कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। हरियाणा में उद्योगों को बढ़ावा देने और प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने के सरकार के दावों के बीच विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का बड़ा मुद्दा दे दिया है। मुलाना से कांग्रेस विधायक पूजा चौधरी ने विधानसभा में प्रदेश में पंजीकृत कारखानों की संख्या को लेकर श्रम मंत्री से सवाल पूछा था। इसके जवाब में सरकार की ओर से पिछले पांच वर्षों के आंकड़े सदन में रखे गए।

श्रम मंत्री अनिल विज की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक, वर्ष 2022 में प्रदेश में 1,635 कारखाने पंजीकृत हुए थे। वर्ष 2023 में यह संख्या 1,277, वर्ष 2024 में 1,366 और वर्ष 2025 में 1,393 रही। वहीं वर्ष 2026 में अब तक 901 कारखाने पंजीकृत दर्ज किए गए हैं।
इन आंकड़ों ने सरकार के उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें लगातार हरियाणा में उद्योगों और निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार करने की बात कही जा रही है। सरकार नई औद्योगिक नीतियों, निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को सुविधाएं देने को अपनी उपलब्धियों के तौर पर गिनाती रही है, लेकिन विधानसभा में पेश आंकड़ों में पंजीकरण की संख्या 2022 के मुकाबले काफी नीचे दिखाई दे रही है।
1635 से 901 तक पहुंचा आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में पंजीकृत कारखानों की संख्या 1,635 थी। इसके बाद 2023 में यह घटकर 1,277 हुई, हालांकि 2024 में इसमें कुछ सुधार हुआ और आंकड़ा 1,366 तक पहुंचा। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,393 हुई। लेकिन 2026 में अब तक केवल 901 कारखाने पंजीकृत हुए हैं।
यानी 2022 के आंकड़े की तुलना में 2026 में अब तक 734 कम पंजीकरण दर्ज हुए हैं। हालांकि 2026 का आंकड़ा अभी पूरे वर्ष का नहीं है, इसलिए साल खत्म होने के बाद तस्वीर में बदलाव संभव है। बावजूद इसके विधानसभा में सामने आए आंकड़ों ने सरकार की औद्योगिक नीतियों के जमीनी असर को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
कुल 28,303 कारखाने पंजीकृत
सरकार ने अपने जवाब में यह भी बताया कि फैक्ट्री एक्ट-1948 के तहत ऑनलाइन विभागीय पोर्टल के अनुसार प्रदेश में कुल 28,303 कारखाने पंजीकृत हैं। विपक्ष का सवाल यह है कि जब सरकार लगातार उद्योगों के लिए बेहतर माहौल और नई-नई नीतियों की बात कर रही है, तो पिछले कुछ वर्षों में कारखाना पंजीकरण के आंकड़ों में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं दिखाई दे रही।
दीपेंद्र हुड्डा ने भी सरकार को घेरा
विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि सरकार की नीतियों और घोषणाओं का असली मूल्यांकन कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर स्थापित होने वाले उद्योगों और रोजगार के अवसरों से होना चाहिए।
कांग्रेस का तर्क है कि एक तरफ सरकार निवेश और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ सामने आए आंकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि औद्योगिक नीतियों का वास्तविक लाभ प्रदेश में कितने उद्योगों तक पहुंच रहा है।
जनता के बीच भी उठेगा सवाल
विधानसभा में सामने आए आंकड़े अब राजनीतिक बहस का विषय बनना तय हैं।
सरकार जहां प्रदेश में निवेश और औद्योगिक विकास को अपनी उपलब्धि बता रही है, वहीं विपक्ष इन्हीं आंकड़ों को सरकार के दावों की कसौटी बना रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हरियाणा में उद्योगों के लिए लगातार बेहतर नीतियां बनाने और निवेश का माहौल तैयार करने का दावा किया जा रहा है, तो पंजीकृत कारखानों का आंकड़ा 2022 के 1,635 से घटकर 2026 में अब तक 901 क्यों रह गया?
हालांकि 2026 का आंकड़ा अभी अधूरा है, लेकिन विधानसभा में सामने आई यह तस्वीर सरकार के लिए निश्चित तौर पर असहज करने वाली है। अब देखना होगा कि सरकार इन आंकड़ों को लेकर क्या सफाई देती है और आने वाले समय में औद्योगिक पंजीकरण के आंकड़ों में कितना सुधार दिखाई देता है।
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