राकेश कथूरिया, कैथल. खुराना रोड स्थित डंपिंग यार्ड के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने मोर्चा खोल दिया है। धरना स्थल पर आयोजित बैठक में किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा रोष जाहिर किया। इस बैठक की अध्यक्षता महेंद्र सिंह रामगढ़ ने की, जबकि संचालन जसवीर सिंह ने किया। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते डंपिंग यार्ड को यहां से नहीं हटाया गया, तो वे एक बड़े आंदोलन की राह पर निकल पड़ेंगे।

बदबू और बीमारी से बेहाल ग्रामीण

संयुक्त किसान मोर्चा के वक्ताओं का कहना है कि खुराना और इसके आसपास के दर्जनों गांवों के लोग डंपिंग यार्ड से निकलने वाली सड़न और बदबू से त्रस्त हैं। हालत यह है कि लोगों का जीना दूभर हो गया है और बीमारियां फैलने का डर भी लगातार बना हुआ है। किसानों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन लोगों की जायज मांग को सुनने के बजाय पुलिस के जरिए उन्हें डराने का काम कर रहा है।

सरकारी नीतियों के खिलाफ बढ़ता आक्रोश

बैठक के दौरान किसानों ने देश की सरकार की नीतियों को जनविरोधी करार दिया। किसान नेताओं ने कहा कि अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील और मुक्त व्यापार समझौता खेती और पशुपालन के लिए घातक साबित होगा। इससे अमेरिका का सस्ता अनाज और दूध से बने उत्पाद भारतीय बाजार में आएंगे, जिससे स्थानीय किसान और पशुपालक बर्बाद हो जाएंगे।

निजीकरण पर भी चिंता

किसानों ने बिजली विभाग के निजीकरण पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उनका तर्क है कि बिजली का काम निजी हाथों में जाने से किसानों को मिलने वाली सब्सिडी और छूट खत्म हो जाएगी, जिससे खेती की लागत और बढ़ जाएगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ कहा है कि वे अपनी खेती और आजीविका बचाने के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने के लिए तैयार हैं। प्रशासन को जल्द ही इस समस्या का समाधान करना होगा।

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