Modi Government Big Decision on EPF: कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (EPF) को पर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने PF के लिए बेसिक सेलरी लिमिट ₹15000 से बढ़ाकर ₹25 हजार कर दी है। अब कंपनियों को 25 हजार रुपए तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा। मोदी कैबिनेट की बैठक में पीएफ पर बेसिक सैलरी लिमिट बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इससे 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पहले 15 हजार रुपए से ज्यादा बेसिक सेलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना या न कटना उनकी मर्जी पर डिपेंड करता था। नए आदेश से 25 हजार रुपए की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी और रिटायरमेंट पर बड़ा फंड मिलेगा। इस पर भारत सरकार का अनुमानित खर्च हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये होगा।

आसान भाषा में समझें

आसान भाषा में समझें तो अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + महंगाई भत्ता (DA) अगर ₹25,000 या उससे कम है, तो कंपनी को उस कर्मचारी को EPF में शामिल करना अनिवार्य है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹25,000 या उससे कम है, तो उसे EPF के दायरे में शामिल करना कंपनी के लिए जरूरी होगा। वहीं, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी + DA ₹25,000 से ज्यादा है और वह पहली बार नौकरी कर रहा है यानी पहले से EPF का सदस्य नहीं है, तो उसके लिए EPF में शामिल होना अनिवार्य नहीं होगा। ऐसे कर्मचारी के पास EPF लेने या नहीं लेने का विकल्प रहेगा।

यहां एक बात यह भी समझना जरूरी है कि EPF में अनिवार्य योगदान की वेतन सीमा ₹15,000 ही रहेगी। यानी कंपनी और कर्मचारी का अनिवार्य EPF योगदान ₹15,000 तक की सैलरी के हिसाब से ही तय होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹20,000 है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा, लेकिन अनिवार्य योगदान ₹15,000 की सीमा तक ही होगा।

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