सुप्रीम कोर्ट ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो और रेलवे सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने को लेकर 9 अक्टूबर को दिए गए उसके निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना का मामला बनता है. 10 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों के प्रवेश और बाहर निकलने के गेट बंद कर दिए गए थे. DMRC ने बिना शर्त माफी मांगते हुए हलफनामे के माध्यम से अपनी बातें कही.

इस मामले में DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में माफीनामे के साथ जवाब दाखिल कर दिया है. इसे लेकर DMRC ने अब सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी है.

10 अक्टूबर को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद करने और पाबंदियां लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई थी.  DMRC ने अब सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी है और सफाई देते हुए बताया कि मेट्रो पूरी तरह बंद नहीं हुई थी. 

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की चेयरपर्सन डी. थारा ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना शर्त माफी मांगी है. उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पालन उसकी भावना और शब्दों के अनुरूप किया गया है.

DMRC का कहना है कि 10 अक्टूबर 2026 को 271 ट्रेनें चलाई गईं और कुल 4,157 ट्रेन ट्रिप पूरी की गईं. ट्रेन सेवाओं की संख्या में कोई कटौती नहीं की गई थी. कुल 303 में से 258 स्टेशन यात्रियों के लिए खुले और चालू थे. DMRC चेयरपर्सन सुश्री डी तारा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने उनका पक्ष सुने बिना ही आदेश पारित कर दिया था. फिर भी DMRC माफी मांगता है क्योंकि वो सुप्रीम कोर्ट का बहुत सम्मान करती है.

हलफनामे में डी तारा ने कहा कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले का उल्लेख किए जाने और सुनवाई के दौरान दिल्ली मेट्रो को न तो नोटिस दिया गया था और न ही निगम अदालत में मौजूद था. हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो से करीब 32 लाख यात्रियों ने सफर किया, जबकि सामान्य दूसरे शनिवार को यह संख्या लगभग 58 लाख रहती है.

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