हेमंत शर्मा, इंदौर। अहमदाबाद में पुलिस चेकिंग के नाम पर इंदौर के कारोबारी को जिस तरह रोका गया और परेशान किया गया, उसने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर किए गए ट्वीट के चलते अहमदाबाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू करनी पड़ी।
घटना कारोबारी पंकज परिहार और उनके साथी राघव के साथ
घटना इंदौर के देवास नाका इलाके के कारोबारी पंकज सिंह परिहार और उनके साथी राघव के साथ हुई। पंकज विदेश में पढ़ाई के लिए छात्रों को भेजने का काम करते और उनका ऑफिस अहमदाबाद में भी संचालित है। पंकज के मुताबिक, 11 अप्रैल को वे अहमदाबाद से इंदौर लौट रहे थे। वडोदरा एक्सप्रेस-वे पर चेक पोस्ट के पास पुलिस ने उनकी कार को रूटीन जांच के नाम पर रोक लिया। शुरुआत में सामान्य जांच हुई, लेकिन जब कुछ नहीं मिला तो मामला अचानक बदल गया। पुलिसकर्मियों ने दोनों के मोबाइल छीन लिए, चैट और गैलरी खंगाली, यहां तक कि निजी ऑडियो भी सुने।
‘कबूतरबाजी’ में फंसाने की धमकी दी
जब कुछ संदिग्ध नहीं मिला तो दस्तावेज देखकर उन्हें ‘कबूतरबाजी’ में फंसाने की धमकी दी गई। राघव की डायरी में छात्रों के लोन से जुड़ी एंट्री मिली, जिसे आधार बनाकर दबाव बनाया गया। कहा गया “गलत हो तो बता दो, यहीं सेटल कर देते हैं।” करीब 40 मिनट तक दोनों को सड़क पर रोके रखा गया। आखिर में जब कुछ नहीं मिला, तो ‘खर्चा-पानी’ की मांग सामने आ गई। व्यवसायियों के अनुसार, उन्होंने गुजरात से खरीदे थेपले पुलिसकर्मियों को दिए, तब जाकर उन्हें छोड़ा गया। इंदौर पहुंचने के बाद पंकज ने पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया पर ट्वीट किया, जिसके बाद मामला तेजी से फैल गया।
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ट्वीट के बाद हरकत में आई पुलिस
मामला सामने आते ही अहमदाबाद पुलिस कमिश्नर ने जांच के निर्देश दिए और टीम गठित की गई। टीम ने मौके के फुटेज खंगाले और शुक्रवार को इंदौर पहुंचकर करीब 5 घंटे तक पंकज और राघव के बयान दर्ज किए।


