भिलाईनगर। इस्पात मंत्रालय का सेल के कार्पोरेट आफिस पर मैनपावर कम करने का जबर्दस्त दबाव है। कम्पनी पर ऐसे कार्मिकों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने का दबाव है, जो कम्पनी में 30 वर्ष सेवा कर चुके हैं या फिर जिनकी उम्र 55 वर्ष पूरी हो गई है। दबाव इतना है कि जो लोग वीआर नहीं लेंगे उन्हें सीआर यानी कम्पलसरी रिटायरमेंट दिया जा सकता है।
वैसे मैनपावर कम करने का इस्पात मंत्रालय का दबाव तो पहले से ही था लेकिन यह दबाव अचानक बढ़ गया है। सेल का मैनपावर कास्ट 11 प्रतिशत है। जबकि निजी स्टील कंपनियों का मैनपावर कास्ट 2 से लेकर 4 प्रतिशत है। बीएसपी की बात करें तो चार कर्मियों के पीछे एक अफसर है। स्टील सेक्रेटरी संदीप पौड्रिक मैन पावर के मुद्दे पर अब सीधे कम्पनी की यूनिटों के प्रमुखों से बात कर रहे हैं। 16 अप्रैल को उन्होंने बीएसपी में मैनपावर कम करने को लेकर बहुत सख्त लहजे में बात की। इसके बाद यह माना जा रहा है कि इस बार वीआर स्कीम का टार्गेट बड़ा रहेगा। उच्च प्रबंधन स्तर पर चर्चा है कि यह टार्गेट 4000 के आसपास हो सकता है।

बीएसपी में इस समय 12552 कार्मिक
बीएसपी में इस समय सर्वाधिक मैनपावर है। 01 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार 2471 एक्जीक्यूटिव और 10081 नान एक्जीक्यूटिव हैं। यानी कुल कार्मिकों की संख्या 12552 है। इनमें कितने कार्मिक 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं और कितने कार्मिकों की उम्र 55 वर्ष पूरी हो गई है, यह आंकड़े मैनेजमेंट के पास हैं। इन आंकड़ों के अनुसार मैनपावर कहां कहां कितनी संख्या में कम किए जा सकते हैं, इस पर प्रबंधन बहुत जल्द वर्क करने वाला है। वर्क्स और नान वर्क्स एरिया दोनों एरिया में मैनपावर कम किया जाना है।
जबरिया रिटायर कर दिये जाएंगे
कुछ ऐसे कार्मिक जिनसे प्रबंधन मुक्ति चाहता है वे अक्सर वीआर नहीं लेते। ऐसे कार्मिक इस बार मैनेजमेंट के टार्गेट में रहेंगे। अब कम मैनपावर में मैनेजमेंट को प्रोडक्शन टार्गेट पूरा करने का दबाव रहेगा इसलिए वह ऐसे कार्मिकों से मुक्ति पाना चाहेगा जो अक्सर मेडिकल अनफिट रहते हैं, या विकलांग हैं या नेतागीरी कर अटेंडेंड लेते रहते हैं। आने वाले दिनों में कतिपय कर्मियों को ड्यूटी में मिलना बंद हो सकता है। यूनियन या फिर स्थानीय राजनीतिज्ञों के दबाव की मैनेजमेंट परवाह नहीं करेगा।
वीआर स्कीम तैयार लांच करने की तैयारी
सेल के कार्पोरेट आफिस ने वीआर स्कीम तैयार कर लिया है। उसे लांच करने की तारीख भर अभी तय नहीं हुई है। पहले चर्चा थी कि उसे 5 अप्रैल को लांच कर दिया जाएगा पर नहीं किया गया। इस बीच सेल चेयरमैन की विदाई हो गई है और नए चेयरमैन को कार्यभार संभालने में लगभग तीन माह का समय है। ऐसे में वीआर स्कीम को कब लांच किया जाए इस पर सेल मैनेजमेंट भी मंथन कर रहा है। इसके अलावा वीआर स्कीम एक बड़ी राशि का एकमुश्त भुगतान करना भी सेल के कार्पोरेट आफिस के लिए एक चुनौती है। हालांकि सेल का ही आंकड़ा है कि चालू वित्त वर्ष में 1 लाख 20 हजार करोड़ रुपया से अधिक का कैश कलेक्शन हो चुका है।
मैनेजमेंट के लिए चुनौती
इस्पात मंत्रालय के दबाव में सेल मैनेजमेंट वीआर स्कीम तो ला रहा है, लेकिन वर्तमान में ही उसे अपनी कई यूनिटों में अनेक विभागों में मैनपावर की दिक्कत है। ऐसे में वीआर स्कीम के बाद कम मैनपावर में प्रोडक्शन लेना चुनौती भरा होगा। कारण, उसे एक्सपांशन प्रोजेक्ट का टार्गेट दिया जा रहा है। यानी उस पर प्रोडक्शन बढ़ाने का भी दबाव रहेगा।
निजी स्कूलों पर मनमानी की जांच करने पांच सदस्यीय दल गठित
दुर्ग। जिले में संचालित निजी स्कूलों द्वारा मनमानी किए जाने का आरोप लगा है। जिला शिक्षा विभाग को विभिन्न माध्यमों से इसकी शिकायत प्राप्त हुई है। इसे संज्ञान में लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया है।
