रोहित कश्यप, मुंगेली। समग्र शिक्षा कार्यालय मुंगेली में कामकाज, कर्मचारियों के व्यवहार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर शिकायतों का सिलसिला सामने आया है। खास तौर पर FLN से जुड़े कर्मचारियों ने जिला मिशन समन्वयक (DMC) अशोक कुमार सोनी पर मानसिक प्रताड़ना, अभद्र व्यवहार, धमकी और कार्यालयीन कार्यों में कथित तौर पर बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्मचारियों की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई शिकायतों में एक-दो नहीं, बल्कि 14 अलग-अलग बिंदुओं में अपनी समस्याएं दर्ज कराई गई हैं।

क्या है शिकायत पत्र में?
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, राज्य कार्यालय से प्राप्त Google Form, Drive, Sheet और YouTube लिंक सहित विभिन्न जानकारियों को जिले में संचालित कराने के लिए संबंधित अधिकारियों के माध्यम से कार्य करने की कोशिश की जाती है, लेकिन DMC द्वारा कथित तौर पर इन कार्यों को देखने में रुचि नहीं ली जाती थी। कर्मचारियों का आरोप है कि राज्य कार्यालय के निर्देशानुसार बैठक से पहले जानकारी लेकर DMC के पास जाने पर उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता था कि, “ये सब फालतू का काम है, मैं क्या करूंगा।”
‘NGO वाले हो’ और नौकरी खा जाने तक की शिकायत
FLN कर्मचारियों की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कार्यालयीन कार्य को लेकर DMC के पास जाने पर उन्हें कथित तौर पर “ये सब फालतू का काम लेकर आ जाते हो” कहा जाता था। कार्यालय परिसर में दिखाई देने पर डांटने तथा “तुम लोग NGO वाले हो, इस कार्यालय में तुम लोगों की क्या वैल्यू है” जैसे शब्द कहे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कार्ययोजना तैयार करने के बाद जब कर्मचारी जानकारी देने DMC के चेंबर पहुंचे तो वे वहां मौजूद नहीं थे। अगले दिन कथित तौर पर कर्मचारियों से कहा गया कि “मैं तुम लोगों से पूछकर जाऊंगा” और तगादा करने की बात कही गई। एक अन्य आरोप में कर्मचारियों ने कहा कि किसी काम को लेकर DMC के पास जाने पर कथित तौर पर “घर की खेती है, जब चाहे आ जाते हो और जब चाहे चले जाते हो” जैसी टिप्पणी की जाती थी।
छुट्टी से लेकर CR और वेतन तक का दबाव बनाने का आरोप
शिकायत में कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य खराब होने पर एक दिन की छुट्टी के लिए आवेदन लेकर जाने पर भी उन्हें कथित तौर पर कहा जाता था कि “तुम लोगों को छुट्टी का प्रावधान नहीं है।”सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि कर्मचारियों को कथित तौर पर बार-बार “तुम लोगों के विरुद्ध लिख-पढ़ दूंगा, नौकरी खा जाऊंगा और CR खराब कर दूंगा” कहकर दबाव बनाने की बात कही गई है। मासिक प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर के संबंध में भी कर्मचारियों ने शिकायत की है कि महीने का कार्य और डाटा लेकर चेंबर पहुंचने के बावजूद कथित तौर पर प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया जाता था।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उन्हें घंटों इंतजार करने के बाद यह कहकर वापस भेज दिया जाता था कि “मेरे पास फाइल चेक करने का टाइम नहीं है।”उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर नहीं करने और वेतन प्रभावित होने की बात कहने पर कथित तौर पर “पैसे को क्या करोगे”, “घर तुम लोग ही चलाते हो क्या” जैसी टिप्पणियां किए जाने का आरोप भी शिकायत में लगाया गया है।महिला कर्मचारियों ने अपने आवेदन में अभद्र व्यवहार, का आरोप लगाते हुए कहा है कि इसका उनके मानसिक एवं कार्य व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
शिकायत में यह भी आरोप है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर करने नहीं दिया जा रहा था और उपस्थिति रजिस्टर छीन लिया गया।
एक शिकायत के बाद भी कथित व्यवहार जारी रहने का आरोप
FLN कर्मचारियों की ओर से 27 अगस्त 2026 को दी गई शिकायत के बाद भी मामला थमा नहीं। बाद की शिकायत में नेहा शर्मा और जया साहू ने आरोप लगाया कि पूर्व में शिकायत किए जाने के बावजूद उनके साथ मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वाला व्यवहार जारी रहा।शिकायत में 10 सितंबर को जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा आयोजित परिचयात्मक बैठक का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बैठक में परिचय एवं विभागीय जानकारी ली जा रही थी। इसी दौरान APC द्वारा बुलाए जाने के बाद वे भी DEO के कक्ष में बैठने पहुंचे, लेकिन आरोप है कि बैठते समय DMC द्वारा अमर्यादित टिप्पणी करते हुए उन्हें वहां से जाने के लिए कहा गया।
