भिलाईनगर। महारत्न कम्पनी सेल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि कर्मियों का वेज एग्रीमेंट साढ़े 9 वर्ष सेल SAIL भी नहीं हो सका है। यह भी पहली बार है कि कर्मियों को एरियर नहीं मिला। बीएसपी सहित सभी यूनिट के कर्मियों को 39 माह का एरियर 3000 करोड़ बँटना था। इस पर मैनेजमेंट ने अफोर्डेबिलिटी क्लाज की आड़ में चुप्पी साध ली और एनजेसीएस के केन्द्रीय नेताओं ने भी।
बीएसपी सहित सभी यूनिट के कर्मियों का वेज रिविजन 01 जनवरी 2017 से होना था। इसके लिए एमओयू 22 अक्टूबर 2021 को हो गया। इस एमओयू में केवल इंटक, एटक, एचएमएस ने ही हस्ताक्षर किया। बीएमएस और सीटू ने नहीं किया। यह एमओयू भी केवल वेज स्ट्रक्चर के लिए हुआ है। इस तरह देखा जाए तो एमओयू भी अधूरा है और वेज एग्रीमेंट तो हुआ ही नहीं है। सेल मैनेजमेंट ने 01 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2020 तक यानी 39 माह का एरियर देने से मना कर दिया।

मैनेजमेंट ने कहा गाइड लाइन है, अफोर्डेबिलिटी क्लाज के चलते एरियर नहीं दे सकते। यूनियन नेताओं ने कहा कि अफोर्डेबिलिटी क्लाज तो 2020 से लगा है तब उस समय आपने कैसे कहा कि एरियर दे देंगे? दबाव बनाने पर मैनेजमेंट ने कहा कि हर वर्ष 2000 करोड़ का प्राफिट होगा तब हम दे पाएंगे। मैनेजमेंट इस कंडीशन में भी इसे 600 करोड़ सालाना प्रति किस्त के हिसाब से पाँच किस्तों में देना चाह रहा था। एरियर की कुल राशि लगभग 3000 करोड़ थी ।
यूनियन नेताओं ने तब कहा कि कोई कंडीशन मत लगाएं। इसी मुद्दे पर लगातार दो दिनों तक यानी 21 और 22 अक्टूबर 2021 को डिस्कशन चला। मैनेजमेंट ने तीन माह का समय दिया जो कभी नहीं आया : यूनियन नेता बताते हैं कि एरियर के लिए दबाव बनाने पर मैनेजमेंट ने कहा कि एरियर देने के लिए बेस बनाना होगा तब एप्रूवल मिलेगा। फिर यह भी कहा कि सब कमेटी बनेगी और तीन माह में इस पर चर्चा कर लेंगे।
यूनियन नेताओं का कहना है कि बाद में मैनेजमेंट इस मुद्दे पर यह कहते हुए मुकर गया कि उसने चर्चा करने की बात कही थी, एरियर देने के बारे में तो लिखित में कुछ नहीं कहा गया था। यूनियनों ने इस मुद्दे पर यानी एरियर के मुद्दे पर 2024 और 2025 में सभी यूनिटों में भी हड़ताल भी किया। चीफ लेबर कमिश्नर तक मामला पहुँचा था : यूनियन नेताओं ने बताया हड़ताल के बाद चीफ लेबर कमिश्नर नईदिल्ली ने कौंसिलिएशन के लिए दोनों पक्षों को बुलाया। मैनेजमेंट इसमें भी एरियर के लिए राजी नहीं हुआ। साथ ही यह भी कहा कि यूनियनों में ही एका नहीं है।
चीफ लेबर कमिश्नर ने कहा कि तब भी मीटिंग जारी रखें ताकि इस पर चर्चा होती रहे। मैनेजमेंट ने इसी बैठक में यह भी कहा कि हमें मिनिस्ट्री से एप्रूवल नहीं मिला। यूनियन नेताओं ने कहा कि आपने एरियर के लिए जो ड्राफ्ट भेजा वह दिखाईए। मैनेजमेंट ने कहा कि अभी वह ड्राफ्ट नहीं है। उस ड्राफ्ट को मैनेजमेंट ने न तो चीफ लेबर कमिश्नर को दिखाया न यूनियन नेताओं को। यूनियन नेताओं की मानें तो मैनेजमेंट ने एरियर के एप्रूवल के लिए कोई लेटर लिखा ही नहीं था।
पीएचडी की प्रक्रिया हुई साफ, विषय के साथ विशेषज्ञता पर जोर
भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में पीएचडी करने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया अब पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।
