक्त एक स्कूल भवन की चारदीवारी खड़ी करने के लिए कम था? 10 सालों से राशन गोदाम में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ के खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन है? क्या मटियारी गांव के गरीब और आदिवासी वर्ग के बच्चों का अपना स्कूल भवन पाने का हक नहीं है?

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