आरोप में कहा गया है कि कई निजी स्कूलों द्वारा गणवेश में परिवर्तन, पाठ्य पुस्तक को एक ही दुकान से क्रय करने बाध्य करना, पाठ्य पुस्तक बदलना सहित मनमाने ढंग से फीस वृद्धि की गई है। इसे लेकर विभिन्न माध्यमों से प्राप्त निजी स्कूलों संबंधी शिकायतों पर जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग द्वारा कार्यवाही करते हुए सर्व नोडल प्राचार्यों, शासकीय हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी जिला दुर्ग को 7 अप्रैल 2026 को सभी अशासकीय विद्यालयों से प्रतिवेदन मांगा गया। प्रतिवेदन प्राप्त होने उपरांत शिकायतों का निराकरण करने समिति का गठन किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित पांच सदस्यीय जांच दल में जे. पी. पाण्डेय, प्राचार्य, सेजेस पाहुंदा पाटन, राजेन्द्र चन्द्राकर, व्याख्याता, सेजेस बोरसी दुर्ग, सुनील कश्यप, व्याख्याता, शा.उ.मा.वि. कन्या भिलाई 03 पाटन, संदेश पाण्डेय, व्याख्याता, सेजेस मर्रा पाटन, सुमीत नायडु, सहायक ग्रेड 02, शा.क.उ.मा.वि. वैशालीनगर, भिलाई शामिल है । सर्व पालक निजी विद्यालय अपना साक्ष्य सहित बयान दर्ज कराने हेतु कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग में जांच समिति के 20 अप्रैल तक उपस्थित होने कहा गया है।
इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ बजरंग दल व जिला अध्यक्ष, भीम आर्मी भारत एकता मिशन छग को अपना पक्ष जांच समिति के समक्ष साक्ष्य सहित प्रस्तुत करने कहा गया है। इन्हें डीईओ कार्यालय में जांच समिति के समक्ष 18 अप्रैल को प्रातः 10 बजे से 12 बजे तक उपस्थित होने कहा गया है।
सरकारी अफसरों से खाली कराए जाएंगे बीएसपी आवास
भिलाईनगर। बीएसपी आवासों में, खासकर बड़े आवासों में केन्द्र और राज्य सरकार के बड़े अफसर लंबे समय से जमे हुए हैं। तत्संबंध में की गई शिकायतों को इस्पात मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी मैनेजमेंट से कहा है कि सरकारी अफसरों से आवास खाली कराने की कार्रवाई करें, कम्पनी आवास आवंटित करने की प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करें।
ज्ञात हो कि सेक्टर 9, सेक्टर 10 सहित अन्य सेक्टरों के बीएसपी आवासों में केन्द्र और खासकर राज्य के सरकारी अफसर बड़ी संख्या में जमे हुए हैं। इनमें आईएएस और आईपीएस सहित अन्य अफसर शामिल हैं। सेक्टर 9 के बड़े आवास तो ज्यादातर सरकारी अफसरों के कब्जे में ही हैं। इनमें से कई अफसर वर्षों पूर्व रिटायर हो चुके हैं या कई का तबादला हो चुका है, बावजूद अपने रुतबे के बल पर आवासों में कब्जा जमाए में हुए हैं। बीएसपी आवासों सरकारी अफसरों के बड़ी संख्या में कब्जा जमाये रखने की शिकायत केन्द्रीय इस्पात मंत्री, इस्पात सचिव पहुंची तक है।
बीएसपी आफिस स एसोसिएशन ने तो बाकायदा उनके खिलाफ मुहिम ही छेड़ रखा है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकारी अफसरों ने बड़े आवासों में बड़ी संख्या में कब्जा जमा रखा है इसके चलते बीएसपी के अफसरों को बड़े आवास नहीं मिल रहे हैं। इस्पात मंत्रालय के दबाव के बाद बीएसपी मैनेजमेंट अब सरकारी अफसरों द्वारा कब्जा जमाकर रखे गए आवासों को खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
मैनेजमेंट ऐसे अफसरों की सूची राज्य सरकार को भेजकर भी उनसे आवास खाली कराने का अनुरोध कर सकता है। असल में राज्य के कई बड़े अफसर बीएसपी के बड़े आवासों का इस्तेमाल फार्म हाउस की तरह कर रहे हैं। इन अफसरों के पास राजधानी में भी आवास आवंटित है और वे सप्ताहांत में बीएसपी आवासों में आकर मात्र एक दो दिनों के लिए आते हैं। यह आवास खाली होने पर बीएसपी के बड़े अफसरों को आवंटित किए जा सकेंगे।
जरूरी मामलों को सेल बोर्ड में रखें
इस्पात मंत्रालय ने बीएसपी आवासों में सरकारी अफसरों के कब्जा जमाए रखने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। मंत्रालय की ओर से रिव्यू मीटिंग में राज्य और केन्द्र सरकार के अफसरों को कम्पनी आवास आवंटित करने की मौजदा प्रथा को तत्काल प्रभाव से बंद करने कहा गया।
