राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के अध्यक्ष हरजीत सिंह ग्रेवाल ने पश्चिम बंगाल की टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए धार्मिक भेदभाव के आरोपों की जांच पर अपनी रिपोर्ट दी है. सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ धर्म के आधार पर भेदभाव के लगाए गए आरोपों को जांच में पूरी तरह खारिज कर दिया गया है.

NCM के मुताबिक, तीनों अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है. आयोग ने शिकायत के सोर्स और तथ्यों की पुलिस जांच की सिफारिश की है.

पश्चिम बंगाल से TMC सांसद महुआ मोइत्रा की ओर से लगाए गए धार्मिक भेदभाव के आरोपों पर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अपनी रिपोर्ट दी है.

आयोग ने संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए, जिन्होंने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि उनकी कोई शिकायत नहीं है. दरअसल, सांसद महुआ मोइत्रा ने 16 सितंबर को आयोग में शिकायत दी थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान तीन वरिष्ठ मुस्लिम अधिकारियों को सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों से अलग रखा गया.

महुआ मोइत्रा ने उन तीन अधिकारियों के नाम सिलिगुड़ी के पुलिस कमिश्नर सैयद वकार रजा, एसटीएफ के डीजी जवेद शमीम और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के अतिरिक्त मुख्य सचिव खलील अहमद बताया. मामला जुलाई और अगस्त में शाह के पश्चिम बंगाल दौरे से जुड़ा था.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद महुआ मोइत्रा की इस शिकायत को राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित और निराधार बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है. आयोग ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप तीनों अधिकारियों के बयानों से मेल नहीं खाते. तीनों अधिकारियों ने धार्मिक भेदभाव से साफ इनकार किया है.

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