Dharm Desk – सावन का महीना शुरू होते ही शिव मंदिरों में रौनक बढ़ जाती है. सुबह से ही भक्त जल, दूध और बेलपत्र लेकर भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस दौरान की गई पूजा को बेहद प्रभावी माना जाता है, लेकिन कई बार लोग सही विधि का ध्यान नहीं रखते. पूजा का तरीका अगर व्यवस्थित और क्रमबद्ध हो, तो उसका असर भी ज्यादा दिखाई देता है. खास तौर पर अभिषेक करते सयम किन चीजों को पहले और बाद में चढ़ाना है, यह जानना जरूरी हो जाता है.

सावन में शिवलिंग पर अभिषेक की शुरुआत जल से की जाती है. यह एक तरह से पूजा का आधार माना जाता है, जिससे शुद्धता बनी रहती है. इसके बाद कच्चा दूध अर्पित किया जाता है. दूध चढ़ाने के दौरान धीरे-धीरे अभिषेक करना बेहतर माना जाता हैताकि पूरा वातावरण शांत और एकाग्र बना रहे. इसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया जाता है, जिसमें दही, घी, शहद और शक्कर शामिल होती है. यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फिर से जल अर्पित किया जाता है l अंत में बेलपत्र, धतूरा और फूल चढ़ाकर पूजा को पूर्ण किया जाता है.

अभिषेक करते समय रखें ध्यान

अभिषेक के दौरान कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है. सबसे पहले पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें. शिवलिंग पर चढ़ाने वाली सामग्री ताजी होनी चाहिए. बेलपत्र तीन पत्तियों वाला और बिना टूटा हुआ होना चाहिए. दूध चढ़ाते समय ध्यान रखें कि वह खराब न हो. अभिषेक के दौरान मंत्र जाप करते रहना अच्छा माना जाता है. साथ ही, पूजा के बाद प्रसाद बांटना और जरूरतमंदों की मदद करना भी सकारात्मक परिणाम देता है.

सावन सोमवार का विशेष महत्व

सावन के सोमवार को पूजा का महत्व और बढ़ जाता है. इस दिन बड़ी संख्या में लोग व्रत रखते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा करते है. कई श्रद्धालु पूरे सावन महीने में नियमित रूप से अभिषेक करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और संतुलन का अनुभव होता है.

क्या मिलता है इस अभिषेक, पूजा से

सावन में नियमित रूप से किया गया अभिषेक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद करता है. इससे मन शांत रहता है और तनाव कम होता है. परिवार के माहौल में भी सुधार देखने को मिलता है. कामकाज में रुकावटें कम होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है. जो लोग नियमित रूप से यह पूजा करते हैं. वे अपने भीतर एक अलग ऊर्जा महसूस करते हैं, जो उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है.