रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल पूरे हो गए हैं। दावा किया जा रहा है कि मोदी भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं और उन्होंने जवाहरलाल नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस उपलब्धि के बाद भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में विशेष अभियान चला रही है। वहीं इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसा है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि हुनर होगा तो दुनिया कदर करेगी, एड़ियां उठाने से किरदार ऊंचे नहीं होते।

बघेल ने कहा है कि क्या श्यामा प्रसाद मुखर्जी को 1947-50 तक भाजपा मंत्री मानती है? आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री जी और उनके चेले चपाटे आज चौराहों पर चिल्ला रहे हैं कि उन्होंने नेहरू जी का रिकॉर्ड तोड़ दिया, उन्हें पछाड़ दिया। अगर आपको भी ऐसा लगता है तो इसके लिए आपको बधाई। आपने एड़ियां उठाकर नेहरू जी को पछाड़ दिया। एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नेहरू जी से अधिक समय तक भारत का प्रधानमंत्री रहने का दावा करके आपने रिकॉर्ड तो बना लिया है, लेकिन इससे यह सच नहीं छिपता कि जवाहर लाल नेहरू 17 वर्ष तक (1947 से 1964) भारत के प्रधानमंत्री रहे। और 1947 से 52 के बीच के नेहरू जी के कार्यकाल को निर्वाचित न कहना पूरी तरह गलत है।

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भूपेश बघेल ने आगे कहा है कि 1946 में कांस्टीट्यूएंट असेंबली की 389 सीटों का चुनाव अविभाजित भारत में हुआ था। इसमें कांग्रेस को 208 और मुस्लिम लीग को 73 सीट मिली थी और अन्य सीट प्रिंसली स्टेटस और अन्य छोटी पार्टियों की थी। कांस्टीट्यूएंट असेंबली का 1946 का चुनाव राज्यसभा की तर्ज पर हुआ था अर्थात् 1937 से राज्य विधानसभाओं के जो चुनाव हो रहे थे, उन विधानसभाओं ने अपने-अपने राज्य से प्रतिनिधि चुनकर कांस्टीट्यूएंट असेंबली में भेजे। इन राज्यों की असेंबली में भी कांग्रेस पार्टी का बहुमत था। पाकिस्तान अलग हो जाने के बाद शेष बची 299 सीटों की कांस्टीट्यूएंट असेंबली में कांग्रेस के पास लगभग दो तिहाई बहुमत था और कांग्रेस पार्टी के नेता के रूप में नेहरू जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

बघेल ने कहा, संविधान के लागू होने के दिन से कांस्टीट्यूएंट असेंबली ने संसद की भूमिका चुनाव तक निभाई। 1951-52 के पहले चुनाव में लोकसभा की 489 सीटों का चुनाव हुआ और इसमें नेहरू जी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 389 सीट जीती यानी लगभग तीन चौथाई बहुमत। यदि मोदी सरकार के इस तर्क को माना जाए कि 47 से 52 की सरकार निर्वाचित सरकार नहीं थी तो क्या सरदार पटेल कभी भी निर्वाचित गृहमंत्री और उपप्रधानमंत्री नहीं रहे? तो क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में सरदार वल्लभ भाई पटेल का कोई वैध अस्तित्व ही नहीं है?

भूपेश बघेल ने कहा, सरदार पटेल जी दिसंबर 1950 में अपनी मृत्यु तक अपने पद पर बने रहे और देश की सेवा करते रहे। तो क्या मोदी जी! आपके हिसाब से दलितों के मसीहा बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर भी कथित निर्वाचित सरकार के मंत्री नहीं रहे? चलिए! सब छोड़िए, ये बताइए कि 1947 से 1950 तक नेहरू जी की कैबिनेट में आपके नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंत्री रहे, यह आप मानेंगे या नहीं? अगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को आप मंत्री मानेंगे तो अभी नेहरू जी के कार्यकाल की बराबरी में आपको समय है। और हां! शायद आपको भी फिर से सत्ता में वापसी का भरोसा नहीं है इसलिए समय पूर्व जश्न मना रहे हैं। वैसे भी कार्यकाल और कद में फर्क होता है। कद नापने में जन्मों लगेंगे।

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