अमित पाण्डेय, डोंगरगढ़. नगर पालिका क्षेत्र की व्यावसायिक संपत्तियों में वर्षों से कारोबार संचालित हो रहा है, लेकिन अब तक कई दुकानों के किरायानामे नहीं हो पाए हैं. कहीं अनुबंध नहीं हुआ तो कहीं अनुबंध खत्म होने के बाद भी नवीनीकरण नहीं हुआ हैं. ऐसे में नगरपालिका की संपत्तियों से होने वाली आय और रिकॉर्ड व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
महावीर पारा में नगरपालिका की कई दुकानें वर्ष 2019 से संचालित हैं. उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक तत्कालीन सीएमओ प्रमोद शुक्ला के कार्यकाल में नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 109 के तहत अनुबंध की अनुमति ली गई थी. इसके बाद कई सीएमओ आए और चले गए, लेकिन किरायानामा रजिस्ट्रार कार्यालय तक क्यों नहीं पहुंचा, यह सवाल अब भी बना हुआ है.

इसी तरह सतबहनी मार्ग से मंदिर जाने वाले रास्ते पर नगरपालिका की 68 दुकानें वर्ष 2013 से आवंटन का इंतजार कर रही हैं. उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि इन दुकानों से करीब 4.08 लाख रुपये किराये और प्रति दुकान 3.59 लाख रुपये अमानत राशि के रूप में संभावित आय हो सकती थी. लेकिन आवंटन प्रक्रिया लंबित रहने के कारण कई साल बीत गए और इनमें से कई दुकानें अब जर्जर होकर खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच गई हैं.
करबला चौक की 8 दुकानों का अनुबंध भी लंबित बताया जा रहा है. वहीं दुर्गा मंदिर स्टेशन रोड स्थित फ्रूट मार्केट भी निर्माण के बाद से आवंटन की राह देख रहा है. वन विभाग बस स्टैंड क्षेत्र की पुरानी दुकानों की स्थिति भी इसी तरह की है. 1988-90 के दशक में बनी इन दुकानों की अनुबंध अवधि समाप्त हो चुकी है. अगर समय पर इनका नवीनीकरण किया जाता और वर्तमान किराये के अनुरूप दर निर्धारित होती, तो नगरपालिका की आय में बढ़ोतरी हो सकती थी. ऐसे में सवाल उठता है कि नगरपालिका की जमीन और संपत्ति पर बनी इन दुकानों से राजस्व जुटाने की प्रक्रिया आखिर इतने वर्षों से लंबित क्यों है.
क्या कहते हैं दुकानदार?
इस मामले पर दुकानदारों का कहना है कि दुकान का आवंटन, अनुबंध, नवीनीकरण और किराया वसूली नगरपालिका की जिम्मेदारी है. इसके बावजूद प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहती है. कुछ दुकानदारों ने आरोप लगाया कि कुछ दुकानें जानबूझकर आवंटित नहीं की जातीं और कुछ जगह प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश होती है.

सबसे गंभीर सवाल उन दुकानों को लेकर है जो जरूरतमंद और बेरोजगार परिवारों के लिए बनाई गई थी. दुकानदारों का आरोप है कि कुछ लोगों ने नगरपालिका से दुकान हासिल करने के बाद उसे दूसरे व्यक्ति को बेच दिया या अनधिकृत रूप से दे दिया. अगर ऐसा है तो जिस जरूरतमंद को दुकान मिलनी चाहिए थी, वह आज भी बाहर खड़ा है और नगरपालिका की दुकान किसी और के कब्जे में कारोबार कर रही है.
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही साफ़ होगी लेकिन शहर की सभी दुकानों का रिकॉर्ड और मौके पर सत्यापन कराने की व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है.
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई : नपा अध्यक्ष

नगरपालिका अध्यक्ष रमन डोंगरे ने कहा कि दुकानों से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं शासन के नियमों के अनुसार पूरी की जाएंगी. किराया वसूली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और दुकान बेचने या अनधिकृत रूप से हस्तांतरित करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई होगी.
राजस्व बढ़ाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जाएंगी : CMO राजेश
सीएमओ राजेश कुमार तिवारी ने कहा कि लंबित दुकानों के अनुबंध और नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश संबंधित विभाग को दिए गए हैं. रिकॉर्ड दुरुस्त कर नगरपालिका का राजस्व बढ़ाने के लिए जरूरी कार्रवाई की जाएगी.
डोंगरगढ़ नगरपालिका से जनता का सवाल बस इतना है, जब दुकानें सालों से चल रही हैं तो कागज क्यों नहीं चले? नगरपालिका की संपत्तियों का अनुबंध, नवीनीकरण और किराया वसूली अगर समय पर होती तो आज पालिका की आमदनी कितनी बढ़ चुकी होती? यह पूरा मामला रिकॉर्ड की जांच के साथ सामने आएगा, लेकिन फिलहाल नगरपालिका की दुकानों का यह मामला उसकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर रहा है.


