भिलाईनगर। बीएसपी और अडाणी टोटल गैस लिमिटे (एटीजीएल) के बीच भिलाई में पाइप्ड नेचुरल गै (पीएनजी) की आपूर्ति के लिए एक समझौत (एमओयू) हुआ है। इसके तहत 70 किलोमीटर लंड अंडरग्राउंड पीएनजी पाइप लाइन बिछेगी। इस टाउनशिप में बिछाने का काम शुरु हो गया है।

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ज्ञात हो कि भिलाई इस्पात संयंत्र और अडानी बीएसपी ने 15000 से अधिक घरों में सीधे पाइप रसोई गैस पहुँचाने की योजना बनाई है। इसके तह इसी वर्ष 16 जुलाई को बीएसपी और अडाणी टोटली गैस लिमिटेड के मध्य एमओयू हो चुका है। इस दौरान भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस विनियमक बोर्ड के अध्यक्ष व पूर्व आईएएस अधिकान डॉ.अनिल कुमार जैन व बीएसपी के निदेशक प्रभार चित्तरंजन महापात्र उपस्थित थे।

दरअसल बीएसपी मैनेजमेंट पारंपरिक प्रोपेन औ.” एलपीजी गैस को हटाकर पीएनजी गैस का इस्तेमाल करना चाहता है ताकि प्रदूषण कम और ऊज दक्षता में बढ़ोतरी की जा सके। वह एक तरह से हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहता है। प्लांट परिसर के अंदर करीब 30 से अधिक कैंटीनों को भी इसी पाइ लाइन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इधर भिलाई नग क्षेत्र में भी गैस पाइप लाइन बिछाने के लिए एनओस मिल गई है। इससे अब निगम क्षेत्र में गैस आपूर्ति प्रस्तावित नगरों उपनगरों में भी गैस पाइप लाइ बिछाने का काम शुरु हो जाएगा।

एलपीजी सिलेंडर बुकिंग से मिलेगी निजात

समझौते के बाद एलपीजी सिलेंडर बुकिंग कराने की जरूरत नहीं रह जाएगी। पहले चरण के तहत नेहरूनगर, स्मृतिनगर, पुष्पक प्रियदर्शिनी नगर और जुनवानी आदि को शामिल किया गया है। इसके अलावा इससे प्लांट की स्टील और रिफ्रैक्ट्री यूनिट्स को भी स्वच्छ इंधन की आपूति सुनिश्चित की जाएगी।

पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव अब दो चरणों में करना होगा आवेदन

भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय ने परीक्षा परिणामों के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन से संबंधित प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब विद्यार्थियों के लिए चैलेंज इवैल्यूएशन की प्रक्रिया लागू की जाएगी। इसके तहत परीक्षा में मिले अंकों से असंतुष्ट विद्यार्थी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन को चुनौती दे सकेंगे।

बताया गया है कि 19 जून 2026 को आयोजित कार्य परिषद की 143वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, पूर्व में प्रचलित पुनर्मूल्यांकन, पुनः पुनर्मूल्यांकन और एबीआर की व्यवस्था को समाप्त करते हुए चैलेंज इवैल्यूएशन की प्रक्रिया लागू की जा रही है।

चैलेंज इवैल्यूएशन के लिए विद्यार्थियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। पहले चरण में एंड सेमेस्टर परीक्षा परिणाम घोषित होने के 10 दिनों के भीतर आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए प्रति विषय 200 रुपए शुल्क निर्धारित है। दूसरे चरण में आवेदन करने की समय-सीमा परिणाम घोषित होने के 20 दिनों के भीतर रखी गई है, जिसके लिए प्रति विषय 2000 रुपए शुल्क देना होगा।

विशेषज्ञों की टीम करेगी उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन : चैलेंज इवैल्यूएशन के तहत विश्वविद्यालय द्वारा गठित टीम उत्तरपुस्तिका का मूल्यांकन करेगी। इसमें दो विषय विशेषज्ञ और एक अध्यक्ष शामिल होंगे। मूल मूल्यांकनकर्ता को इस प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा। मूल्यांकन के दौरान मूल परीक्षक और चैलेंज इवैल्यूएशन में प्राप्त अंकों के बीच अंतर के आधार पर नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।

विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार, अंकों में निर्धारित सीमा तक अंतर होने पर प्राप्तांक को अंतिम माना जाएगा। वहीं, अधिक अंतर की स्थिति में शुल्क वापसी और अंकों के निर्धारण से संबंधित प्रावधान लागू होंगे। वहीं तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई को आवेदन प्राप्त होने की अंतिम तिथि से अधिकतम एक महीने के भीतर चैलेंज इवैल्यूएशन की पूरी प्रक्रिया करने का लक्ष्य दिया गया है।

