योगेश पाराशर, मुरैना। शहर का 600 बेड वाला जिला अस्पताल एक बार फिर व्यवस्थाओं को लेकर सवालों में है। जहां एक ओर यहां मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग तेज हो रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की हकीकत सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने उजागर कर दी है। रविवार सुबह करीब सवा 11 बजे इमरजेंसी वार्ड में लाइट नहीं होने के कारण सड़क हादसे में घायल मरीजों का इलाज मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में किया गया।
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सोलर सिस्टम और जनरेटर की व्यवस्था
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ अंधेरे में मोबाइल की रोशनी का सहारा लेकर घायलों का उपचार कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि यहां सोलर सिस्टम और बिजली जाने पर जनरेटर की भी व्यवस्था उपलब्ध है। बावजूद इसके, उस समय सभी व्यवस्थाएं फेल नजर आईं।
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देर बाद बिजली आपूर्ति बहाल
हालांकि कुछ देर बाद बिजली आपूर्ति बहाल हो गई, लेकिन तब तक टॉर्च की रोशनी में इलाज का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। इस घटना ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और मरीज अब पूछ रहे हैं कि जब जिला अस्पताल में ही ऐसी स्थिति है, तो मेडिकल कॉलेज की मांग कितनी व्यवहारिक है।