विश्वविद्यालय ने परीक्षा का पैटर्न और विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों को मिलने वाली छूट के संबंध में निर्देश जारी किए हैं। सामान्य अभ्यर्थियों की तीन घंटे की 100 अंकों की लिखित परीक्षा होगी, जिसमें विषय और विशेषज्ञता से जुड़े वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके बाद पर्सनल इंटरव्यू के चरण से गुजरना होगा। वहीं नेट, स्लेट, गेट, जीपीएटी जैसी राष्ट्रीय स्तर की पात्रता रखने वालों सहित कुछ अनुभवी शिक्षकों, वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को लिखित परीक्षा से छूट का प्रावधान किया गया है।
तकनीकी विश्वविद्यालय का पीएचडी प्रवेश परीक्षा का लिखित पेपर 100 अंकों का और तीन घंटे का होगा। परीक्षा में पूरी तरह वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। पेपर को दो सेक्शन में बांटा गया है। सेक्शन-1 में संबंधित विषय से 40 प्रश्न यानी 40 अंक होंगे, जबकि सेक्शन-2 में संबंधित विषय के विशेषज्ञता वाले क्षेत्र से 60 प्रश्न यानी 60 अंक निर्धारित किए गए हैं।
ऐसे में अभ्यर्थियों को सामान्य विषय ज्ञान के साथ अपने स्पेशलाइजेशन की भी गहन तैयारी करनी होगी। जबकि मानविकी के अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा का पैटर्न अलग रहेगा। इनके लिए दो सेक्शन के बजाय 100 अंकों का एक ही सेक्शन होगा। इससे मानविकी के अभ्यर्थियों के लिए पूरे विषय की व्यापक तैयारी महत्वपूर्ण हो जाती है।
दो साल से लेकर 15 साल अनुभव वालों तक को छूट
नियमित पद पर कार्यरत विश्वविद्यालय या कॉलेज शिक्षक, जिन्होंने संबंधित विभाग में कम से कम दो वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें भी लिखित परीक्षा से छूट का प्रावधान है। शिक्षक फेलोशिप धारक, निर्धारित शोध अनुभव और संबंधित प्रकाशनों वाले सरकारी, राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों तथा आरएंडडी प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिक भी पात्रता शर्तें पूरी करने पर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। वहीं 15 वर्ष का औद्योगिक या फील्ड अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को भी लिखित परीक्षा से छूट दी गई है।
अब रिसर्च माइंडसेट भी जरूरी
पीएचडी प्रवेश की प्रवेश प्रक्रिया से साफ है कि पीएचडी में दाखिले के लिए केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं होगी। सामान्य अभ्यर्थियों के लिए विषय ज्ञान, विशेषज्ञता और इंटरव्यू – तीनों स्तरों पर तैयारी जरूरी होगी। वहीं पहले से राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा या निर्धारित शोध एवं पेशेवर अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा से राहत मिलेगी। ऐसे में 2026 की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शोध के प्रति अभ्यर्थियों की वास्तविक समझ और तैयारी को परखने वाली साबित हो सकती है।
कालीबाड़ी समिति के पदाधिकारियों ने ली शपथ
भिलाईनगर। कालीबाड़ी, सेक्टर 6 में आज नवगठित कार्यकारी समिति के पदभार ग्रहण समारोह एवं वृक्षारोपण हुआ । सांसद विजय बघेल एवं भिलाई नगर विधायक देवेंद्र यादव उपस्थित थे। समिति के पदाधिकारियों ने शपथ लेकर पदभार संभाला। कार्यकारिणी में कुल 21 पदाधिकारी एवं सदस्य शामिल हैं।
शपथ लेने वाले पदाधिकारियों में अध्यक्ष डॉ. दीप चटर्जी, उपाध्यक्ष देवव्रत कर, विश्वजीत दास, सचिव सुमीत कुमार घोषाल, सहसचिव सुमन शील, अजय कुमार मिश्रा, अरुणा भट्टाचार्य, कोषाध्यक्ष, तिमीर भट्टाचार्य, सदस्य बॉबी दास, रत्ना घोषाल, शोमा देव, तरुण भट्टाचार्य, सत्यजीत दास, समीर घोषाल, सौरभ दत्ता, बिपुल सेन, अभिदेव नंदी, तपन दास, दीपक कुमार बनर्जी, सत्यजीत पंडा, रजत राय है।
