FATF On Pakistan: धन शोधन (Money Laundering) और आतंकवादी वित्तपोषण (Terrorist Financing) पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यदल यानी एफएटीएफ (Financial Action Task Force) पाकिस्तान पर मेहरबान है। इसी का असर है कि खुलेआम आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान पर FATF कोई एक्शन नहीं ले रहा है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में FATF की चार दिवसीय प्लेनरी बैठक में FATF ने पाकिस्तान में संचालित वैश्विक आतंकी संगठनों के डिजिटल माध्यमों से की जा रही फंडिंग के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की है। साथ ही 2030 तक खुली छूट भी दे दी है।

अब 31 मार्च 2029 तक ये ग्रुप पाकिस्तान का मूल्यांकन पूरा करके रिपोर्ट जमा करेगा। वहीं साल 2030 की प्लेनरी में इस मूल्यांकन रिपोर्ट पर चर्चा करके FATF कुछ फैसला लेगी। इसका मतलब एक तरह से पाकिस्तान को आतंकियों को फंडिंग करने का लाइसेंस मिल गया है।

बता दें कि पिछले साल भारतीय मीडिा ने खुलासा किया था कि किस तरह से आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद ऑनलाइन माध्यम से पाकिस्तान में 391 करोड़ रुपयों का चंदा इकट्ठा कर रही है। साथ ही इसी चंदे और पाकिस्तान की सरकार की मदद के माध्यम से ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त अपने हेडक्वार्टर का पुनर्मिर्माण कर रही है जो कि अब पूरा हो चुका है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि FATF ने फिलहाल अगले 3-4 साल के लिए पाकिस्तान की तरफ अपनी आंख मूंद ली है।

वहीं पाकिस्तान के मुद्दे पर FATF के प्रमुख गिल्स थॉम्पसन ने कहा की अक्टूबर 2022 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान के साथ FATF के एशिया-पैसिफिक ग्रुप (APG) के माध्यम से बातचीत की जा रही है और मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है।

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