भिलाई एमआईसी की बैठक में 12 प्रस्तावों पर बनी सहमति

भिलाईनगर। नगर निगम भिलाई में महापौर परिषद की बैठक महापौर नीरज पाल की अध्यक्षता एवं निगम आयुक्त सुरूचि सिंह की उपस्थिति में हुई। बैठक में सफाई, स्ट्रीट लाइट, आवासीय भूखंड और जलभराव सहित 12 प्रस्तावों पर सहमति बनी।

बैठक में शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं के विस्तार, सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने, स्ट्रीट लाइट के संधारण, विज्ञापन बोर्ड, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंडों अंतरण, मांगलिक भवन के संचालन तथा जलभराव और प्रदूषित जल की समस्या के समाधान सहित मैदान, मार्ग, डोमशेड, डामरीकरण एवं नाली निर्माण पर विस्तार से चर्चा की गई।

महापौर परिषद के सदस्यों ने प्रस्तुत प्रस्तावों पर विचार-विमर्श करते हुए संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए सहमति दे दी। बैठक में जोन 3 अंतर्गत संतोषी पारा स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन को संचालन, प्रबंधन एवं संधारण के लिए 10 माह की अवधि के लिए किराये पर दिए जाने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इस पहल का उद्देश्य मांगलिक भवन का बेहतर प्रबंधन के लिए सहमति दी।

छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम भवन / भूमि के कर योग्य संपत्ति मूल्य निर्धारण नियम, 2021 के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भवन एवं भूमि के कर योग्य संपत्ति मूल्य का निर्धारण किए जाने के विषय पर भी चर्चा की गई। संपत्तियों के मूल्य निर्धारण से संबंधित प्रस्ताव पर परिषद के सदस्यों ने विचार-विमर्श किया।

वार्ड 28 प्रेम नगर स्थित चैता मैदान का नाम परिवर्तित कर स्व. भगवान राय स्मृति चैता मैदान किए जाने पर सहमति दी गई। इसी प्रकार, 18 नंबर रोड से मुक्तिधाम तालाब तक जाने वाले मार्ग का नाम बदलकर स्व. विजय प्रकाश यादव छठ घाट मार्ग रखने के प्रस्ताव को भी सहमति प्रदान की गई।

जमीन खरीदी बिक्री पर लगाये गये प्रतिबंध समाप्त

दुर्ग। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने परियोजना प्रबंधक / विद्युत, रायपुर के 16 एवं 22. सितम्बर को प्रस्तुत पत्र के आधार पर जिला दुर्ग के अनुभाग दुर्ग के ग्राग-बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह । अनुभाग पाटन के ग्राम परेवाडीह, पंहडोर, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, नारधी, महकाकला, महकाखुर्द, कुरूदडीह, बटंग तथा अनुभाग भिलाई – 3 के ग्राम सोमनी, सिरसाकला, परसदा ( पाहंदा), गनियारी, देवबालोदा, उरला कुल 25 ग्रामों की प्रतिबंधात्मक आदेश 3 जून एवं 5 जून के माध्यम से प्रभावित भूमियों के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी-बिक्री आदि पर लगाए गए प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है। आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

ज्ञात हो कि दुर्ग जिले में ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (दानकुनी-सूरत) के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आने वाली ज़मीन की बिक्री-खरीद और ट्रांसफर पर लागू नियमों के तहत रोक लगाने के अनुरोध को परियोजना प्रबंधक डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड द्वारा उपरोक्त प्रभावित ग्रामों में खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी बिक्री आदि पर लगाये गये प्रतिबंध को अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने तक हटाये जाने हेतु निवेदन किया गया है।

गोवर्धन पनीर में तीन गुना अधिक लेड बिक्री पर प्रतिबंध

राजनांदगांव। त्योहारी सीजन से पहले खाद्य एवं औषधि प्रशासन की जांच में पनीर और दूध की गुणवत्ता को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। गोवर्धन ब्रांड के पनीर में निर्धारित मानक से तीन गुना अधिक लेड मिला है। वहीं, कान्हा डेयरी का खुला दूध असुरक्षित और यदु डेयरी का दूध अवमानक घोषित किया गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी अंगेश्वरी कचलाम द्वारा ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड से लिए गए गोवर्धन पनीर के नमूने की भोपाल की अधिकृत प्रयोगशाला में जांच की गई। रिपोर्ट में लेड की मात्रा 0.061 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम मिली, जबकि निर्धारित सीमा 0.02 मिलीग्राम है। इसके बाद संबंधित बैच की बिक्री और वितरण पर जिलेभर में प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उत्पाद को बाजार से वापस मंगाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। अनुपम नगर स्थित कान्हा डेयरी के दूध में भी मानक से लगभग 2.5 गुना अधिक लेड मिला। वहीं, कमला कॉलेज चौक स्थित यदु डेयरी के दूध में वसा और एसएनएफ की मात्रा निर्धारित मानक से कम पाई गई। अभिहित अधिकारी तरुण बिरला के अनुसार, तीनों मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत विवेचना शुरू कर दी गई है।

