हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला इंदौर से सामने आया है। खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बिस्तरों वाले सिविल अस्पताल को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। अस्पताल के लिए पहले जमीन आवंटित हुई, फिर स्टाफ भी स्वीकृत कर दिया गया, लेकिन छह साल बाद भी अस्पताल की इमारत का निर्माण शुरू तक नहीं हो सका।

Lalluram.com के पास मौजूद दस्तावेज इस पूरे मामले की अलग ही कहानी बयां करते हैं। दस्तावेजों के मुताबिक 7 सितंबर 2019 को अस्पताल के लिए जमीन का आवंटन किया जा चुका था। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी के अनुसार, जमीन मिलने के बाद 18 महीने के भीतर अस्पताल का निर्माण पूरा होना था, लेकिन आज तक भवन तैयार नहीं हुआ।

पहले जमीन मिली, फिर स्टाफ स्वीकृत हुआ

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में खजराना सिविल अस्पताल के लिए 100 बिस्तरों की स्वीकृति दी गई। इसके साथ ही अस्पताल संचालन के लिए 87 पद भी मंजूर किए गए, जिनमें विशेषज्ञ चिकित्सक, मेडिकल ऑफिसर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि अस्पताल का भवन नहीं होने के बावजूद इन पदों पर लगातार पदस्थापन और तबादले किए जाते रहे। 15 जून 2026 को भी एक लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर की गई।

CMHO ने क्या कहा?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने स्वीकार किया कि यह मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से लगातार इस विषय को जिला प्रशासन और शासन के संज्ञान में लाया जा रहा है।

डॉ. हसानी के मुताबिक, उनके स्तर से लगातार पत्राचार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में इस विषय पर क्या कार्रवाई हुई या क्यों नहीं हुई, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उनके अनुसार, जमीन आवंटन के बाद तय समय में निर्माण होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

डिप्टी सीएम के बयान पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के बयान से सामने आया। उन्होंने कहा कि अस्पताल का निर्माण इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि उपयुक्त जमीन नहीं मिल सकी और जमीन की तलाश जारी है। लेकिन lalluram.com के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि 7 सितंबर 2019 को जमीन का आवंटन पहले ही किया जा चुका था। यानी एक ओर सरकारी दस्तावेज जमीन आवंटित होने की पुष्टि कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग के मंत्री जमीन तलाशने की बात कह रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सही स्थिति क्या है?

छह साल में आखिर हुआ क्या?

यदि जमीन का आवंटन 2019 में हो चुका था और निर्माण 18 महीने में पूरा होना था, तो फिर छह साल तक निर्माण क्यों नहीं हुआ?

यदि निर्माण नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?

क्या शासन को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं दी गई?

या फिर पूरा मामला फाइलों में ही दबाकर रखा गया?

तीन लाख आबादी अब भी इंतजार में

खजराना, मुसाखेड़ी, तेजाजी नगर, बिचौली हप्सी और आसपास के तीन लाख से अधिक लोग आज भी बेहतर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एमवाय अस्पताल, एमटीएच और जिला अस्पताल पर निर्भर हैं। यदि यह 100 बिस्तरों वाला अस्पताल समय पर बन जाता तो इन अस्पतालों पर मरीजों का दबाव काफी कम हो सकता था।

अब सबसे बड़े सवाल

  • 2019 में जमीन आवंटित होने के बावजूद निर्माण क्यों नहीं हुआ?
  • 2020 में स्टाफ स्वीकृत करने की इतनी जल्दबाजी क्यों हुई?
  • अस्पताल नहीं था तो उसके नाम पर वर्षों तक पदस्थापन क्यों किए गए?
  • मंत्री को जमीन आवंटन की जानकारी क्यों नहीं थी?
  • आखिर इस छह साल की देरी और लापरवाही की जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

सरकारी फाइलों में खजराना का 100 बिस्तरों वाला अस्पताल वर्षों पहले तैयार हो चुका है, लेकिन जमीन पर आज भी सिर्फ इंतजार खड़ा है। यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा और सबसे असहज सच है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m