भिलाईनगर। बीएसपी में पिछले दिनों काम करने के दौरान ठेका श्रमिकों की लगातार मौतों को बीएसपी मैनेजमेंट ने बेहद गंभीरता से लिया है। इन मौतों को सेफ्टी में लापरवाही मानते हुए डीजीएम सहित तीन अफसरों को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी सप्ताह दो अफसरों को पूर्व में सस्पेंड किया जा चुका है। ठेका श्रमिकों की मौत के मामले में बीएसपी मैनेजमेंट की यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।
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बीएसपी के सिंटर प्लांट 2 के डीजीएम कमल कुमार केसरवानी व एजीएम आनंद कुमार वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया है। एसपी 3 के असिस्टेंट मैनेजर रीमिश किंडा को भी सस्पेंड किया गया है। इसी सप्ताह पूर्व में असिस्टेंट मैनेजर देवेन्द्र कुमार कश्यप व असिस्टेंट मैनेजर लेखराम आडिल को भी सस्पेंड किया जा चुका है। इस तरह सात दिनों के अंदर सेफ्टी में लापरवाही मामले में मैनेजमेंट ने पाँच अफसरों को सस्पेंड किया है। यह ठेका श्रमिकों की मौत के मामले में एक तरह से अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है।

मैनेजमेंट सेफ्टी में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा
सेल मैनेजमेंट के सेफ्टी पर कड़े रुख को देखते हुए बीएसपी सहित सभ यूनिटों में सेफ्टी को लेकर एक तरह से दबाव बढ़ गया है। यह तय है कि सेफ्टी के मामले में अब मैनेजमेंट किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा। खासकर काम के दौरान हादसे में किसी की मौत होती है तो इसके लिए जिम्मेदार अफसर बख्शे नहीं जाएंगे। अब तक मेंटेनेंस मामले में कई बार प्रोडक्शन के दबाव के चलते बगैर शटडाउन के काम कराया जाता था। माना जा रहा है कि अब आगे से ऐसा नहीं होगा।
सेल और बीएसपी मैनेजमेंट सेफ्टी के मामले में गंभीर
असल में सेल और बीएसपी मैनेजमेंट ने सेफ्टी में लापरवाही को बहुत गंभीरता से लिया है। असल में ठेका श्रमिकों की लगातार मौतों ने भिलाई से लेकर नईदिल्ली तक चिंता बढ़ा दी। इसका नतीजा यह हुआ कि सबसे पहले 23 सितंबर को सेल के डायरेक्टर पर्सनल केके सिंह ने यहां आकर वर्तमान सुरक्षा प्रणालियों की समीक्षा की। उन्होंने ब्लास्ट फर्नेस के दुर्घटनास्थल का मौका मुआयना किया जहां ठेका श्रमिक की मौत हुई थी।
अफसरों की बैठक लेकर उन्होंने समझाईश दी कि दुर्घटनाओं और मौतों को हर हाल में रोका जाए। सेफ्टी के मामले में लापरवाही हरगिज न बरती जाए। इसके बाद 26 सितंबर को सीएमडी डॉ. एके पंडा पहुँचे। उन्होंने कलामंदिर में सेफ्टी के मुद्दे पर लार्ज ग्रुप इंटरैक्शन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि संयंत्र के अंदर कोई भी जनहानि न हो यह सुनिश्चित करें। ऐसा पहली बार हुआ कि संयंत्र के अंदर दुर्घटना में मौतों पर कार्पोरेट आफिस से लगातार दो बड़े अफसर हादसे के तुरंत बाद भिलाई आए।
भिलाई निगम में पेवर ब्लॉक घोटाले पर होगी कार्रवाई
भिलाईनगर। नगर निगम भिलाई की परियोजना शाखा द्वारा कराए गए पेवर ब्लॉक के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत की संयुक्त जांच में पुष्टि हो गई है। लोक निर्माण विभाग दुर्ग संभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा की संयुक्त जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। लोकसभा सांसद दुर्ग विजय बघेल के माध्यम से 06 दिसंबर 2025 को आवेदक संतोष मौर्य, भाजपा जिला महामंत्री, पूर्व पार्षद वार्ड-15 अंबेडकर नगर द्वारा शिकायत की गई थी कि निगम की परियोजना शाखा में पेवर ब्लॉक के कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। इस पर कलेक्टर ने संयुक्त जांच के आदेश दिए थे।
