नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन का समर्थन करने के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने अब पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी है। बुधवार को केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित है। उनका दावा है कि कंपनियों ने इस संबंध में कोई लिखित जवाब नहीं दिया।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि कंपनियां केंद्र सरकार के दबाव में इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपना रही हैं। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के मन में E20 ईंधन को लेकर कई सवाल हैं और उन्हें स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि पुराने वाहनों पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है। AAP प्रमुख ने कहा कि यदि ऑटोमोबाइल कंपनियों के पास इस विषय पर स्पष्ट जानकारी है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि लाखों वाहन मालिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके वाहनों के लिए कौन-सा ईंधन उपयुक्त है।
बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल को लागू करने के लिए केंद्र सरकार दबाव की राजनीति कर रही है और वाहन मालिकों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह सवाल पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित उनकी गाड़ियों में E20 पेट्रोल का उपयोग सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में किसी भी कंपनी ने उन्हें लिखित जवाब नहीं दिया। उन्होंने कंपनियों से यह भी पूछा था कि यदि वे E20 के उपयोग को सुरक्षित बताते हैं, तो क्या ईंधन के कारण वाहन में किसी प्रकार की खराबी आने पर उसकी भरपाई कंपनी करेगी। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि E20 के उपयोग से यदि वाहन का माइलेज कम होता है, तो उसके नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा।
केजरीवाल ने कहा कि किसी भी कंपनी ने इन सवालों का लिखित जवाब देने की हिम्मत नहीं दिखाई। हालांकि, उनका दावा है कि नौ ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारियों से उनकी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें इस विषय पर चर्चा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि वाहन मालिकों को E20 नीति के संभावित प्रभावों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि जब तक कंपनियां और सरकार इन सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब नहीं देतीं, तब तक लोगों की चिंताएं बनी रहेंगी।
अरविंद केजरीवाल ने E20 पेट्रोल को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि ऑटोमोबाइल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे निजी तौर पर स्वीकार किया है कि E20 ईंधन को लेकर तकनीकी चिंताएं मौजूद हैं, लेकिन वे सरकार के कथित दबाव के कारण सार्वजनिक रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं। केजरीवाल ने कहा कि 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से उन्होंने यह सवाल पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल पूरी तरह सुरक्षित है। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि यदि E20 के कारण वाहन में खराबी आती है या माइलेज कम होता है, तो उसकी जिम्मेदारी और हर्जाना कौन देगा।
E20 के खिलाफ टाउनहॉल रोकने की कोशिश का आरोप
केजरीवाल ने कहा कि इथेनॉल पेट्रोल से जुड़ी कई चिंताएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने दावा किया कि इथेनॉल की लागत अधिक है, इससे वाहन का माइलेज कम हो सकता है और इससे विदेशी मुद्रा बचत के दावों पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न रिपोर्टों और लेखों में इथेनॉल उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभावों तथा किसानों को होने वाले वास्तविक लाभ को लेकर भी चर्चा की गई है। केजरीवाल ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इथेनॉल को लेकर इतने सवाल मौजूद हैं तो सरकार इसकी तरफ इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की जरूरत है और इसी उद्देश्य से शनिवार को एक टाउनहॉल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
E20 शांति से वापस ले लो, नहीं तो जनता करवा लेगी
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि E20 के खिलाफ प्रस्तावित टाउनहॉल कार्यक्रम को रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने वालों को अनुमति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के नाम पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि जनता पुलिस के डर से अपनी आवाज उठाना बंद नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हाल के आंदोलनों ने यह साबित कर दिया है कि लोग अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करने के लिए तैयार हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि बता दीजिए किस-किस बात की परमिशन लेनी है। क्या खाने की भी परमिशन लेनी है, पीने की भी, नहाने की भी और सोने की भी? प्रधानमंत्री जी, पुलिस की धमकी मत दीजिए। जनता ने दिखा दिया है कि वह आपकी पुलिस से नहीं डरती।”
उन्होंने आगे कहा, “डंडे ही तो मारोगे, जेल ही तो भेजोगे। यह सब करके देख लिया गया है, लेकिन देश की जनता अपनी बात पर कायम रही। E20 को लेकर भी जनता की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” केजरीवाल ने केंद्र सरकार से E20 नीति को वापस लेने की मांग दोहराते हुए कहा, “E20 तो प्रधानमंत्री जी आपको वापस लेना पड़ेगा। शांति से वापस ले लीजिए, नहीं तो जनता करवा लेगी।”
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