महाराजा चौक तथा पोटिया चौक में बनेंगे दो फ्लाईओवर
दुर्ग। जेल तिराहा से मिनीमाता चौक तक फोरलेन बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस फोरलेन पर दो फ्लाई ओवर तथा एक ब्रिज बनाया जाएगा। भारती विश्वविद्यालय के समीप पुलगांव नाले पर 120 मीटर ब्रिज बनाने का प्रस्ताव लोक निर्माण विभाग के वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया जा चुका है। ब्रिज की चौड़ाई करीब 25 मीटर होगी। इस पर अनुमानित लागत 42 करोड़ आंकी गई है। वहीं महाराजा चौक तथा पोटिया चौक में दो फ्लाई ओवर बनाए जाएंगे। ये फ्लाई ओवर 700-700 मीटर के होंगे। इसकी चौड़ाई 12 मीटर होगी। इस पर भी करीब 42 करोड रुपए खर्च किए जाएंगे। इस प्रस्ताव को लोक निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया गया है।
दुर्ग शहर की आबादी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जिसका दबाव यातायात पर पड़ रहा है। जेल तिराहा से मिनी माता चौक की ओर जाने वाली वाहनों की संख्या इतना अधिक है कि लोगों को इस सकरी सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। इसे देखते हुए इस सड़क का विस्तार फोरलेन के रूप में किया जा रहा है । फोरलेन बनाने की प्रारंभिक प्रक्रिया में सड़क किनारे के अवरोधों को हटाया जा रहा है। सड़क किनारे लगे 219 पेड़ों की कटाई की जा चकी है। अन्य सकरी सड़क से गुजरना मुश्किल हो जाता है। इसे देखते हुए इस सड़क का विस्तार फोरलेन के रूप में किया जा रहा है।
फोरलेन बनाने की प्रारंभिक प्रक्रिया में सड़क किनारे के अवरोधों को हटाया जा रहा है। सड़क किनारे लगे 219 पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। अन्य अवरोधों को हटाने 117 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। इस बीच पीडब्ल्यूडी ब्रिज विभाग के अधिकारी फ्लाई ओवर तथा ब्रिज बनाने की प्रारंभिक तैयारी शुरू किए हैं। मिट्टी तथा पत्थर का परीक्षण करने महाराजा चौक के पास बोरिंग की जा रही है।
पत्थर परीक्षण के लिए बोरिंग
पीडब्ल्यूडी ब्रिज के एसडीओ हरियाले ने बताया कि जेल तिराहा से मिनीमाता चौक तक बनने वाले फोरलेन पर दो जगह पर फ्लाई ओवर तथा एक जगह पर ब्रिज बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि फ्लाई ओवर बनाने के पहले पत्थर की जांच की जाएगी, जिसके लिए महाराजा चौक के पास बोरिंग जा रही है।
फोरलेन पर एक नजर
लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता ए. के. भट्टाचार्य ने बताया कि फोरलेन के डिवाइडर के दोनों ओर 8.5- 8.5 मीटर चौड़ी सड़क होगी। डिवाइडर की चौड़ाई 0.2 मीटर तथा ड्रेनेज 1.30 मीटर एवं शोल्डर 1 मीटर की होगी। सिविल वर्क के लिए 22 करोड़ 10 लाख 90 हजार का बजट रखा गया है।
पुराने नोट, सिक्कों के नाम पर 11 लाख की ठगी, आरोपी गिरफ्तार
खैरागढ़ / छुईखदान। पुराने सिक्कों और नोटों के बदले लाखों रुपये दिलाने का लालच देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने हरियाणा के नूंह जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए एक व्यक्ति से 11 लाख 70 हजार रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने आरोपी के पास से 9 मोबाइल फोन 2 एटीएम कार्ड और 4 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, पद्मावतीपुर निवासी नेताराम देवांगन ने थाना छईखदान में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके मोबाइल पर व्हाट्सएप के माध्यम से पुराने नोट और सिक्कों के बदले लाखों रुपये मिलने का प्रस्ताव आया । लालच में आकर उसने 5 रुपये का पुराना नोट भेजा, जिसके एवज में करीब 37 लाख 94 हजार रुपये देने का झांसा दिया गया। इसके बाद अलग अलग बहानों जैसे प्रोसेसिंग फीस कस्टम शुल्क आदि के नाम पर उससे किस्तों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने नकदी भेजने और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर भी अतिरिक्त पैसे वसूले। इस तरह कुल 11 लाख 70 हजार रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। मामले में थाना छुईखदान में अपराध क्रमांक 122/2026 के तहत संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई जांच के दौरान पुलिस को करीब 20 बैंक खातों और 30 से 40 फर्जी सिम कार्ड के उपयोग के साक्ष्य मिले।