सांसद विजय बघेल एवं विधायक देवेंद्र यादव सहित उपस्थित अतिथियों ने नवगठित कायर्कारी समिति के सदस्यों की उपस्थिति में पौधारोपण किया। इस अवसर पर कालीबाड़ी परिसर को हरित, स्वच्छ एवं सुंदर बनाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने का संकल्प लिया गया।
व्यापारियों के अनुरोध पर सांसद बघेल ने रुकवाया ओवरब्रिज का काम
भिलाईनगर। गदा चौक से सुपेला चौक तक प्रस्तावित ओवरब्रिज का स्थानीय व्यापारियों ने विरोध कर दिया है। इस पर सांसद विजय बघेल ने पीडब्ल्यूडी (ब्रिज) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर को फोन किया। इसके बाद स्वाइल टेस्टिंग को रोक दिया गया।
याद रहे कि विधायक रिकेश सेन ने गदा चौक से सुपेला चौक तक व्यस्ततम यातायात को देखते हुए 1 किमी का ओवर ब्रिज बनाने की घोषणा की थी। इस पर गणेश मार्केट, सुपेला व्यापारी संघ तथा होलसेल होजियरी रेडीमेड एंड क्लाथ मर्चेंट एसोसिएशन सहित क्षेत्र के व्यापारियों ने सांसद विजय बघेल से पिछले दिनों मिलकर प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण को तत्काल स्थगित करने की मांग की।
उनका कहना था कि इस ओवरब्रिज की उपयोगिता व जनहित को ध्यान में रखते हुए पुनः समीक्षा की जाए। इस पर सांसद विजय बघेल ने पीडब्ल्यूडी विभाग (ब्रिज) के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से बात की। उनसे स्वाइल टेस्टिंग का काम रोकने कहा। इसके बाद स्वाइल टेस्टिंग का काम रोक दिया गया।
सांसद बघेल ने शनिवार को गणेश मार्केट एंड हालसेल मार्केट के तत्वाधान में आयोजित समारोह में ओवरब्रिज के मुद्दे पर कहा कि विकास के मुद्दे पर कहा कि जनभावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है। बघेल ने इस दौरान केपीएस चौक से नेहरूनगर चौक तथा बघवा मंदिर से चन्द्रा मौर्या टाकीज के सामने फोरलेन तक भी ओवरब्रिज का उल्लेख करते हुए कहा कि आखिर क्या करना चाहते हैं?
उन्होंने विधायक रिकेश सेन का नाम तो नहीं लिया लेकिन माना जा रहा है कि उनका इशारा उनकी ओर ही था । क्योंकि विधायक रिकेश सेन ने केपीएस चौक से लेकर नेहरूनगर तक ओवरब्रिज बनाने की घोषणा की थी। सांसद बघेल ने कहा कि गदा चौक से सुपेला चौक तक पार्किंग की व्यवस्था को ही दुरुस्त करने की जरूरत है। उन्होंने स्थानीय व्यापारियों से पार्किंग की व्यवस्था करने में सहयोग करने की अपील की। बहरहाल, सांसद विजय बघेल की पहल करने के बाद स्थानीय व्यापारियों ने राहत की सांस ली।
ट्रांसफार्मर नहीं लगने से अटका क्रिटिकल केयर अस्तपाल का कार्य
राजनांदगांव। मेडिकल कालेज पेंड्री में बन रहा क्रिटिकल केयर अस्पताल के लिए फिर लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। अस्पताल का सिविल कार्य पूरा हो चुका हैं, वही अब विघुत कार्य के लिए टेंडर कार्य किए जाने से लोकार्पण अटक गया है। जबकि सिविल और विद्युत लाइटिंग का कार्य एक साथ किया जाता तो अब तक लोकार्पण भी हो जाता है। इस लापरवाही के चलते एक बार फिर लोगों को सौगात मिलने में देरी होगी।
इस साल पहले फरवरी फिर जून और अब मेडिकल प्रबंधन को भी हैंडओव्हर की जानकारी ही मिली है। जानकारी अनुसार क्रिटिकल केयर अस्पताल की नींव 24 जून 2023 को रखा गया था। जिसे जुलाई 2025 जुलाई माह में पूरा कर लिया जाना था। लेकिन वर्तमान में सालभर की देरी के बाद भी अस्पताल का कार्य अटका हुआ है। हांलाकि वर्तमान में सिविल यानि बिल्डिंग स्ट्रक्चर का कार्य पूरा हो गया है। इसका निर्माण सीजीएमएससी द्वारा किया जा रहा है।
पूर्व में मेडिकल अस्पताल प्रबंधन को जून माह हैंडओव्हर किए जाने की जानकारी दी गई थी। लेकिन अब तक ट्रांसफार्मर लगाने का काम पूरा नही हो पाया है। ट्रांसफार्मर नही लगने से फायर सिस्टम व लिफ्ट की टेस्टिंग नही हो पाई है। जिसके चलते मेडिकल प्रबंधन को अब तक हैंडओव्हर नही किया जा सका है।