जांच में क्या मिला
कार्यपालन अभियंता, लोक निर्माण विभाग ने कलेक्टर दुर्ग को सौंपे गए जांच प्रतिवेदन के अनुसार निगम के 29 अनुबंधों की मौके पर जांच की गई। इसमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा मौके पर कम पाई गई। एनेक्जर-1 के कॉलम 8 में दर्शाई गई कम मात्रा के अनुसार 16,85,457 रुपए का अधिक भुगतान माप पुस्तिका में दर्ज पाया गया। जांच के दौरान 9 अधिकारी उपस्थित थे, जिसमें पीडब्ल्यूडी के अनुविभागीय अधिकारी बी.एल.पीसदा, उपअभियंता मनीष तिवारी, सविता प्रसाद और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के प्रतीक मसीह, राकेश साहू तथा निगम के सहायक अभियंता श्वेता वर्मा, उपअभियंता अर्पित वंजारे, श्वेता महेश्वर, रीमा जांबुलकर शामिल थे।
कलेक्टर ने दिए कठोर कार्रवाई के आदेश
जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी दुर्ग अभिजीत सिंह ने भिलाई निगम के आयुक्त को आदेशित किया है। उक्त समस्त कार्यों, स्थलों पर माप दर्ज करने वाले दोषी अभियंताओं तथा अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं आधिक्य राशि की वसूली उनसे करते हुए प्रतिवेदन 15 दिवस के भीतर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
उप अभियंता ने दिया स्पष्टीकरण
कारण बताओ नोटिस मिलने पर निगम के जोन 1 के उपअभियंता पुरुषोत्तम सिन्हा ने मुख्य अभियंता को लिखित स्पष्टीकरण दिया है। वार्ड 06 नेहरू नगर चौक प्रियदर्शिनी परिसर में वेंडिंग जोन में पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य के संबंध में उनका कहना है कि माप पुस्तिका में 378.56 वर्ग मीटर और जांच में 375.20 वर्ग मीटर पाया गया, अंतर 3.36 वर्ग मीटर का है, जिसकी राशि 2123.00 रुपये है। वर्तमान में पुनः माप पर 33.35 मी. गुणा 11.35 मी. 378.52 वर्ग मी. पेवर ब्लॉक लगा पाया गया हैं, जो एमबी के अनुरूप है। माप, वास्तविक प्रगति और तत्कालीन स्थल परिस्थिति के अनुसार की गई थी। माप की विधि और वर्तमान तिथि में अंतर, कार्य के निष्पादन परिवर्तन के कारण मामूली अंतर संभव है। किसी ठेकेदार को अनुचित लाभ नहीं पहुंचाया, न निगम को क्षति पहुंचाई जांच दल ने बिना सूचना के उनकी अनुपस्थिति में मापांकन किया, वे संयुक्त पुनः सत्यापन के लिए तैयार हैं।
सीएसवीटीयू की नई संबद्धता सूची जारी, एक नया कॉलेज जुड़ा तो कई संस्थानों पर संकट के संकेत
भिलाईनगर। छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय भिलाई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए संबद्ध इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट संस्थानों की सूची जारी कर दी है। सूची में जहां नए शैक्षणिक संस्थान के जुड़ने से उच्च शिक्षा के विस्तार की तस्वीर दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर कई कॉलेजों की प्रवेश क्षमता शून्य होने और एक संस्थान के पूर्ण रूप से बंद होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे राज्य के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में संस्थानों की बदलती स्थिति का संकेत मिलता है।
