कुमार इंदर, जबलपुर। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा जबलपुर नगर निगम के प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद अब इस मामले में नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। EOW की टीम ने अब ‘नर्मदा सफाई समिति’ के खिलाफ अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और समिति के कार्यालय को पूरी तरह से सील कर दिया है।
नर्मदा सफाई समिति में हिस्सेदारी की होगी जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी को अंदेशा है कि इस पूरी सफाई समिति में भ्रष्ट अधिकारी पोला राव की बेनामी हिस्सेदारी है। EOW अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रहा है कि इस समिति का असली मालिक कौन है, इसका संचालन कैसे हो रहा था और इसका वित्तीय ढांचा क्या है। कार्यालय को सील करने के बाद समिति के स्वामित्व, संचालन, ठेके और पैसों के लेनदेन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जब्त कर जांच के दायरे में ले लिया गया है।
20 से 25 वार्डों में सफाई का ठेका
जांच में यह भी सामने आया है कि इस नर्मदा सफाई समिति का नगर निगम के भीतर काफी बड़ा नेटवर्क था। समिति के पास नगर निगम के 5 अलग-अलग जोनों के लगभग 20 से 25 वार्डों में सफाई का ठेका है। EOW अब इस बात की भी तफ्तीश कर रहा है कि इतने बड़े पैमाने पर ठेके हासिल करने के लिए किन नियमों को ताक पर रखा गया और इसमें पोला राव ने अपने पद का कितना दुरुपयोग किया।
सुपरवाइजर से प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी बनने का सफर
इस पूरे मामले का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू पोला राव का संगठनात्मक ढांचा है। दस्तावेजों के अनुसार, पोला राव का असल और मूल पद केवल एक सुपरवाइजर का है। लेकिन अपनी रसूख और भ्रष्टाचार के बल पर वह नगर निगम में प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी जैसी बड़ी और मलाईदार कुर्सी पर काबिज होने में कामयाब रहा।
छापेमारी में मिली थी ₹3 करोड़ की काली कमाई
गौरतलब है कि इससे पहले पोला राव के ठिकानों पर हुई EOW की शुरुआती छापेमारी में करीब 3 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ था। इसमें भारी मात्रा में नकदी, सोने-चांदी के जेवरात और कई संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए थे। अब सफाई समिति का दफ्तर सील होने के बाद इस मामले में नगर निगम के कुछ अन्य अधिकारियों और ठेकेदारों के नाम भी सामने आने की उम्मीद है।