कर्मचारियों ने इसे महिला कर्मचारियों के सम्मान, सुरक्षा और गरिमामय कार्य वातावरण से जोड़ते हुए मामले की जांच और संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
APC भी उठा चुके हैं कार्यालय की व्यवस्था पर सवाल
यह विवाद केवल FLN कर्मचारियों की शिकायत तक सीमित नहीं है। इससे पहले जिला परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा में कार्यरत APC स्तर के अधिकारियों ने भी 2 जुलाई 2026 को कलेक्टर एवं पदेन जिला मिशन संयोजक के समक्ष कार्यालय में कथित अव्यवस्था और अनियमितता को लेकर शिकायत की थी।
पूर्व APC की शिकायत में आरोप लगाया गया था कि खण्ड प्रभार विधिवत नहीं दिया गया, जबकि संबंधित खण्ड के कार्यों का संचालन किया जा रहा था। बिना सहमति अथवा जानकारी के दूसरे कर्मचारियों द्वारा संबंधित खण्ड की फाइल आगे बढ़ाए जाने की बात भी कही गई थी।
शिकायत में आवश्यक विभागीय दस्तावेज और संसाधन बंद आलमारी में होने, जरूरी दस्तावेज एवं आलमारी उपलब्ध नहीं होने तथा स्कूल निरीक्षण के लिए मना किए जाने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा साप्ताहिक विभागीय समीक्षा बैठक आयोजित नहीं किए जाने, जिला एवं विकासखंड कार्यालय के कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र शब्दों का प्रयोग तथा तानाशाहीपूर्ण व्यवहार का आरोप भी APC कर्मचारियों ने लगाया था।यानी अलग-अलग समय पर सामने आए इन दस्तावेजों को देखें तो FLN कर्मचारियों की व्यक्तिगत शिकायतों के साथ-साथ कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी पूर्व में सवाल उठाए जा चुके हैं।
तीन महीने से वेतन का इंतजार, कर्मचारी आर्थिक परेशानी में
इधर समग्र शिक्षा के अंतर्गत मुंगेली, लोरमी और पथरिया BRC कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला भी सामने आया है। दिए गए आवेदन में कर्मचारियों ने बताया कि जुलाई 2026 से सितंबर 2026 तक तीन महीने का वेतन लंबित है। कर्मचारियों के अनुसार राज्य कार्यालय समग्र शिक्षा रायपुर से तीन महीने के वेतन के लिए आर्थिक आवंटन जिला कार्यालय मुंगेली को प्राप्त हो चुका है, जिसे SNA-SPARSH के माध्यम से लिमिट जारी किया जाना है। वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों ने आर्थिक और मानसिक परेशानी का हवाला देते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की है। एक ही विभाग में एक ओर कार्यालयीन व्यवहार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर शिकायतें, दूसरी ओर तीन महीने से वेतन लंबित होने का मामला सामने आने से समग्र शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
शिकायतें निराधार, छवि खराब करने की साजिश- DMC
इन आरोपों पर DMC अशोक कुमार सोनी ने शिकायतों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि FLN कर्मचारियों की शिकायतें तथ्यहीन हैं और उनकी छवि खराब करने की साजिश के तहत इस तरह की शिकायतें की जा रही हैं।
DMC के मुताबिक, विभागीय कार्य उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार करना होता है। उनका कहना है कि संबंधित कर्मचारियों को दिए गए कार्यों से बचने के लिए इस तरह के पैतरे आजमाए जाते रहते हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार के आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
दोनों पक्षों को बैठाकर सुलझाएंगे विवाद- DEO
वहीं जिला शिक्षा अधिकारी मोहन मोहन लाल पटेल ने पूरे मामले को विभागीय मामला बताया है। DEO के अनुसार दोनों पक्षों को बैठाकर उनकी शिकायतों और आपत्तियों को सुना जाएगा तथा शिकवा-शिकायतों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। DEO का कहना है कि इस तरह के विवादों से विभाग का कामकाज प्रभावित होता है, इसलिए आपसी शिकायतों का समाधान कर विभागीय कार्यों को सुचारु रूप से संचालित करना जरूरी है।
अब सवाल यह है कि FLN कर्मचारियों द्वारा लगाए गए 14 बिंदुओं के आरोप, पूर्व APC की प्रशासनिक अव्यवस्था संबंधी शिकायत और कर्मचारियों के तीन महीने के लंबित वेतन इन सभी मामलों की विभागीय स्तर पर जांच और समाधान किस तरह होता है। फिलहाल शिकायतें दस्तावेजों के रूप में अधिकारियों के समक्ष हैं और दोनों पक्षों के दावों के बीच विभागीय कार्रवाई का इंतजार है।
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