सूची के अनुसार, सत्र 2026-27 में 15 इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट संस्थान संबद्ध हैं। इनमें भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी के भिलाई हाउस जीई रोड दुर्ग और केंद्री नया रायपुर स्थित संस्थान, चौकसे इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर, छत्रपति शिवाजी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी बालोद रोड दुर्ग, क्रिश्चियन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी भिलाई, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी रायपुर, जेके इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग बिलासपुर, कृष्णा इंजीनियरिंग कॉलेज खम्हरिया दुर्ग, लक्ष्मीचंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी बिलासपुर, रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी मंदिर हसौद रायपुर, आरएसआर रूंगटा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी कोहका भिलाई, एसएसआईपीएमटी रायपुर, दिशा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नालॉजी रायपुर, टैगोर कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट बिलासपुर तथा सीएम दुबे पोस्ट ग्रेज्युएट कॉलेज बिलासपुर शामिल हैं।
चाणक्य एकेडमी को मिली नई शुरुआत
सूची में चाणक्य एकेडमी टाटीबंध-सरोना, रायपुर को 2026-27 से नए कॉलेज के रूप में शामिल किया गया है। यानी तकनीकी एवं प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में एक नया संस्थान विद्यार्थियों के लिए विकल्प के रूप में सामने आया है।
पांच कॉलेजों में प्रवेश क्षमता शून्य
सूची का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन संस्थानों से जुड़ा है, जिन्हें प्रोग्रेसिव क्लोजर की प्रक्रिया में रखा गया है। इन संस्थानों के लिए 2026-27 में इंटेक कैपेसिटी शून्य दर्शाई गई है। इसमें रायपुर के दो, भिलाई के दो तथा एक दुर्ग के कॉलेज है। जबकि सूची में युगांतर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी एंड मैनेजमेंट रामधीन मार्ग राजनांदगांव को 2026-27 से पूर्ण रूप से बंद किए जाने की जानकारी दी गई है।
बीएसपी टाउनशिप पर 1920 करोड़ का संपत्तिकर बकाया
भिलाईनगर। नगर निगम भिलाई ने भिलाई इस्पात संयंत्र क्षेत्र के भवन / भूमियों पर बकाया संपत्तिकर का 10 साल का ब्यौरा जारी किया है। 2016-17 से 2025-26 तक कुल बकाया 1920.25 करोड़ बताया गया है। निगम के अनुसार इस अवधि में कुल 432.51 करोड़ का कर आरोपित किया गया, जिसमें संपत्तिकर 376.50 करोड़, शिक्षाउपकर 37.88 करोड़ और समेकित कर 18.13 करोड़ शामिल है। इसके विरुद्ध बीएसपी ने केवल 87.28 करोड़ जमा किया। इस तरह मूल अंतर 345.23 करोड़ रहा। इस अंतर पर 5 गुना शास्ति के रूप में 1545.03 करोड़ और 29.99 करोड़ अन्य बकाया जोड़ने पर कुल राशि 1920.25 करोड़ होती है।
आज तय होगा बीएसपी कर्मियों का बोनस
भिलाईनगर। सेल मैनेजमेंट ने बोनस के मुद्दे पर एनजेसीएस कोर कमेटी के सदस्यों को 01 अक्टूबर को नईदिल्ली बुलाया है। देखना यह है कि तय फार्मूले के हिसाब से कर्मियों को 30200 रु. ही मिलता है, या फिर इसमें यूनियन नेता कुछ बढ़ोतरी करा पाते हैं।
सेल कर्मियों के लिए गुरुवार को दोपहर 01 बजे से एनुअल सेल परफार्मेंस लीक्ड इंसेंटिव स्कीम के तहत बोनस के लिए बैठक इंडिया हैबिटेट सेंटर नईदिल्ली में शुरु होगी। चूंकि फार्मूला पहले से तय है इसलिए बोनस की राशि की गणना सेल मैनेजमेंट पहले ही कर चुका होगा। वह बोनस की राशि की जानकारी यूनियन नेताओं को देगा। फार्मूले के हिसाब से यह राशि राउंड फिगर में 30200 रु. होती है। इसमें यूनियन नेता कितनी और बढ़ोतरी करा पाते हैं यह देखना होगा। बोनस को लेकर यूनियन नेता सेल मैनेजमेंट पर दबाव बनाने की स्थिति में नहीं हैं। यह सेल मैनेजमेंट की मेहरबानी पर निर्भर करेगा कि वह कितनी राशि देना तय करता है।
जिला अस्पताल का सीटी स्कैन मशीन खराब, भटक रहे मरीज