एक साल की देरी, फिर भी करना होगा इंतजार
मेडिकल कालेज में क्रिटिकल केयर अस्पताल का निर्माण 16 करोड़ 23 लाख और इक्यूपमेंट के लिए सात करोड़ 12 लाख रूपए में किया जा रहा है। इस तरह इसका निर्माण 23 करोड़ 75 लाख में हो रहा है। पिछले साल छग मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष दीपक म्हस्के ने जिला अस्पताल और पेंड्री स्थित मेडिकल कालेज में निर्माणाधीन कार्यो का जायजा लिया था। उन्होने क्रीटिकल केयर अस्पताल में निर्माण कार्य की देरी पर ठेकेदार को जमकर फटकार लगाई थी।
बाद में मंगा रहे टेंडर, इसलिए हो रही देरी
क्रिटिकल केयर अस्पताल के लिए सिविल और विद्युत का कार्य एक साथ होना था। लेकिन सीएमएससी द्वारा सिविल का कार्य और लाइनिंग का कार्य अगल अलग फर्म को दिया गया है। पता चला है कि सिविल का काम होने के बाद अब विद्युत कार्य के लिए टेंडर मंगाया जा रहा है। अब तक ट्रांसफार्मर नही लगने से लिफ्ट और फायर सिस्टम की टेस्टिंग नही हो पाई है, जबकि पूरा सिस्टम लग चुका है।
गौशाला होने के बाद भी सड़क पर घूम रहे मवेशी
राजनांदगांव। इन दिनों लावारिश मवेशी को लेकर जिले से लेकर राज्य स्तर पर राजनीतिक पारा बढ़ा हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि राज्य शासन द्वारा गौशाला के नाम पर हर साल लाखों रूपए दी जाती है। इसके बाद भी निजी गौशाला में मवेशियों की मौजूदगी नही दिखती, वही सड़क पर लावारिस मवेशियों की मौजूदगी ने सवालियां निशान खड़े कर दिया है। जिसे लेकर आम लोगों में नाराजगी सामने आ रही है।
जानकारी के अनुसार, राजनांदगांव शहर में श्री गौशाला पिंजरापोल व मोहारा में गौ आरोग्यम केन्द्र संचालित है। दोनो गौशाला में गिनती के मवेशी रखे गए है। जबकि सड़क में मवेशियों की मौजदूगी ने जहां दुर्घटना बढ़ा दी हैं, वही आय दिन सड़क दुर्घटना से प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। निजी गौशाला को राज्य शासन द्वारा हर साल प्रति मवेशियों के अनुसार अनुदान दिया जाता है। जिसमें उन्हें मवेशी के लिए चारा और रखरखाव की राशि शामिल रहती है। समाज सेवियों की माने तो दुर्घटना में हताहत मवेशियों को रखने के लिए भी ऐसे निजी गौशाला संचालक मना कर देते है।
सूत्र बताते है कि संचालक दूध वाली व स्वस्थ्य गाय को रखने की मांग करते है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि हर साल लाखों रूपए का अनुदान मवेशियों को नही बल्कि संचालको को मोटा कर रहा है। जानकारी अनुसार राजनांदगांव शहर के आलावा ग्रामीण इलाको में न्यू श्री गौरी गौशाला चौकी बांधा बाजार और मनोहर गौशाला खैरागढ़ में भी है। यहां भी गिनती के मवेशी रखे गए है।
पूर्व की सरकार द्वारा गांव गांव में गौठान बनाया गया था। इसके जगह भाजपा की सरकार ने वहां गौधाम बनाने की योजना बनाई थी। प्रत्येक ब्लाको में दस दस गौधाम बनाया जाना था। जिसमें अब एक भी गौधाम अस्तित्व में नही आ पाए हैं। पहले गौठानों में अधिकांश गांव में कब्जे जैसे हालात है। नही सुधर रही हालात सड़को में लावारिस मवेशियों की आय दिन दुर्घटना ने सवालिया निशान लगा दिया हैं। हाईवे में आय दिन सड़क दुर्घटना ने खतरा पैदा कर दिया हैं। वहीं शहर के अंदरूनी इलाको में भी मवेशियों की जमघट बनी रहती है।
बूढ़ा सागर में जा रहा गंदा पानी निगम का ट्रीटमेंट प्लांट भी फेल