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपी की लोकेशन हरियाणा के नूंह जिले मंप मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश देकर आरोपी मोहम्मद जाहिर (19 वर्ष), निवासी ग्राम डूंगेजा, थाना पिंगवा, जिला नूंह को गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में आरोपी ने ठगी की वारदात स्वीकार की। उसने बताया कि लोगों को फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से पुराने सिक्कों और नोटों के बदले मोटी रकम दिलाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन प्रोसेसिंग और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे। भरोसा दिलाने के लिए नकदी के बंडल के फर्जी वीडियो भी भेजे जाते थे और बाद में डिलीवरी या पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर अतिरिक्त रकम वसूली जाती थी।
पुलिस ने आरोपी को 15 अप्रैल 2026 को हरियाणा से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाई। 17 अप्रैल को उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई में साइबर सेल खैरागढ़ और थाना छुईखदान पुलिस की अहम भूमिका रही ।
भिलाई से भंडारा तक सड़क होगी चौड़ी, बनेगा ग्राउंड फील्ड सिक्सलेन
राजनांदगांव। भिलाई से भंडारा तक सड़के चौड़ी होगी । इसके लिए एनएच ने शुरूआती दौर का काम शुरू कर दिया है। हाईवे में करीब 162 किमी तक फोर लेने को सिक्सलेन में बदला जाएगा। दुर्घटनाजन्य हाईवे के अस्तित्व में आने से दुर्घटना का ग्राफ गिरेगा, वही छग से महाराष्ट्र तक सफर कम समय में कर सकेगें। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा इसकी तैयार शुरू कर दी है।
नागपुर- भंडारा सड़क को 6-लेन हाईवे में बदलने की बहुप्रतीक्षित परियोजना का काम जल्द ही शुरू होने वाला है। इसे लेकर पहले ही पिछले साल जुलाई माह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की जिसमें 5 जुलाई 2025 के बाद अगले 3-4 महीनों में इस परियोजना पर काम शुरू होने की बात कही थी।
अफसरों ने बताया कि, यह परियोजना नागपुर और भंडारा के बीच भारी ट्रैफिक को ध्यान में रखते हुए शुरू की जा रही है, जो इस मार्ग को 6-लेन में परिवर्तित करेगी। छग और महाराष्ट्र के बीच रोजाना 13 हजार से अधिक कमर्शियल वाहन चलती है। जिसके चलते समय दर समय फोरलेन हाईवे में वाहनों का दबाव अधिक होने से आय दिन दुर्घटना हो रही है। सड़क सिक्सलेन में परिवर्तित होने से कई डेंजर जोन भी समाप्त हो जाएंगे।
हाईवे के दायरे से हटेंगे अतिक्रमण
प्राधिकरण के अफसरों ने बताया कि भिलाई से भंडारा तक सिक्सलेन का सर्वे पहले ही शुरू कर दिया गया था । भिलाई से भंडारा तक मुआवजा का कार्य शुरू कर दिया गया है। अफसरों ने बताया कि, पहले चरण में अतिक्रमण हटाने का कार्य किया जाएगा। बताया जा रहा है कि, प्राधिकरण द्यारा डीपीआर तैयार किया जा रहा है। जिसके बाद इसके लागत की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। प्राधिकरण की माने तो आगामी दो साल में सिक्सलेन का कार्य शुरू किए जाने का टारगेट रखा गया है।
भूमि मुआवजा के बाद आएगी तेजी
एनएच के अफसरों ने बताया कि ट्रेडेसरा से आरंग रायपुर तक बन रहा सिक्सलेन ग्रीनफील्ड के तौर पर तैयार किया जा रहा है। मतलब नए सिरे से इसका निर्माण हो रहा है। जिसके चलते यहां मुआवजा प्रक्रिया में देरी हुई है। जबकि भंडारा हाईवे पहले से तैयार सड़को के अनुसार चौडीकरण का कार्य किया जाएगा। फोरलेन के किनारे इसके लिए पहले ही जगह चिन्हित रहती है। ऐसे में भूमि मुआवजा के ज्यादा प्रकरण नही है। इसलिए कार्य तेजी से किए जाने की बात कही जा रही है।
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