दुर्ग। जिला अस्पताल दुर्ग में आए दिनों कोई न कोई समस्या मरीजों के लिए खड़ी हो रही है। कभी चिकित्सकों की कमी, तो कभी जांच किट की सप्लाई नहीं होना। अब की बार सिटी स्कैन मशीन की समस्या आई है। बताया जा रहा है कि सीटी स्कैन मशीन खराब हो गई है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
बता दें कि जिला अस्पताल में अमूमन गरीब तपके के ज्यादातर मरीज इलाज करवाने आते हैं। सीटी स्कैन मशीन खराब होने से ये निजी अस्पतालों में जांच करवाने में बेबस नज़र आते हैं। लिहाजा ये सीटी स्कैन मशीन की खराबी ठीक होने का बेसब्री से इंतजार करने लगते हैं। खासकर सिर में गंभीर चोट लगे मरीजों के लिए सीटी स्कैन जरूरी होता है। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल होने की वजह से मरीजों की संख्या भी बहुत ज्यादा रहती है। आपात चिकित्सा की सुविधा होने से मरीजों की संख्या बढ़ी रहती है। चिकित्सकों के मुताबिक औसतन प्रतिदिन 20 से 25 मरीजों का सीटी स्कैन किया जाता है। इस वजह से इस मशीन पर बहुत अधिक लोड रहता है।
जाहिर है मशीन पर अत्यधिक दबाव से खराबी भी होना सामान्य घटना है। इसके पहले भी यह मशीन कई बार खराब हो चुकी है। जिला अस्पताल दुर्ग के सिविल सर्जन आशीषन मिंज ने बताया कि मशीन को सुधारने टेक्नीशियन को बुलाया गया है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि एक- दो दिनों में मशीन ठीक कर ली जाएगी। बेहद जरूरी होने पर कुछ मरीज बाहर से सीटी स्कैन भी करा लेते हैं, ताकि उनका इलाज सुचारू रूप से चल सके।
पाइप लाइन के बावजूद टैंकर खरीदी पर उठ रहे सवाल
राजनांदगांव। गांव-गांव तक पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपए की लागत से पाइपलाइन बिछाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर राजनांदगांव और डोंगरगढ़ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में पानी टैंकरों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि दोनों जनपद क्षेत्रों में 80 से अधिक टैंकर खरीदे गए हैं और इनकी खरीदी में बाजार मूल्य की तुलना में काफी अधिक राशि का भुगतान किया गया। डेढ़ लाख टैंकर, तीन लाख से अधिक भुगतान का आरोप शिकायत से जुड़े लोगों का आरोप है कि जिन पानी टैंकरों की बाजार कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए बताई जा रही है, उनकी खरीदी करीब तीन लाख रुपए अथवा उससे अधिक की दर पर की गई। यदि दस्तावेजों और बाजार दर की जांच में यह अंतर सही पाया जाता है तो पंचायतों की राशि के उपयोग को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आ सकता है।
जनपद सीईओ की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
राजनांदगांव और डोंगरगढ़ जनपद पंचायत में टैंकर खरीदी को लेकर शिकायतों के बाद जांच की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मामले की जांच को लेकर जनपद स्तर पर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में पूरी खरीदी प्रक्रिया के दस्तावेज सार्वजनिक कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है।
टैंकर खरीदी में कथित अनियमितता के पीछे एक कांग्रेस नेत्री की भूमिका होने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का जवाब और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इस आरोप की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। जनपद पंचायत के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टैंकर खरीदी में कुछ स्थानों पर दो चक्के के टैंकर खरीदा गया है और 1 बिल चार चक्के का पास किया गया है। जांच होने पर फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा हो सकता है।