पूरी होने पर संबंधित कारोबारियों और निर्माताओं के खिलाफ न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किए जाएंगे। आगामी त्योहारों को देखते हुए मिठाई, मावा, दूध, पनीर और खाद्य तेल की जांच तेज की जाएगी तथा गड़बड़ी मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी।

तीन दिनों से नर्सों की हड़ताल जारी

राजनांदगांव। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नर्सों की तीन दिनों से जारी हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, नर्सिंग स्टाफ की अनुपस्थिति के चलते मरीजों की देखभाल और वार्डों में व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी बढ़ने से चिकित्सकों पर भी दबाव बढ़ गया है। खास बात यह है कि अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर न हड़ताल कर रही है।

जिले का एकमात्र अस्पताल होने के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नर्सों की हड़ताल का असर मरीजों की नियमित देखभाल, दवाइयां देने और अन्य नर्सिंग सेवाओं पर पड़ सकता है। मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल प्रबंधन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है। हड़ताल के चलते मरीजों और उनके परिजनों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक चक्कर काटने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। परिजन भी काफी अधिक परेशान नजर आ रहे हैं।

नर्सों की हड़ताल लंबी खिंचने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के सामने मरीजों के उपचार को सुचारु बनाए रखने के साथ हड़ताली नर्सों की मांगों पर बातचीत कर समाधान निकालने की चुनौती है। मरीजों को समय पर उपचार मिलना सुनिश्चित करना अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए। दबाव बधाई जाने के बाद भी नर्स काम पर नहीं लौट रही है।

जिला अस्पताल का एक्सरे मशीन खराब, भटक रहे मरीज

राजनांदगांव। जिला अस्पताल में पिछले सप्ताहभर से एक्सरे मशीन खराब है। लेकिन सुधार कार्य नही कराया जा रहा है। जिससे मरीज बेहद परेशान हो गए है। जिला अस्पताल में पर्ची कटाने के बाद उन्हे कहा जा रहा है कि मशीन खराब है। जिसके बाद मायूस होकर मरीज लोट रहे है और उन्हें निजी अस्पताल की ओर भेजा जा रहा है।

जिला अस्पताल में आय दिन एक्सरे मशीन के खराब होने की शिकायत सामने आ रही है। काउंटर के सामने लिखा गया है कि मशी का रिपेयरिंग कार्य चल रहा है। जिससे देख मरीज वापस लौट रहे है।

उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में पहले ही सिटी स्कीन मशीन कबाड़ हो गया है। वह अब बाकी संसाधनों का रखरखाव नही होने से मरीज परेशान हो रहे है। मरीजों का कहना है कि उन्हें मजबूरीवश महंगी राशि देकर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से एक्सरा कराना पड़ रहा है। जिससे वे परेशान हो गए है। इस मामले में जिला अस्पताल के सीएस महेन्द्र प्रसाद का कहना है कि, मशीन का जल्द ही रिपेयरिंग करा लिया जाएगा।

धान बेचने पंजीयन कराने के लिए समितियों में किसानों की उमड़ रही भीड़

राजनांदगांव। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसान पंजीयन कराने में जुटे हैं। पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है। समय-सीमा नजदीक आने के साथ ही सहकारी समितियों में किसानों की आवाजाही बढ़ रही है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के आधिकारिक सूत्रों की माने तो जिले में इस वर्ष अब तक पंजीयन का आंकड़ा एक लाख से अधिक पहुंच चुका है। पिछले खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में जिले के 1,24,095 किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा था। इस वर्ष आंकड़ा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिले में भी किसान जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष संचालित होने वाली समितियां में पहुंचकर अपनी उपज की धान बेचते हैं।

धान की बिक्री सुनिश्चित कराने के पहले पंजीयन का कार्य सुनिश्चित कराया जाता है। जिला प्रशासन के निर्देश पर राजनांदगांव जिले की समितियों में भी किसानों का पंजीयन तेजी से पूर्ण कराया जा रहा है। समितियां में पहुंचकर किसान अधिक से अधिक पंजीयन कराते नजर आ रहे हैं। इस बार पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या पिछले वर्ष के आंकड़े के करीब पहुंचती है या उससे आगे निकलती है, यह अंतिम पंजीयन के बाद स्पष्ट होगा।

पिछले वर्ष के आंकड़े पर नजर खरीफ सीजन 2025-26 1,24,095 किसानों ने धान बेचा वर्तमान सीजन 2026-27 : पंजीयन का आंकड़ा एक लाख से अधिक । चल रहा है पंजीयन का कार्य-सीईओ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सीईओ सुधीर सोनी का कहना है कि पंजीयन का कार्य तेजी से पूर्ण किया जा रहा है।

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