टुकेश्वर लोधी, आरंग। आरंग नगर पालिका क्षेत्र का वार्ड क्रमांक 06 (अकोली रोड) बारिश के दौर में एक बार फिर जलमग्न हो चुका है। भारी बारिश के चलते अकोली रोड से सटे कई मकानों में लगभग 2 फीट तक पानी भर गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन में भारी उथल-पुथल मच गई है। घरों के भीतर पानी घुस जाने से राशन, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान खराब हो गए हैं, जिससे वार्डवासियों में नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ तीव्र आक्रोश व्याप्त है।

नगर पालिका कार्यालय का मुख्य मार्ग खुद पानी में डूबा

विडंबना यह है कि जिस मार्ग पर यह जलभराव हुआ है, वही अकोली रोड नगर पालिका कार्यालय जाने का प्रमुख रास्ता है। इसी मार्ग से रोज़ाना नगर पालिका अध्यक्ष, वार्ड पार्षद और पालिका के तमाम छोटे-बड़े प्रशासनिक अधिकारी अपने कार्यालय पहुंचते हैं। इसके बावजूद वर्षो से बनी इस विकराल समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सका है। इसी जलमग्न रास्ते से होकर शासकीय कन्या छात्रावास की छात्राएं और छोटे-छोटे स्कूली बच्चे रोज़ाना गुजरते हैं। घुटने तक भरे इस गंदे और दूषित पानी से होकर गुज़रना बच्चों के लिए खतरे से खाली नहीं है। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन पानी में बंद हो रहे हैं, जिससे रोज़ाना दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।

ड्रेनेज सिस्टम धरातल पर शून्य: खेतों से होकर गालियों में आ रहा पानी

वार्ड वासियों के अनुसार, नगर पालिका के पास जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। बारिश होते ही आसपास के खेतों का पानी नालियों की क्षमता से अधिक होकर सीधे वार्ड की गलियों और लोगों के आंगनों, कमरों में समा जाता है। वार्ड नंबर 06 के पार्षद प्रतिनिधि राकेश शर्मा ने एक माह पहले ही मुख्य नगर पालिका अधिकारी राम संजीवन सोनवानी को इस स्थिति के बारे में अवगत कराया था और इसका क्षेत्र का निरीक्षण भी किया था उसके बाद भी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए सीएमओ राम संजीवन सोनवानी ने अपने स्टाफ के साथ इलाके का निरीक्षण किया।उन्होंने अभी की स्थिति में वैल्पिक समाधान करने की बात कही है।

हर साल की वही कहानी

यह स्थिति कोई नई नहीं है। हर वर्ष मानसून आते ही वार्ड नंबर 06 के रहवासियों को इसी नारकीय स्थिति से जूझना पड़ता है। वार्ड पार्षद का कहना है कि उन्होंने पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों और प्रशासनिक अमले को इस समस्या से बार-बार अवगत कराया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।अधिकारियों की इस वादाखिलाफी और उदासीनता के कारण आने वाले मानसून के दिनों में भी राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

जवाबदेही किसकी?

जब नगर पालिका के जनप्रतिनिधि और आला अधिकारी रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं, तो उन्हें आम जनता का यह दर्द क्यों दिखाई नहीं देता?

लाखों के बजट का क्या हुआ?

हर साल ड्रेनेज और नालियों की सफाई के नाम पर जारी होने वाला बजट आखिर किसकी जेब में जा रहा है?

गंभीर बीमारी का खतरा

घरों और रास्तों में भरे इस बदबूदार पानी से डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। यदि कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?

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