इन बिंदुओं की जांच से सामने आएगी वास्तविकता
टैंकरों की वास्तविक बाजार कीमत, पंचायतवार खरीदी दर, सप्लायरों के नाम, वर्क ऑर्डर / खरीदी आदेश, बिल भुगतान की गई राशि, जीईएम प्रक्रिया, टैंकरों की क्षमता और भौतिक सत्यापन की जांच अहम होगी। दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीदी में वास्तव में वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।
सप्लायरों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि अलग-अलग ग्राम पंचायतों द्वारा टैंकरों की खरीदी के बाद सप्लायरों को भुगतान किया गया। अब टैंकरों की वास्तविक कीमत, खरीदी की प्रक्रिया, सप्लायरों का चयन, पंचायतवार भुगतान और भौतिक सत्यापन की जांच की मांग की जा रही है।
इंजीनियरों के तबादले पर जनपद सदस्यों में एकजुटता
राजनांदगांव। जनपद पंचायत राजनांदगांव में 30 सितंबर को दोपहर 12 बजे साधारण सभा की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 25 में से 16 सदस्य उपस्थित रहे, जबकि 9 सदस्य अनुपस्थित थे। बैठक के दौरान इंजीनियरों के तबादले का मुद्दा प्रमुखता से उठा । उपस्थित सभी सदस्यों ने एक स्वर में इंजीनियरों का तबादला रोकने की मांग की।
इंजीनियरों के तबादले को लेकर सदस्यों की एकजुटता से जनपद अध्यक्ष की स्थिति बैठक में अलग-थलग नजर आई। बताया जा रहा है कि इंजीनियरों के तबादले की प्रक्रिया जनपद अध्यक्ष की अनुशंसा के बाद थी। ऐसे में अब अधिकांश सदस्यों द्वारा तबादला रोकने की मांग किए जाने से इस मुद्दे पर जनपद पंचायत के भीतर मतभेद सामने आए हैं बैठक में सदस्यों ने इंजीनियरों के तबादले से संबंधित कारणों और प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
सदस्यों का कहना था कि तबादले से पंचायतों के विकास एवं निर्माण कार्य प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने तबादला आदेश पर पुनर्विचार कर पूर्ववत व्यवस्था बनाए रखने की मांग की। साधारण सभा में 16 सदस्यों की मौजूदगी में इंजीनियरों के तबादले के विरोध में एकजुटता दिखना जनपद पंचायत की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सदस्यों की मांग पर प्रशासन और संबंधित विभाग क्या निर्णय लेते हैं।
नक्सली हिडमा के समर्थन वाले गीत पर कांग्रेस नेता ने किया नृत्य
राजनांदगांव। नक्सली हिड़मा के समर्थन वाली गीत पर कांग्रेस के एक नेता द्वारा नृत्य करने का आरोप लगाया गया है। भाजयुमो ने इस मामले को लेकर कार्यवाही की मांग की है। उन्होने इस मसले में जिला प्रशासन को ज्ञापन भी दिया है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष चिंटू सोनकर ने झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस की कथनी और करनी पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं राहुल गांधी एवं भूपेश बघेल से स्पष्ट जवाब मांगा है। उन्होंने कांग्रेस के राजनांदगांव जिला पदाधिकारी देवेश वैष्णव से जुड़े वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच तथा जांच में आरोप सही पाए जाने पर एफआईआर एवं संगठनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
चिंटू सोनकर ने कहा कि एक ओर कांग्रेस झीरम घाटी के शहीदों के लिए न्याय की बात करती है और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाती है, वहीं दूसरी ओर उसके जिला पदाधिकारी पर कुख्यात नक्सली हिड़मा के समर्थन से जुड़े गीत पर सार्वजनिक रूप से नृत्य करने का आरोप सामने आया है। उन्होंने कहा कि इसकी सत्यता की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
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