कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। पंचकूला जिले के रायपुररानी क्षेत्र से भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है, जहां देश के चर्चित पर्ल ग्रुप (पीजीएफ/पीएसीएल) महाघोटाले से जुड़ी कुर्क (अटैच) जमीन की खरीद-फरोख्त कर दिए जाने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) की जांच में सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों और जांच एजेंसियों की रोक के बावजूद करीब 17.55 एकड़ जमीन की न केवल रजिस्ट्री कर दी गई, बल्कि उसका इंतकाल (म्यूटेशन) भी मंजूर कर दिया गया।

मामले की जांच में सामने आया कि रायपुररानी तहसील में तैनात रहे तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। बताया गया है कि पर्ल ग्रुप की संपत्तियों को पीड़ित निवेशकों के हित में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अटैच किया गया था और इन जमीनों की खरीद-बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध था। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी कर जमीन को ‘बंदी आदेश’ से मुक्त दिखाया गया।

विजिलेंस जांच के अनुसार, पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी सुरमुख सिंह के पास जमीन की जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) थी। उनकी ओर से हरदीप सिंह ने दिसंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट पंचकूला में आवेदन देकर जमीन से ट्रांसफर पर लगी रोक हटाने की मांग की। आरोप है कि इसके बाद पटवारी नरेंद्र कुमार डबास ने तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ मिलकर रिपोर्ट नंबर 232 दर्ज की और जमीन को रोक से मुक्त दिखा दिया, जबकि कानूनगो दीपक कुमार ने भी कथित तौर पर इसकी पुष्टि कर दी।

इसके बाद जनवरी 2026 में 17.55 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 के तहत करीब 4.20 करोड़ रुपये में बिक्री कर दी गई। रिकॉर्ड के मुताबिक यह जमीन कुणाल छिलाना और सौरभ नामक व्यक्तियों के नाम दर्ज हुई। इतना ही नहीं, महज कुछ दिनों में इंतकाल दर्ज कर 17 जनवरी को इसे अंतिम मंजूरी भी दे दी गई। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान शिकायतें मिलने और एसडीएम द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने के बावजूद कथित तौर पर कार्रवाई नहीं रोकी गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस ने प्राथमिक जांच रिपोर्ट सरकार को भेजी। जांच में मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2018 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश का पाया गया। चूंकि आरोप क्लास-वन अधिकारियों से जुड़े थे, इसलिए मुख्य सचिव और डीजीपी विजिलेंस से आवश्यक अनुमति ली गई। मंजूरी मिलने के बाद 30 जनवरी 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला में आरोपियों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली गई।