राजनांदगांव। बूढ़ा सागर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के नाम पर पहले ही करोड़ो रूपए फूंक दिए गए, इसके बाद भी शहर से निकलने वाला गंदा पानी अभी भी तालाब में मिल रही है। यहां डायवर्सन के नाम पर पहले ही करोड़ों रुपए फूंके हैं, लेकिन शहरवासियों को राहत नहीं मिली है।
बता दे शहर से निकलने वाला गंदा पानी एतिहासिक बूढ़ा सागर तालाब में मिलकर प्रदूषित कर रहा है। जिसे लेकर नगर निगम पूर्व में करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुका है, लेकिन मौके पर अभी भी गंदे पानी को मिलने से रोका नही गया हैं। पहले कभी बूढ़ा सागर का पानी इतना खराब और जहरीला नही हुआ था। पिछले दिनों बूढ़ा सागर में हजारो मछलियों की मौत हो गई थी। नगर निगम द्वारा कराए गए टेस्टिंग में पानी का जहरीला होना पाया गया। बूढ़ा सागर में गंदे पानी के मिलने के कारण पानी का रंग हरा और मटमैला होने लगा हैं। पानी अब न मवेशियों को लायक रहा और न ही निस्तारी करने लायक हैं।
दो जगह फिर बना रहे ट्रीटमेंट प्लांट
अभी हाल में दो बड़े प्रोजेक्ट लांच किए गए है, जिसमें 147 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से दो एसटीपी प्लांट बनाया जाएगा। अटल कायाकल्प और शहरीय परिवर्तन मिशन के तहत बनाए जाने वाले प्लांट की स्थापना मोहारा और पार्रीनाला के पास किया जाएगा, ताकि शहर और गांव से निकलने वाले गंदे पानी से शिवनाथ नदी को प्रदुषित होने से रोका जा सके। बहरहाल नगर निगम द्वारा दोनो प्रोजेक्ट का टेंडर भी कर लिया गया है।
मंडी में बारिश से भीग रही है किसानों की फसल
राजनांदगांव। बारिश के चलते किसानों की परेशानियां बढ़ी हुई है। कृषि उपज मंडी में किसानों की फसल बारिश के दिनों में भीगने से उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंडी में पर्याप्त सुविधाओं के अभाव के कारण किसानों को अपनी उपज खुले में रखने की मजबूरी बनी हुई है। अचानक बारिश होने पर फसल को बचाना मुश्किल हो जाता है, जिससे किसानों को नुकसान की आशंका रहती है।
शेड होने के बाद भी परिसर में पानी भर रहा है। मंडी में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में धान सहित अन्य कृषि उपज की आवक होती है। किसान अपनी मेहनत से तैयार फसल लेकर मंडी पहुंचते हैं, लेकिन यहां उचित शेड, व्यवस्थित भंडारण और बारिश से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ती है। जिले की एकमात्र आदर्श मंडी होने के कारण यहां पर धान के साथ- साथ दलहन तिलहन की फसल सर्वाधिक पहुंचती है।
मंडी प्रबंधन की माने तो प्रतिदिन 40,000 कट्टा पहुंचता है। किसानों का कहना है कि बारिश के मौसम में मंडी प्रबंधन को पहले से आवश्यक इंतजाम करने चाहिए, ताकि खुले में रखी उपज सुरक्षित रह सके। फसल भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। जो आधुनिक सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पा रही है।
शाम होते ही मंडी परिसर में असामाजिक तत्वों का डेरा
वहीं शाम होते ही मंडी परिसर में असामाजिक तत्वों का डेरा लगने की शिकायत भी सामने आ रही है। इससे किसानों और मंडी में काम करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। किसानों ने मंडी में बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त शेड, फसल रखने की बेहतर व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की मांग की है। असामाजिक तत्वों की उपस्थिति होने से यहां पर मारपीट की घटनाएं भी होती रहती है। कृषि उपज मंडी के सचिव पंचराम वर्मा का कहना है कि मंडी में काफी व्यवस्थाएं सुधारी जा चुकी हैं और सुधारने का प्रयास भी किया जा रहा है।
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