फरीदाबाद। शहर में डंपिंग यार्ड को लेकर विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। सेक्टर-56 के प्रतापगढ़ में डंपिंग यार्ड की क्षमता बढ़ाने के फैसले के खिलाफ बुधवार को भारी हंगामा देखने को मिला। पार्षद मुकेश डागर की अगुवाई में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग वाहनों में सवार होकर केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर के कार्यालय पहुंचे और फैसले का पुरजोर विरोध किया। इस दौरान स्थिति उस वक्त तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने मंत्री की गाड़ी घेर ली, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर लोगों को हिरासत में ले लिया।

मंत्री के आश्वासन के बाद भी नहीं माने लोग

प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों ने केंद्रीय राज्यमंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि प्रतापगढ़ के साथ-साथ शहर के सात अन्य कलेक्शन पॉइंट्स पर भी प्रोसेसिंग सिस्टम लगाया जाएगा और छह महीने के भीतर वहां जमा कूड़े का निस्तारण कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रतापगढ़ में केवल एनआईटी क्षेत्र का ही कूड़ा आएगा। हालांकि, प्रदर्शनकारी इन बातों से संतुष्ट नहीं हुए। जब मंत्री कार में बैठकर ऑफिस से निकलने लगे, तो लोगों ने उनकी गाड़ी घेर ली और नारेबाजी शुरू कर दी। मामला गरमाता देख मंत्री वापस ऑफिस के भीतर चले गए।

पुलिस ने थाने पहुंचाया, पूर्व विधायक ने छुड़ाया

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को दो बसों में बैठाकर सेक्टर-31 थाने पहुंचा दिया। इस घटना की सूचना मिलते ही पूर्व विधायक नीरज शर्मा सेक्टर-31 थाने पहुंच गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से तीखी बहस की और इसके बाद लोगों को अपने साथ थाने से छुड़ाकर ले गए। नीरज शर्मा ने आरोप लगाया कि भांकरी में पुलिस के साथ झड़प के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जबकि प्रतापगढ़ के लोगों को जबरन थाने लाया गया। वहीं, थाना प्रभारी सतबीर सिंह के मुताबिक, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को थाने लाया गया था और कुछ देर बाद सभी को छोड़ दिया गया।

प्रतापगढ़ में क्षमता 750 टन करने की है योजना

उल्लेखनीय है कि प्रतापगढ़ में कूड़ा प्रोसेसिंग को लेकर पहले से ही विरोध चल रहा है। मंगलवार को केंद्रीय राज्यमंत्री ने नगर निगम अधिकारियों को यहां प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए थे। फिलहाल प्रतापगढ़ और मुजेड़ी में 150-150 टन प्रतिदिन कूड़ा प्रोसेस करने की व्यवस्था है, जिसे प्रतापगढ़ में बढ़ाकर 750 टन प्रतिदिन करने की योजना है। इसी फैसले के विरोध में स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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